सत्ता के सुख में आ बैल मुझे मार..क्यों!

Published at :21 May 2014 5:20 AM (IST)
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सत्ता के सुख में आ बैल मुझे मार..क्यों!

।। रजनीश आनंद।। (प्रभात खबर, रांची) जब से अच्छे दिन आये हैं, मैं बहुत परेशान हूं. दूध महंगा हो गया. ऑटो हड़ताल है. ऑफिस जाने के लिए मशक्कत करनी पड़ रही है. ऑटो की राह देखते-देखते थक चुकी थी, तभी एक ऑटो मेरे सामने आकर रुका. बैठने जा रही थी कि चालक ने भाड़ा बता […]

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।। रजनीश आनंद।।

(प्रभात खबर, रांची)

जब से अच्छे दिन आये हैं, मैं बहुत परेशान हूं. दूध महंगा हो गया. ऑटो हड़ताल है. ऑफिस जाने के लिए मशक्कत करनी पड़ रही है. ऑटो की राह देखते-देखते थक चुकी थी, तभी एक ऑटो मेरे सामने आकर रुका. बैठने जा रही थी कि चालक ने भाड़ा बता दिया, जो तय किराये से पांच-दस रुपये ज्यादा था. मैंने मिन्नत की कुछ कम करने की, लेकिन ऑटो चालक नहीं माना.

मरता क्या न करता, सो मैं ऑटो पर सवार होने आगे बढ़ी. तभी मेरे मित्र शर्मा जी फटफटिया लेकर पहुंच गये. मुङो रोकते हुए बोलेा, मोहतरमा कहां चलीं? ऑफिस जा रहीं हैं, तो मैं छोड़ देता हूं. मैं ऑटो छोड़ उनकी फटफटिया पर बैठ गयी. अब शर्मा जी ने शुरू हो गये, बोले- मैडम, कैसा लग रहा है? मैं समझ गयी कि नमो भक्त शर्माजी क्या कहना चाह रहे हैं, सो मैंने चुटकी ली, अरे आपके तो अच्छे दिन आ गये हैं, देखिए हमारे कब आते हैं. अभी तो चौकीदार ने देश की कुंजी थामी नहीं है. क्या कहूं. मेरी इस प्रतिक्रिया पर शर्मा जी बौखला गये. मोहतरमा आप ऐसे क्यों बोल रहीं हैं, अभी तो नमो भाई ने शपथ भी नहीं ली है. शपथ लेने के बाद देखिए, कैसे अच्छे दिने आते हैं.

अब तो नमो ने कह भी दिया है कि यह सरकार गरीबों की है. मुङो समझाने की कोशिश में शर्मा जी का नियंत्रण गाड़ी पर से ढीला पड़ गया और एक कार वाले ने शर्मा जी की फटफटिया में पीछे से ठोकर मार दी. किसी तरह शर्माजी ने गाड़ी को नियंत्रित किया और कारवाले से भिड़ गये. बोले-हमारे साथ महिला हैं अगर उन्हें चोट लग जाती? इस पर कार वाला भी गरमा गया, तो हम क्या करें, बुढ़ापे में गाड़ी संभलती नहीं, तो चलाते क्यों हो? बूढ़ा कहने से शर्मा जी का खून खौल उठा. बोले, आपको मालूम नहीं मैं नमो भाई का भक्त हूं.

गुंडागर्दी नहीं चलेगी. इसपर कार वाला बोला,मुङो तो आप कांग्रेसी लगते हैं, जो मौके का फायदा उठाने में जुटे हो. गलती किसकी थी बतायें. बात बढ़ती देख मैंने बीच-बचाव किया और शर्माजी को समझाने की कोशिश की. लेकिन शर्माजी ने मुङो बोलने नहीं दिया और उलझ पडे. मैंने कार वाले को ही समझाना उचित समझा. अरे जाने दीजिए, इनकी उम्र का ख्याल कीजिए. मेरी इस बात पर वह बोला. इन्हें समझा दें, सरकार बन गयी है, इसका मतलब यह नहीं कि बौरा जायें. संभलना सीखें. सत्ता सुख में इतने अंधे न हो जायें कि सही-गलत का अंतर न भूल जायें. मैं तो सही जा रहा था. मेरी प्रार्थना पर कार वाला चला गया. तब मैंने शर्माजी से कहा, चलिए शर्माजी ऐसा होता रहता है.

मेरे आग्रह पर शर्मा जी ने गाड़ी स्टार्ट तो किया, लेकिन उनका उत्साह गायब. मैंने महसूस किया कि नमो समर्थक इन दिनों कुछ ज्यादा ही उत्साह में हैं और अकारण आ बैल मुङो मार कर रहे हैं, जिससे बिना वजह उनकी फजीहत हो रही है, लेकिन क्या करें, सत्ता का नशा होता ही है ऐसा..

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