पंचायतों से मिले वृद्धा पेंशन

पंचायती राज व्यवस्था को सक्रिय एवं कारगर बनाने के लिए अधिकारों एवं जिम्मेदारियों को पंचायतों को सौंपनी होंगी. जैसे वृद्धावस्था पेंशन, विधवा पेंशन, विकलांग पेंशन का पूरा दायित्व पंचायतों की होनी चाहिए. पूर्व से चली आ रही व्यवस्था में अनेक पेंचिदिगीयां हैं, जिसके कारण अनेक अवांछित लोग फायदा उठा रहे हैं. अनेक पेंशनधरियों को इस […]
पंचायती राज व्यवस्था को सक्रिय एवं कारगर बनाने के लिए अधिकारों एवं जिम्मेदारियों को पंचायतों को सौंपनी होंगी. जैसे वृद्धावस्था पेंशन, विधवा पेंशन, विकलांग पेंशन का पूरा दायित्व पंचायतों की होनी चाहिए. पूर्व से चली आ रही व्यवस्था में अनेक पेंचिदिगीयां हैं, जिसके कारण अनेक अवांछित लोग फायदा उठा रहे हैं.
अनेक पेंशनधरियों को इस कारण पेंशन नहीं मिल पा रहा है. लंबी पेंशन प्रक्रिया को आसान किया जा सकता है. पंचायतों को पेंशन जिम्मे देकर. सबसे बड़ा लाभ यह होगा कि पेंशन की असमानता समाप्त हो जायेगी.
अभी वर्तमान में किसी पंचायत में पेंशन के कुल लाभुकों की संख्या 200 है तो किसी पंचायत में हजार से अधिक. नयी व्यवस्था में प्रत्येक पंचायत को समान रूप से अलॉटमेंट दे दिया जाये. समाज के अंतिम व्यक्ति से शुरू कर वृद्ध, विकलांग और विधवा सहित अत्यंत अभावग्रस्त व्यक्ति को भी पेंशन उपलब्ध कराया जाये.
बालमुकुंद मोदी, इमेल से
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