शरीफ लोग दूर जा के बैठ गये!

।। चंचल।। (सामाजिक कार्यकर्ता) खबर है- ‘भगत का गधा मिला.’ इसमें नमक-मिर्च भी है. नमक है कि वह हर बखत रेंकता रहता है. पहले जो चिपोंक-चिपोंक करता था, अब तो पता नहीं क्या-क्या बोलता है. नीम के नीचे जो बोलेगा, कटहल के पेड़ तक जाते-जाते उसकी आवाज ही बदल जाती है. और मिर्च है कि […]
।। चंचल।।
(सामाजिक कार्यकर्ता)
खबर है- ‘भगत का गधा मिला.’ इसमें नमक-मिर्च भी है. नमक है कि वह हर बखत रेंकता रहता है. पहले जो चिपोंक-चिपोंक करता था, अब तो पता नहीं क्या-क्या बोलता है. नीम के नीचे जो बोलेगा, कटहल के पेड़ तक जाते-जाते उसकी आवाज ही बदल जाती है. और मिर्च है कि अब वह दुलत्ती का उस्ताद हो गया है. घर में एक भी प्राणी नहीं है जो उसकी दुलत्ती से घायल न हो. सबका थोभड़ा सूजा है. इसका मजा गांव के लफंगे ले रहे हैं. कयूम ने भगत के भागे हुए गधे के मिलने की खबर का खुलासा किया. नवल उपाधिया को किसी भी खबर पर यकीन नहीं रहा- अपनी आंख से देखा है काका कि ऐसई सुनी-सुनाई सुना रहे हो? कयूम मुस्कुराये- नहीं बेटवा! सुनी-सुनाई कहता नहीं, उस गधे ने खुद बताया है. लाल्साहेब की आंख गोल हो गयी- वह गधा बोलता है? उमर दरजी को हंसी आ गयी- ये लो गधा बोलता है, इत्ता भी नहीं मालूम? जोर का ठहाका लगा. लाल्साहेब ने कहा- मने कि उसने कैसे कहा कि वह आ गया है? हुआ ये कि उसे अपने छांव की याद आयी, उस जगह भगत ने मुर्गी का दरबा बना दिया था, उसे देखते ही वह रेंकने लगा. तो लोगों ने समझा कि अलादाद आ गया है.
अलादाद? पिंटू यह नाम पहली दफा सुन रहा था, उसे ताज्जुब हुआ.
लखन कहार ने तफसील से बताया-भगत अपने गधे को प्यार से अलादाद ही कहते हैं. अलादाद के आने से लौंडे खुश हैं, भगत से कह रहे हैं कि जश्न मनाया जाये. सोनपुर की नौटंकी बुलायी जाये. पटाखे दगें. अलादाद को माला पहना के बिठाया जाये. चिखुरी जो अब तक चुप बैठे सुन रहे थे गुर्राये- तुम लोगों के पास और कोई बात नहीं है, तब से गधे पर लगे हुए हो? मद्दू पत्रकार को मौका मिल गया-एक बात है काका! हम धीरे-धीरे अमरीका हो रहे हैं. कीन उपाधिया को खुसी वाला ताज्जुब हुआ- अमरीका हो रहे हैं! मद्दू ने खुलासा किया- जैसे हम लोग यहा गधे पर वक्त जाया कर रहे हैं, उसी तरह वहां भी दुनिया की तमाम गैर-जरूरी बातों पर बहस चलती रहती है. मजेदार बात तो यह कि वहां की आधी से ज्यादा आबादी न गधे को जानती है न अमरूद के पेड़ को. तकनीकी सुविधा इतनी ज्यादा मिल गयी है की वे कमरे से बाहर ही नहीं निकलते. जैसे अपने यहां शुरू हुआ है. आज किसी नेता को सुनने या देखने कोई जाता है? अगर उसे लालच देकर न फुसलाया जाये. अपने घरों में बैठे टीबी खोला, सब देख लिया..
लाल्साहेब को ताज्जुब हुआ- लेकिन चुनाव में नेता जब बोलते हैं, तो भीड़ दीखायी पड़ती है. ओबामा को हमने खुद देखा है टीबी पे. मद्दू मुस्कुराये- इसे कहते हैं प्रायोजित भीड़. सारा काम टीबी वाला करता है पैसे लेकर. भीड़ से लेकर ताली कब आर कहां बजानी है सब. यह है डिब्बे का खेल. हम भी उसी तरफ बढ़ रहे हैं. लखन कहार ने खुशी जतायी- तब और का चाही? र्हे लगे न फिटकिरी, रंग चोखा..
चिखुरी ने घुड़की दी- कमबख्त! इसके खतरे तो देखो. अगर यह सिस्टम हियां चला तो सब गुड़ गोबर. इसका मतलब है, जिसके पास पैसा होगा, जो डिब्बा वालों को खरीद सकेगा, वही चुनाव भी लड़ पायेगा. जनता-जनार्दन गयी भाड़ में. मद्दू ने लोका- सुना नहीं आपने? कल एक दमदार पत्रकार ने इसी सवाल पर डिब्बे को लात मार कर नौकरी छोड़ दी.. इससे हमको मतलब नहीं, चिखुरी ने बीच में ही मद्दू को रोका- देखो इस मुल्क में खतरा दूसरा है. मुट्ठी भर प्रचारकों के हाथ में प्रचार का औजार है. उनमें चीख-चीख कर झूठ बोलने की कला है, वे किसी को भी नेता बना देंगे. बताइए, जिस मुल्क में खबर चल रही हो कि हनुमान जी दूध पी रहे हैं! बगैर ड्राइबर के गाड़ी चल रही है. सांप ने सड़क पर कब्जा कर लिया है. बाड़मेर में बरफ गिरी है.. ऐसी खबरों पर जनता यकीन करती हो, तो यहां किसी को भी नेता बनाया जा सकता है.
अलादाद को भी? उमर दरजी ने संजीदगी से पूछा. पर सवाल वहीं अटक गया. चिखुरी ने बात को दूसरी तरफ मोड़ा- मद्दू आप पत्रकार हो, बिहार की बड़ी खबर है, पर दिख नहीं पड़ रही है. वहां के रंगकर्मियों ने एक परचा निकाला है- ‘चरवाहे की गलती पर देश को कसाई के हाथ नहीं सौंपा जा सकता.’ देख कर तबियत खुश हो गयी. चलो चरवाहे से गलती हुई, उसे सुधारने के बजाय हम कसाई को बुला लें, कहां तक जायज है? हमने उस कागद पर दस्तखत कर दिया है. और उस पर लिख दिया है, इस कागद को संभाल कर रखना, यह अपने जम्हूरी निजाम का दमदार दस्तावेज है. अब शरीफ बन कर किनारे बैठने का वक्त नहीं है, यह वक्त की मांग है कि हाथ से हाथ मिला कर तानाशाही को मिटा दो.
दुष्यंत की एक लाइन है- लहू लुहान नजारों का जिक्र आया तो। शरीफ लोग उठे और दूर जा के बैठ गये।। वह शरीफ मत बनो..आसरे ने आवाज दी- चाय.. नवल ने नारा दिया- अलादाद आये हैं, नया सुर लाये हैं..
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