अन्वेषण की गलत दिशा
Updated at : 19 Jun 2017 6:32 AM (IST)
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भारतीय कम्यूनिस्ट पक्ष के नेता गोविंद पानसरे हत्या के मामले में सनातन संस्था का साधक समीर गायकवाड को जमानत मिली है. शुरू से ही पूरे देश में यह मामला चर्चा में रहा है. जो व्यक्ति डेढ़ साल से जेल में है और उसी ने गुनाह किया है, यह साबित करने के लिए जरूरी सबूत इतने […]
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भारतीय कम्यूनिस्ट पक्ष के नेता गोविंद पानसरे हत्या के मामले में सनातन संस्था का साधक समीर गायकवाड को जमानत मिली है. शुरू से ही पूरे देश में यह मामला चर्चा में रहा है. जो व्यक्ति डेढ़ साल से जेल में है और उसी ने गुनाह किया है, यह साबित करने के लिए जरूरी सबूत इतने बड़े कार्यकाल में जमा न कर पाना जांच-पड़ताल पर ही सवाल खड़ा करता है.
न्यायालय हमेशा सबूत मांगता है और वही पेश न कर पाने से किसी को भी जेल में रखने की इजाजत नहीं देता. न्यायालय ने सुनवाइयों में कई बार नाराजगी जताते हुए उन्हें फटकारा है. न्यायालय से बार-बार पड़ने वाली फटकारों से साफ है कि छानबीन ठीक तरह से नहीं हो रही है. इस मामले का अन्वेषण कहां तक पहुंचा है, यह देश को पता चलना जरूरी है.
रामदास भोईर, इमेल से
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