झारखंड : नियम को कैबिनेट की मंजूरी, पार्षद से मेयर तक हटाये जा सकेंगे

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झारखंड : नियम को कैबिनेट की मंजूरी, पार्षद से मेयर तक हटाये जा सकेंगे

रांची : कैबिनेट ने भ्रष्टाचार सहित अन्य प्रकार के आरोपों के प्रमाणित होने पर स्थानीय निकायों के चुने हुए जनप्रतिनिधियों को पद से हटाने के लिए बने नियम को मंजूर किया. इस नियम को नगरपालिका निर्वाचन प्रतिनिधि अनुशासन एवं अपील नियमावली 2017 के नाम से जाना जायेगा.इसके तहत अंतिम रूप से अयोग्य करार दिये जानेवाले […]

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रांची : कैबिनेट ने भ्रष्टाचार सहित अन्य प्रकार के आरोपों के प्रमाणित होने पर स्थानीय निकायों के चुने हुए जनप्रतिनिधियों को पद से हटाने के लिए बने नियम को मंजूर किया.
इस नियम को नगरपालिका निर्वाचन प्रतिनिधि अनुशासन एवं अपील नियमावली 2017 के नाम से जाना जायेगा.इसके तहत अंतिम रूप से अयोग्य करार दिये जानेवाले जनप्रतिनिधि भविष्य में किसी शहरी स्थानीय निकाय से चुनाव नहीं लड़ सकेंगे. कैबिनेट से मंजूर नियमावली में स्थानीय निकाय के चुने गये जनप्रतिनिधियों को पद से हटाने की शर्तें और प्रक्रिया निर्धारित की गयी हैं. आरोप गठन के बाद दो माह तक चलनेवाली प्रक्रिया के दौरान आरोपी निर्वाचित प्रतिनिधि को अपनी बात कहने का अवसर मिलेगा.
उसके बाद ही अंतिम फैसला नगर विकास विभाग के स्तर पर लिया जायेगा. निर्वाचित पदाधिकारी के विरुद्ध लगे आरोप गठन के बाद संयुक्त सचिव स्तर के अधिकारी इसकी जांच करेंगे. निर्वाचित प्रतिनिधि का पक्ष सुनेंगे. अवर सचिव स्तर के अधिकारी या संबंधित निकायों के कार्यपालक पदाधिकारी द्वारा मनोनीत राजपत्रित पदाधिकारी प्रस्तुतिकरण पदाधिकारी होंगे. जांच समिति 10 दिनों के अंदर आरोप पत्र और साक्ष्यों की सूची तैयार करेगी. पांच दिनों में आरोपित प्रतिनिधियों को नोटिस जारी कर बचाव पक्ष का बयान दर्ज करने के लिए समय निर्धारित करेंगे.
15 दिनों के अंदर सुनवाई और जरूरत होने पर गवाहों का प्रतिपरीक्षण करेंगे. इसके बाद अगले पांच दिनों में समिति अनुशंसा के साथ रिपोर्ट प्रस्तुत करेंगे. इसके बाद नगर विकास विभाग द्वारा अंतिम फैसला लिया जायेगा.
इसे नगरपालिका निर्वाचन प्रतिनिधि अनुशासन व अपील नियमावली 2017 के नाम से जाना जायेगा
अयोग्य करार दिये जाने की शर्तें
स्थानीय निकाय की लगातार तीन बैठकों में अनुपस्थित रहा हो
भारत का नागरिक नहीं रहा हो
केंद्र या राज्य सरकार या किसी स्थानीय प्राधिकार की सेवा में हो
किसी ऐसे संस्थान में कार्यरत हो, जिससे केंद्र या राज्य सरकार से सहायता मिलती हो
मानसिक रूप से अस्वस्थ घोषित किया गया हो
दीवालिया घोषित होने के लिए आवेदन दिया हो
लोक सेवा के लिए अयोग्य करार
छह माह से अधिक कारावास
अापराधिक मामले में अभियुक्त होने के कारण छह माह से फरार
नगरपालिका के अधीन वेतनभोगी हो या लाभ का पद पर हो
भ्रष्ट आचरण या कदाचार का दोषी पाया गया हो
जिस वर्ष निर्वाचन हुआ हो, उसके पूर्ववर्ती वर्ष में नगर पालिका का बकायेदार हो अपने कार्यों को करने से इनकार करता हो या जानबूझ कर उपेक्षा करता हो अपनी शक्तियों का दुरुपयोग करता हो
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