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चीन ने पेंगोंग झील का इलाका पूरी तरह से अपने क्षेत्र में पड़ने का किया दावा

Updated at : 12 Sep 2019 10:21 PM (IST)
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चीन ने पेंगोंग झील का इलाका पूरी तरह से अपने क्षेत्र में पड़ने का किया दावा

बीजिंग : चीन ने बृहस्पतिवार को दावा किया कि पूर्वी लद्दाख का पेंगोंग झील इलाका पूरी तरह से उसके भूभाग में पड़ता है और यह उसके प्रभावी अधिकार क्षेत्र में है. दरअसल, इस इलाके में भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच एक बार फिर से गतिरोध हो गया. नयी दिल्ली में भारतीय सैन्य सूत्रों ने […]

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बीजिंग : चीन ने बृहस्पतिवार को दावा किया कि पूर्वी लद्दाख का पेंगोंग झील इलाका पूरी तरह से उसके भूभाग में पड़ता है और यह उसके प्रभावी अधिकार क्षेत्र में है. दरअसल, इस इलाके में भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच एक बार फिर से गतिरोध हो गया.

नयी दिल्ली में भारतीय सैन्य सूत्रों ने बताया कि झील के तट पर बुधवार को भारत और चीन के सैनिकों के बीच धक्का-मुक्की हुई थी. लेकिन, इस विषय को बातचीत के जरिये सुलझा लिया गया है. पूर्वी लद्दाख में स्थित इस झील के दो तिहाई हिस्से पर चीन का कब्जा है. सूत्रों ने बृहस्पतिवार को बताया कि इलाके में भारतीय सैनिकों की गश्त पर चीन के सैनिकों ने आपत्ति जतायी थी, लेकिन भारतीय सैनिकों ने उनकी आपत्तियों पर ध्यान नहीं दिया और दोनों ओर के सैनिकों के बीच धक्का-मुक्की हुई. घटना के बाद दोनों पक्षों ने और सहायता बुला ली. हालांकि, दोनों पक्षों के बीच प्रतिनिधि स्तर की बातचीत के बाद इस विवाद का हल निकल गया. एक अधिकारी ने बताया कि इस तरह की घटनाओं के समाधान के लिए एक तय प्रक्रिया है.

इस घटना पर प्रतिक्रिया जाहिर करते हुए चीनी विदेश मंत्रालय ने मीडिया के सवालों के एक लिखित जवाब में कहा, कुछ खबरों में जिक्र किया गया कि यह इलाका पूरी तरह से चीन में पड़ता है और बीजिंग प्रभावी अधिकार क्षेत्र का इस्तेमाल करता रहा है. जवाब में कहा गया है, चीन के सीमा सैनिकों ने हमेशा ही संबंधित समझौतों तथा चीन एवं भारत के बीच सहमतियों का सख्ती से पालन किया है तथा चीनी भूभाग पर नियमित रूप से गश्त लगायी है. जम्मू कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 के ज्यादातर प्रावधानों को भारत के रद्द करने और राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों जम्मू कश्मीर और लद्दाख में बांटने के फैसले के बाद दोनों देशों के सैनिकों के बीच यह गतिरोध हुआ. चीन ने लद्दाख को केंद्र शासित प्रदेश बनाये जाने पर आपत्ति जताते हुए कहा था कि इसने इसकी क्षेत्रीय संप्रभुता को कमजोर किया है. इस बयान पर नयी दिल्ली ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की और बीजिंग से भारत के अंदरूनी मामलों पर टिप्पणी करने से बचने को कहा.

बुधवार के गतिरोध के बाद भारतीय सैन्य सूत्रों ने बताया कि दोनों पक्षों के बीच हुआ विवाद बृहस्पतिवार को प्रतिनिधिमंडल स्तर की बातचीत के बाद सुलझ गया. भारतीय थल सेना के सूत्रों ने बताया कि वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) के बारे में दोनों देशों के अलग-अलग नजरिये को लेकर यह घटना हुई. एक अधिकारी ने कहा, इस तरह की घटनाओं को सुलझाने के लिए निर्धारित तंत्र हैं. हालांकि, यह पहला मौका नहीं है जब पेंगोंग झील इलाके में दोनों देशों के सैनिकों के बीच गतिरोध हुआ है. अगस्त 2017 में दोनों पक्षों के सैनिकों के बीच एक बड़ा गतिरोध हुआ था. तब दोनों देशों के सैनिकों के बीच हाथापाई हुई थी और पथराव भी किये गये थे. भारत और चीन के बीच तनाव की ये खबरें ऐसे वक्त में आयी हैं, जब दोनों देश चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की अगले महीने एक अनौपचारिक शिखर बैठक के लिए उनकी भारत की संभावित यात्रा की तैयारियों में जुटे हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अप्रैल में वुहान में शी से मुलाकात की थी.

भारत और चीन सीमा मुद्दे का हल करने के लिए फिलहाल 22वें दौर की विशेष प्रतिनिधि स्तर की वार्ता के लिए बातचीत कर रहे हैं. चीनी विदेश मंत्रालय ने कहा था कि नयी दिल्ली में होने वाली बैठक की तारीखों पर विचार किया जा रहा है. वार्ता के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और चीनी विदेश मंत्री वांग यी अपने-अपने देशों के विशेष प्रतिनिधि हैं. भारत और चीन के बीच एलएसी की 3,488 किमी लंबी सीमा है. चीन अरुणाचल प्रदेश को दक्षिणी तिब्बत का हिस्सा बताते हुए उस पर दावा करता रहा है, जबकि भारत उसके इस दावे का विरोध करता रहा है.

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