Unnao Rape Case: जब तक कुलदीप सेंगर को फांसी की सजा…, सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के बाद क्या कहा पीड़िता ने

Published by : Amitabh Kumar Updated At : 29 Dec 2025 2:07 PM

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उन्नाव बलात्कार मामले की सुनवाई हुई सुप्रीम कोर्ट में (Photo: PTI)

Unnao Rape Case: उन्नाव रेप मामले में पूर्व विधायक कुलदीप सेंगर को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है. दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा दी गई जमानत पर सर्वोच्च न्यायालय ने रोक लगा दी है. इस फैसले के बाद पीड़िता ने क्या कहा जानें.

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Unnao Rape Case: सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को दिल्ली हाईकोर्ट के उस आदेश पर रोक लगा दी, जिसमें 2017 के उन्नाव रेप मामले में दोषी और भाजपा से निष्कासित नेता कुलदीप सिंह सेंगर की उम्रकैद की सजा को निलंबित किया गया था. सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से पीड़िता पक्ष को राहत मिली है. दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश पर सुप्रीम कोर्ट की रोक पर पीड़िता ने खुशी जताई. उसने कहा कि वह इस फैसले से बहुत खुश है और न्याय मिलने तक अपनी लड़ाई जारी रखेगी. पीड़िता ने कहा कि जब तक सेंगर को फांसी की सजा नहीं मिलती, तब तक उसके परिवार को न्याय नहीं मिलेगा.

सीबीआई ने दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती दी

प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जे.के. माहेश्वरी और न्यायमूर्ति ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की अवकाशकालीन पीठ ने कुलदीप सेंगर को नोटिस जारी कर सीबीआई की याचिका पर जवाब मांगा है. सीबीआई ने दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती दी है. सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगाने की मांग की. पीठ ने कहा कि वह मामले के सभी पहलुओं पर विचार करेगी. अदालत ने स्पष्ट किया कि 23 दिसंबर के हाईकोर्ट आदेश के बावजूद सेंगर को हिरासत से रिहा नहीं किया जाएगा. पीठ ने कहा कि मामले में कानून से जुड़े कई महत्वपूर्ण सवाल हैं.

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जेल से बाहर नहीं आ पाएगा कुलदीप सेंगर

दिल्ली हाईकोर्ट ने उन्नाव रेप मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे कुलदीप सेंगर की सजा यह कहते हुए निलंबित कर दी थी कि वह सात साल पांच महीने जेल में बिता चुके हैं. हाईकोर्ट ने यह राहत उसकी अपील पर अंतिम फैसला आने तक दी थी. सेंगर ने दिसंबर 2019 में निचली अदालत द्वारा सुनाई गई सजा को चुनौती दी है. हालांकि भाजपा से निष्कासित नेता सेंगर फिलहाल जेल में ही रहेगा. कारण यह है कि वह पीड़िता के पिता की हिरासत में हुई मौत के मामले में 10 साल की सजा काट रहा है. उस केस में उसे जमानत नहीं मिली है, इसलिए वह जेल से बाहर नहीं आ पाएगा.

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अमिताभ कुमार झारखंड की राजधानी रांची के रहने वाले हैं और पिछले कई वर्षों से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय हैं. डिजिटल न्यूज में अच्छी पकड़ है और तेजी के साथ सटीक व भरोसेमंद खबरें लिखने के लिए जाने जाते हैं. वर्तमान में अमिताभ प्रभात खबर डिजिटल में नेशनल और वर्ल्ड न्यूज पर फोकस करते हैं और तथ्यों पर आधारित खबरों को प्राथमिकता देते हैं. हरे-भरे झारखंड की मिट्टी से जुड़े अमिताभ ने अपनी शुरुआती पढ़ाई जिला स्कूल रांची से पूरी की और फिर Ranchi University से ग्रेजुएशन के साथ पत्रकारिता की पढ़ाई की. पढ़ाई के दौरान ही साल 2011 में रांची में आयोजित नेशनल गेम को कवर करने का मौका मिला, जिसने पत्रकारिता के प्रति जुनून को और मजबूत किया.1 अप्रैल 2011 से प्रभात खबर से जुड़े और शुरुआत से ही डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय रहे. खबरों को आसान, रोचक और आम लोगों की भाषा में पेश करना इनकी खासियत है. डिजिटल के साथ-साथ प्रिंट के लिए भी कई अहम रिपोर्ट कीं. खासकर ‘पंचायतनामा’ के लिए गांवों में जाकर की गई ग्रामीण रिपोर्टिंग करियर का यादगार अनुभव है. प्रभात खबर से जुड़ने के बाद कई बड़े चुनाव कवर करने का अनुभव मिला. 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के साथ-साथ झारखंड विधानसभा चुनावों (2014, 2019 और 2024) की भी ग्राउंड रिपोर्टिंग की है. चुनावी माहौल, जनता के मुद्दे और राजनीतिक हलचल को करीब से समझना रिपोर्टिंग की खास पहचान रही है.

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