Uttarakhand: नहीं चलेगा 50 हजार घरों पर बुलडोजर! SC ने लगायी रोक, राज्य सरकार और भारतीय रेलवे को नोटिस

हल्द्वानी के लोगों के लिए गुरुवार का दिन बहुत बड़ा है. हल्द्वानी विरोध और दिल्ली के शाहीन बाग के विरोध को एक ही तर्ज पर रखा जा रहा है. साथ ही बता दें कि बुधवार को उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने नियोजित विध्वंस के खिलाफ देहरादून में अपने घर पर एक घंटे का मौन विरोध प्रदर्शन किया.
Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट ने हल्द्वानी के बनभूलपुरा इलाके में रेलवे की जमीन से अतिक्रमण हटाने के हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी है. हल्द्वानी के बनभूलपुरा इलाके में रेलवे की भूमि से अतिक्रमण हटाने के उत्तराखंड उच्च न्यायालय के फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने उत्तराखंड सरकार और भारतीय रेलवे को नोटिस जारी किया. सुप्रीम कोर्ट ने हल्द्वानी के बनभूलपुरा इलाके में रेलवे की जमीन से अतिक्रमण हटाने के उत्तराखंड हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए रोक लगाया और कहा कि यह मामला मानवीय भी है.
Supreme Court issues notice to Uttarakhand government and India Railways on the pleas challenging Uttarakhand High Court’s decision ordering the State authorities to remove encroachments from railway land in Haldwani’s Banbhoolpura area. pic.twitter.com/Zn7PhHxcuO
— ANI (@ANI) January 5, 2023
सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई के लिए सात फरवरी की तारीख तय की है. बता दें कि इस मामले पर इलाके में भारी विरोध देखा जा रहा था. हल्द्वानी विरोध और दिल्ली के शाहीन बाग के विरोध को एक ही तर्ज पर रखा जा रहा है. साथ ही बता दें कि बुधवार को उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने नियोजित विध्वंस के खिलाफ देहरादून में अपने घर पर एक घंटे का मौन विरोध प्रदर्शन किया. हल्द्वानी विरोध और ‘रेलवे भूमि’ की योजनाबद्ध निकासी के बारे में जरूरी पॉइंट और मुद्दे यहां पढ़ें,
1. 20 दिसंबर 2022 को उत्तराखंड हाई कोर्ट ने हल्द्वानी में रेलवे की जमीन से ‘अतिक्रमण’ हटाने का आदेश दिया. यह आदेश मूल रूप से 2013 में दायर एक जनहित याचिका पर आया था.
2. अदालत के आदेश के बाद, विरोध प्रदर्शन के दौरान रेलवे अधिकारियों ने “अवैध” संरचनाओं का सर्वेक्षण किया.
3. 50,000 निवासी प्रभावित होंगे क्योंकि भूमि में संरचनाएं दशकों से बनी हैं. घरों में पानी और बिजली के कनेक्शन भी हैं.
4. प्रदर्शनकारियों के अनुसार, जमीन रेलवे की नहीं है. प्रदर्शनकारियों के इस दावे को विपक्षी नेताओं का भी समर्थन मिला. एआईएमआईएम के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने सवाल किया कि अगर सरकारी स्कूल हैं तो ये सब अवैध अतिक्रमण कैसे हैं.
5. हल्द्वानी के कांग्रेस विधायक सुमित हृदयेश ने कहा कि रेलवे ने एक काल्पनिक सर्वेक्षण किया और सरकार ने अदालत में निवासियों के हितों की रक्षा करने का प्रयास नहीं किया.
6. निवासियों का कहना है कि 2016 में, रेलवे ने कहा कि 29 एकड़ भूमि पर अवैध अतिक्रमण था, लेकिन अब वे 78 एकड़ जमीन पर दावा कर रहे हैं.
7. समाजवादी पार्टी ने बुधवार को हल्द्वानी धरना स्थल पर प्रतिनिधिमंडल भेजा. मुरादाबाद के सांसद एसटी हसन ने प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करते हुए कहा, “जमीन रेलवे की कैसे है? उसने इसे किससे खरीदा था? लोग 100 से अधिक वर्षों से इस पर रह रहे हैं.”
8. निवासियों को साइट खाली करने के लिए नोटिस दिया गया है और निष्कासन अभियान 10 जनवरी से शुरू होने की संभावना है.
9. इंडिया रिजर्व बटालियन और प्रोविंशियल आर्म्ड कांस्टेबुलरी की आठ कंपनियां और रेलवे सुरक्षा बल की 10 कंपनियां जल्द ही हल्द्वानी में तैनात की जाएंगी.
10. भाजपा इस विरोध का विरोध कर रही है और कह रही है कि इसे हिंदू-मुस्लिम रंग दिया गया है. भाजपा प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने कहा, “दुर्भाग्यपूर्ण है कि एक पूरा पारिस्थितिकी तंत्र हल्द्वानी में एक ‘मुस्लिम विरोधी’ एजेंडे में उच्च न्यायालय द्वारा आदेशित निष्कासन अभियान को चित्रित करने के लिए काम कर रहा है. इससे भी बुरी बात यह है कि इसे कांग्रेस और एसपी द्वारा हवा दी जा रही है.” उन्होंने अपने ट्वीट में राहुल गांधी और अखिलेश यादव को टैग करते हुए लिखा है कि क्या यह ‘भारत जोड़ो’ है.
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By Aditya kumar
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