क्रिकेट खेलते हुए छात्र की मौत, ईद मनाने आया था घर

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playing cricket

क्रिकेट खेलते युवक, फाइल फोटो

UP News : उत्तर प्रदेश के बरेली जिले शाकिब जिसकी उम्र महज 22 साल थी, वह दिल्ली से अपने घर ईद मनाने आया था. शाकिब के घर में खुशी थी, लेकिन अचानक क्रिकेट खेलते हुए वह जमीन पर गिरा और फिर उठ ना सका.

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UP News : ईद से ठीक एक दिन पहले उत्तर प्रदेश के बरेली जिले में बीएससी के एक छात्र की क्रिकेट खेलते हुए अचानक मौत हो गई. पुलिस ने शनिवार को यह जानकारी दी. पुलिस ने बताया कि परिजन मौत की वजह हार्ट अटैक को मान रहे हैं. ईद से ठीक पहले हुई इस घटना से परिवार में मातम पसरा हुआ है.

क्रिकेट खेलते हुए जमीन पर गिरा और हो गई मौत

पुलिस के मुताबिक, हरहरपुर मटकली गांव निवासी 22 वर्षीय शाकिब दिल्ली में रहकर बीएससी की पढ़ाई कर रहा था और वह ईद मनाने करीब सात दिन पहले अपने घर आया था. पुलिस ने बताया कि शुक्रवार दोपहर करीब 12 बजे शाकिब अपने दोस्तों के साथ गांव के ईदगाह के पास मैदान में क्रिकेट खेल रहा था. अचानक वह जमीन पर गिर पड़ा और उसकी सांस फूलने लगी. परिजन और दोस्त उसे तुरंत नजदीकी अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया.

हार्ट अटैक से मौत की घटनाओं में हुई है वृद्धि

कोविड बीमारी के बाद से हार्ट अटैक की घटनाओं में काफी वृद्धि हुई है. चिकित्सक भी इस बात को मान रहे हैं कि कोरोना वायरस ने लोगों के सिस्टम पर काफी असर किया है. देश भर से कई ऐसी खबर सामने आई है, जिसमें अच्छा खासा इंसान हंसते -खेलते हुए अचानक हार्ट अटैक से मर जाता है.

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रजनीश आनंद

लेखक के बारे में

By रजनीश आनंद

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.

राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि रही है. वैसे मुद्दे जो समाज के हाशिये पर मौजूद समुदायों और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की बहस में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं, ऐसे विषयों पर भी लेखन में रुचि रखती हैं.

रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.

आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.

रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.

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