Video : भारत का पहला प्राइवेट ऑर्बिटल रॉकेट Vikram-1 लॉन्च

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विक्रम-1 लॉन्च (Photo: PTI)

स्काईरूट एयरोस्पेस का विक्रम-1 रॉकेट और मिशन आगमन शनिवार को 12 बजकर 05 मिनट पर श्रीहरिकोटा से लॉन्च किया गया. यह मिशन भारत के प्राइवेट स्पेस सेक्टर के लिए खास माना जा रहा है.

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विक्रम-1 भारत का पहला प्राइवेट कंपनी द्वारा विकसित ऐसा रॉकेट है, जिसे सैटेलाइट को पृथ्वी की कक्षा में पहुंचाने के लिए बनाया गया है. यह दिखाता है कि अब सरकारी एजेंसियों के साथ-साथ प्राइवेट कंपनियां भी स्पेस मिशनों में बड़ी भूमिका निभा रही हैं. मिशन आगमन स्काईरूट एयरोस्पेस का पहला ऑर्बिटल टेस्ट मिशन है. इसके जरिए पहली बार कोई भारतीय प्राइवेट कंपनी अपने रॉकेट से पृथ्वी की कक्षा तक पहुंचने की कोशिश कर रही है.

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खास बात यह है कि इसके साथ अंतरिक्ष में एक छोटी कलाकृति वाला पेलोड भी भेजा गया है. वहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का अपने हाथों से लिखा ‘वंदे मातरम्’ मैसेज वाला पोस्टकार्ड भी इस मिशन का हिस्सा है. इसके अलावा कई इंजीनियरों, वैज्ञानिकों और भारतीय अंतरिक्ष यात्रियों के हाथ से लिखे पोस्टकार्ड भी अंतरिक्ष की यात्रा पर भेजा गया है, जिससे यह मिशन और भी खास बन गया है.

करीब सात मंजिला ऊंचाई वाला है विक्रम-1 रॉकेट

17 जुलाई को कंपनी ने बताया था कि चार स्टेप वाला यह रॉकेट इसरो के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से प्रक्षेपित किया जाएगा. विक्रम-1 रॉकेट करीब सात मंजिला ऊंचाई वाला है. उड़ान भरने के बाद विक्रम-1 करीब 450 किलोमीटर की ऊंचाई पर पृथ्वी की निचली कक्षा में पहुंचेगा. वहां यह ग्रहा स्पेस, कॉसमोसर्व, डीक्यूब्ड और स्काईरूट के 'स्कोप' समेत कई छोटे सैटेलाइट और तकनीकी परीक्षण के लिए तैयार उपकरणों को सफलतापूर्वक अंतरिक्ष में स्थापित करेगा.

किया जाएगा तकनीकी आंकड़ों का बारीकी से अध्ययन

स्काईरूट एयरोस्पेस के मुताबिक, इस टेस्ट फ्लाइट से मिलने वाले सभी तकनीकी आंकड़ों का बारीकी से अध्ययन किया जाएगा. इससे रॉकेट की गाइडेंस और नेविगेशन सिस्टम की क्षमता जांची जाएगी. इन नतीजों के आधार पर जरूरी सुधार किए जाएंगे, ताकि भविष्य में कमर्शियल सैटेलाइट मिशनों को और ज्यादा सुरक्षित, भरोसेमंद और सफल बनाया जा सके.

ये भी पढ़ें: विक्रम-1 ने खोला भारत का नया अंतरिक्ष युग

कंपनी के मुताबिक, विक्रम-1 रॉकेट को इस तरह डिजाइन किया गया है कि वह 350 किलोग्राम तक के सैटेलाइट और दूसरे पेलोड को अंतरिक्ष की कक्षा में ले जा सके.


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