ईरान ने 4000 KM दूर अमेरिकी मिलिट्री बेस पर दागी मिसाइल, ट्रंप की उड़ाई नींद
मिलिट्री बेस डिएगो गार्सिया पर ईरान ने दागी मिसाइल
Iran War : अमेरिका और यूके के ज्वाइंट मिलिट्री बेस डिएगो गार्सिया पर मिसाइल दागकर ईरान ने अपनी शक्ति का प्रदर्शन कर दिया है. ईरान ने 4000 किलोमीटर की दूरी तक अपनी मिसाइलें दाग दी हैं, जबकि आधिकारिक रूप से उसके पास इस क्षमता की मिसाइलें नहीं हैं. ईरान का यह कदम यह साबित करता है कि भले ही उसका मिसाइल अटैक सफल नहीं रहा, लेकिन वह अमेरिका के सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने में सक्षम है.
Iran War : कतर के LNG भंडार रास लाफान पर हमला करने के बाद ईरान ने हिंद महासागर में स्थित अमेरिकी मिलिट्री बेस डिएगो गार्सिया पर पर मिसाइलें दागी हैं. हालांकि ईरान का यह हमला कामयाब नहीं हुआ, क्योंकि एक मिसाइल उड़ान के दौरान फेल हो गई और दूसरे को अमेरिकी वाॅरशिप ने निष्क्रिय कर दिया. बावजूद इसके यह हमला बहुत मायने रखता है क्योंकि ईरान ने 4000 किलोमीटर की दूरी तक के रेंज में मिसाइल दागा है. ब्रिटेन ने इस हमले की निंदा की है और इसे गलत बताया है.
क्या है डिएगो गार्सिया?
डिएगो गार्सिया हिंद महासागर में स्थित एक द्वीप है, जहां अमेरिका और यूके का ज्वाइंट मिलिट्री बेस है. इस बेस को रणनीतिक रूप से बहुत अहम माना जाता है. यह बेस अमेरिका के लिए लॉजिस्टिक हब और पावर प्रोजेक्शन प्लेटफॉर्म के रूप में काम करता है. यह द्वीप भौगोलिक रूप से बहुत महत्वपूर्ण है. डिएगो गार्सिया मध्य पूर्व, अफ्रीका और एशिया के बीच में स्थित है. जिसकी वजह से अमेरिकी सेना आसानी से खाड़ी क्षेत्र, दक्षिण एशिया और अफ्रीका में ऑपरेशन चला सकती है. इस द्वीप को भारी बमवर्षक विमान की तैनाती के लिए जाना जाता है. साथ ही यह द्वीप अमेरिकी नौसेना के युद्धपोतों और पनडुब्बियों के लिए भी खास बेस है.
ईरान ने बढ़ा ली है अपनी मिसाइल क्षमता
ईरान ने आधिकारिक रूप से अपनी मिसाइल की जो क्षमता बताई है वह 2000 से 2500 किलोमीटर रेंज की है. ईरान पिछले दो दशकों में अपनी बैलिस्टिक मिसाइल तकनीक पर लगातार काम कर रहा है. इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के तहत मिसाइल प्रोग्राम को विकसित किया गया है. डिएगो गार्सिया पर हुआ हमला यह साबित करता है कि ईरान ने अपनी मिसाइल क्षमता को काफी बढ़ा लिया है. शहाब–3 और सेजिल मिसाइल के जरिए ईरान पूरे खाड़ी क्षेत्र को कवर करता है, लेकिन डिएगो गार्सिया पर मिसाइल दागकर ईरान ने अमेरिका की नींद उड़ा दी है इसमें कोई शक नहीं है. ईरान का युद्ध अब खाड़ी क्षेत्र से निकलकर वैश्विक सैन्य संतुलन को प्रभावित कर रहा है.
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By Rajneesh Anand
रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.
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