Trump Tariff: ट्रंप के 50 फीसदी टैरिफ का भारत पर कितना पड़ेगा असर! अमेरिका चीन पर क्यों नहीं लगा रहा शुल्क

Published by : Pritish Sahay Updated At : 06 Aug 2025 10:54 PM

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Modi and trump

Trump Tariff:  अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर अतिरिक्त 25 फीसदी टैरिफ लगा दिया है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को अतिरिक्त टैरिफ लगाने के आदेश पर साइन कर दिया है. ट्रंप ने भारत के रूस से तेल खरीदने के कारण यह शुल्क लगाया है. ट्रंप ने 30 जुलाई को भारत पर 25 प्रतिशत टैरिफ लगाने की घोषणा की थी. टैरिफ में इजाफे के बाद अब अमेरिका में भारतीय सामान काफी महंगे हो जाएंगे.

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Trump Tariff: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर 50 फीसदी टैरिफ लगा दिया है. ट्रंप का यह कदम भारत के लिए किसी झटके से कम नहीं है. भारतीय निर्यात संगठनों के महासंघ (फियो) ने टैरिफ बढ़ोत्तरी को लेकर कहा कि भारतीय वस्तुओं पर अतिरिक्त 25 प्रतिशत शुल्क लगाने का फैसला बेहद चौंकाने वाला है. उद्योग निकाय ने कहा कि इससे अमेरिका को भारत से होने वाले 55 प्रतिशत निर्यात पर सीधा असर पड़ेगा. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत के रूस से तेल खरीदने के कारण आयातित भारतीय उत्पादों पर अतिरिक्त 25 प्रतिशत शुल्क लगा दिया है.

किन वस्तुओं पर पड़ेगा सबसे ज्यादा असर

अमेरिका के इस कदम से कपड़ा, समुद्री उत्पादों और चमड़ा निर्यात जैसे क्षेत्रों पर सबसे बुरा असर पड़ने की संभावना है. ट्रंप के इस आदेश के बाद कुछ वस्तुओं को छोड़कर भारतीय वस्तुओं पर कुल टैरिफ 50 फीसदी हो जाएगा. फियो के अध्यक्ष एससी रल्हन ने कहा ”यह कदम भारतीय निर्यात के लिए एक गंभीर झटका है, क्योंकि अमेरिकी बाजार में हमारे लगभग 55 फीसी सामान सीधे तौर पर प्रभावित हुए हैं. कुल 50 प्रतिशत जवाबी शुल्क प्रभावी रूप से कीमत को बहुत बढ़ा देगा.”

महंगे हो जाएंगे भारतीय सामान

रल्हन ने कहा कि कई निर्यात ऑर्डर पहले ही रोक दिए गए हैं, क्योंकि खरीदार अधिक लागत को देखते हुए खरीदारी के फैसले पर फिर से विचार कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि मार्जिन पहले से ही कम है और यह अतिरिक्त झटका निर्यातकों को अपने पुराने ग्राहकों को खोने के लिए मजबूर कर सकता है. अब अमेरिका में भारतीय सामान काफी महंगे हो जाएंगे. आर्थिक थिंक टैंक ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) ने कहा कि अमेरिका के शुल्क से भारतीय सामान वहां काफी महंगे हो सकते हैं, जिससे अमेरिका को होने वाले निर्यात में 40 से 50 प्रतिशत की कमी आने की आशंका है.

चीन को नहीं देना पड़ रहा जुर्माना

रल्हन ने कहा कि साल 2024 में चीन ने रूस से 62.6 अरब डॉलर का तेल खरीदा था, जो भारत के 52.7 अरब अमेरिकी डॉलर से काफी ज्यादा है, फिर भी उसे इस तरह का कोई जुर्माना नहीं देना पड़ेगा. उन्होंने कहा कि अमेरिका, चीन पर सीधे निशाना साधने से बचता है. इसका कारण है कि कई वस्तुओं के लिए अमेरिका चीन निर्भर है. चीन गैलियम, जर्मेनियम, रेयर अर्थ और ग्रेफाइट जैसी अहम सामग्रियों पर अपना दबदबा रखता है. ये वस्तुएं अमेरिकी रक्षा और तकनीक के लिए बेहद जरूरी हैं. सबसे बड़ी बात की अमेरिका ने यूरोपीय संघ जैसे अपने सहयोगियों के रूस के साथ व्यापार को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया है. अमेरिका ने खुद रूस से 3.3 अरब डॉलर की सामरिक सामग्री खरीदी है. (इनपुट- भाषा)

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By Pritish Sahay

प्रीतीश सहाय, इन्हें इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया इंडस्ट्री में 12 वर्षों से अधिक का अनुभव है. ये वर्तमान में प्रभात खबर डॉट कॉम के साथ डिजिटल कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं. मीडिया जगत में अपने अनुभव के दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण विषयों पर काम किया है और डिजिटल पत्रकारिता की बदलती दुनिया के साथ खुद को लगातार अपडेट रखा है. इनकी शिक्षा-दीक्षा झारखंड की राजधानी रांची में हुई है. संत जेवियर कॉलेज से ग्रेजुएट होने के बाद रांची यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता की डिग्री हासिल की. इसके बाद लगातार मीडिया संस्थान से जुड़े रहे हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत जी न्यूज से की थी. इसके बाद आजाद न्यूज, ईटीवी बिहार-झारखंड और न्यूज 11 में काम किया. साल 2018 से प्रभात खबर के साथ जुड़कर काम कर रहे हैं. प्रीतीश सहाय की रुचि मुख्य रूप से राजनीतिक खबरों, नेशनल और इंटरनेशनल इश्यू, स्पेस, साइंस और मौसम जैसे विषयों में रही है. समसामयिक घटनाओं को समझकर उसे सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाने की इनकी हमेशा कोशिश रहती है. वे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय राजनीति से जुड़े मुद्दों पर लगातार लेखन करते रहे हैं. इसके साथ ही विज्ञान और अंतरिक्ष से जुड़े विषयों पर भी लिखते हैं. डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में काम करते हुए उन्होंने कंटेंट प्लानिंग, न्यूज प्रोडक्शन, ट्रेंडिंग टॉपिक्स जैसे कई क्षेत्रों में काम किया है. तेजी से बदलते डिजिटल दौर में खबरों को सटीक, विश्वसनीय और आकर्षक तरीके से प्रस्तुत करना पत्रकारों के लिए चुनौती भी है और पेशा भी, इनकी कोशिश इन दोनों में तालमेल बनाते हुए बेहतर और सही आलेख प्रस्तुत करना है. वे सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म की जरूरतों को समझते हुए कंटेंट तैयार करते हैं, जिससे पाठकों तक खबरें प्रभावी ढंग से पहुंच सकें. इंटरनेशनल विषयों में रुचि होने कारण देशों के आपसी संबंध, वार अफेयर जैसे मुद्दों पर लिखना पसंद है. इनकी लेखन शैली तथ्यों पर आधारित होने के साथ-साथ पाठकों को विषय की गहराई तक ले जाने का प्रयास करती है. वे हमेशा ऐसी खबरों और विषयों को प्राथमिकता देते हैं जो राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय लिहाज से महत्वपूर्ण हों. रूस यूक्रेन युद्ध, मिडिल ईस्ट संकट जैसे विषयों से लेकर देश की राजनीतिक हालात और चुनाव के दौरान अलग-अलग तरह से खबरों को पेश करते आए हैं.

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