महाराष्ट्र में जालसाजों ने सीरम इंस्टीट्यूट से एक करोड़ रुपये ठगा, अदार पूनावाला के नाम से भेजा मैसेज

पुलिस में दर्ज कराई गई प्राथमिकी के अनुसार, एसआईआई के निदेशकों में से एक सतीश देशपांडे को एक व्यक्ति से व्हाट्सएप मैसेज प्राप्त हुआ, जिसने खुद को अदार पूनावाला के रूप में बताया.
मुंबई : महाराष्ट्र के पुणे में ठगी का एक बड़ा मामला सामने आया है और वह यह कि जालसाजों ने भारत में कोरोनारोधी टीका तैयार करने वाली कंपनी सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (एसआईआई) से ही एक करोड़ रुपये की ठगी कर ली. सबसे बड़ी बात यह है कि ठगों ने एसआईआई के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) अदार पूनावाला के नाम से एक मैसेज भेजकर एक करोड़ रुपये ट्रांसफर करवा लिया.
पुलिस की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, जालसाजों ने एसआईआई के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) अदार पूनावाला के नाम से मैसेज भेजकर एक करोड़ रुपये ट्रांसफर करने की मांग कर इस संस्थान से एक करोड़ रुपये से ज्यादा की ठगी की है. बुंडगार्डन पुलिस थाने के एक अधिकारी ने बताया कि यह धोखाधड़ी बुधवार और गुरुवार की दोपहर के बीच हुई. वरिष्ठ निरीक्षक प्रताप मानकर ने बताया कि सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम के तहत धोखाधड़ी और अपराधों के लिए अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है.
पुलिस में दर्ज कराई गई प्राथमिकी के अनुसार, एसआईआई के निदेशकों में से एक सतीश देशपांडे को एक व्यक्ति से व्हाट्सएप मैसेज प्राप्त हुआ, जिसने खुद को अदार पूनावाला के रूप में बताया. फर्म के वित्त प्रबंधक द्वारा दायर की गई शिकायत के अनुसार मैसेज भेजने वाले ने देशपांडे से कुछ बैंक खातों में तुरंत पैसे ट्रांसफर करने को कहा. पुलिस इंस्पेक्टर मानकर ने कहा कि यह मानते हुए यह मैसेज सीईओ (मुख्य कार्याधिकारी) का था, कंपनी के अधिकारियों ने 1,01,01,554 रुपये ऑनलाइन ट्रांसफर कर दिए.
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पुलिस इंस्पेक्टर ने बताया कि पैसा ट्रांसफर करने बाद पता चला कि अदार पूनावाला ने कभी भी ऐसा कोई व्हाट्सएप मैसेज नहीं भेजा था. उन्होंने बताया कि इस मामले में जांच चल रही है. एसआईआई का पुणे के निकट एक प्लांट है. एसआईआई अन्य टीकों के अलावा कोरोना वायरस रोधी टीके कोविशील्ड का निर्माण कर रही है.
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By KumarVishwat Sen
कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.
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