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Textile: देश को आत्मनिर्भर बनाने में कपड़ा उद्योग की भूमिका है महत्वपूर्ण

उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने परिधान निर्यात संवर्धन परिषद (एईपीसी) के वार्षिक पुरस्कार समारोह को संबोधित किया और देश के परिधान निर्यात क्षेत्र में शानदार योगदान देने वाले पुरस्कार विजेताओं को पुरस्कार दिया. उपराष्ट्रपति ने कहा कि परिधान एवं वस्त्र क्षेत्र देश की अर्थव्यवस्था का एक महत्वपूर्ण स्तंभ बना हुआ है और इस क्षेत्र में 4.5 करोड़ से अधिक लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार मिला हुआ है. साथ ही एक करोड़ से अधिक लोगों की आजीविका को अप्रत्यक्ष तौर पर जुड़ी हुई है.

Textile: देश में कपड़ा उद्योग रोजगार और निर्यात के मामले में सबसे आगे है. कृषि के बाद सबसे अधिक रोजगार कपड़ा क्षेत्र में मिल रहा है. इस क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए सरकार लगातार कदम उठा रही है. शनिवार को उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने परिधान निर्यात संवर्धन परिषद (एईपीसी) के वार्षिक पुरस्कार समारोह को संबोधित किया और देश के परिधान निर्यात क्षेत्र में शानदार योगदान देने वाले पुरस्कार विजेताओं को पुरस्कार दिया. 


कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि परिधान एवं वस्त्र क्षेत्र देश की अर्थव्यवस्था का एक महत्वपूर्ण स्तंभ बना हुआ है और इस क्षेत्र में 4.5 करोड़ से अधिक लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार मिला हुआ है. साथ ही एक करोड़ से अधिक लोगों की आजीविका को अप्रत्यक्ष तौर पर जुड़ी हुई है. यह क्षेत्र सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में लगभग 2 फीसदी और विनिर्माण क्षेत्र के सकल मूल्य वर्धित (जीवीए) में लगभग 11 फीसदी का योगदान देता है. उपराष्ट्रपति ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत सरकार ने पीएम मित्र पार्क और समर्थ कौशल विकास कार्यक्रम जैसी नीतियों और योजनाओं के जरिये वस्त्र और परिधान उद्योग को मजबूत और बहुआयामी समर्थन देने का काम किया है. प्रधानमंत्री ने इस क्षेत्र को वैश्विक शक्ति के रूप में विकसित करने के उद्देश्य से एक व्यापक विजन 2030 देश के सामने रखा है. 


नये बाजार में पहुंच बना रहा है देश का कपड़ा क्षेत्र


उपराष्ट्रपति ने कहा कि पूर्व की सरकार भी कपड़ा क्षेत्र को आगे बढ़ाने के लिए कदम उठाया है. लेकिन बिना इनोवेशन और उद्योग जगत की भागीदारी के लक्ष्य को हासिल करना मुश्किल है. वैश्विक चुनौतियों से इस दौर में भारत के कपड़ा निर्यात को बड़ी कामयाबी मिली है. सरकार इस क्षेत्र द्वारा सामना की जाने वाली चुनौतियों को हल करने के लिए कई कदम उठा रही है. जिसमें कई देशों के साथ  मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) वार्ता की जा रही है. कपड़ा उद्योग से एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका जैसे नए बाजारों का सक्रिय रूप से पता लगाने का काम किया जा रहा है. साथ ही उद्योग से मूल्यवर्धन पर ध्यान केंद्रित करने, निर्यात उत्पादों में विविधता लाने, आयात पर निर्भरता कम करने, इनोवेशन और अनुसंधान एवं विकास को प्रोत्साहित करने और टिकाऊ निर्यात को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया है.


उपराष्ट्रपति ने कहा कि वस्त्र उद्योग श्रम प्रधान है और कृषि के बाद देश में रोजगार का दूसरा सबसे बड़ा स्रोत है. उद्योग जगत में श्रमिकों के कल्याण को सुनिश्चित करने की आवश्यकता है. आने वाले वर्षों में इस क्षेत्र के निर्यात में दोगुनी वृद्धि होने की उम्मीद है, जिससे रोजगार के अतिरिक्त अवसर सृजित होंगे. परिधान क्षेत्र विकसित और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने में अग्रणी भूमिका निभाएगा. सरकार और उद्योग के बीच एक सेतु के रूप में एईपीसी की भूमिका की भी प्रशंसा करते हुए कहा कि थ्रेड ऑफ टाइम: स्टोरी ऑफ इंडियाज टेक्सटाइल्स नाम से कॉफी टेबल बुक को लांच किया. इस दौरान दिल्ली सरकार के उद्योग मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा, एईपीसी के अध्यक्ष सुधीर सेखरी, एईपीसी के उपाध्यक्ष ए शक्तिवेल और वस्त्र एवं परिधान उद्योग के अन्य विशिष्ट अतिथि मौजूद रहे.

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