गुमशुदगी पर सुप्रीम कोर्ट सख्त: उम्र-लिंग का नहीं चलेगा बहाना, तुरंत दर्ज हो FIR

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गुमशुदगी पर सुप्रीम कोर्ट सख्त

कोर्ट ने साफ किया है कि किसी भी व्यक्ति की गुमशुदगी पर तुरंत केस दर्ज करना अनिवार्य है, फिर चाहे वह बच्चा हो या वयस्क, पुरुष हो या महिला. आदेश का पालन न करने वाले अधिकारियों के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई की जाएगी.

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Missing Person FIR: कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि गुमशुदगी के मामलों में राज्यों और केंद्र-शासित प्रदेशों को तुरंत प्राथमिकी दर्ज करने का उसका आदेश हर व्यक्ति के सिलसिले में लागू होता है, चाहे उसकी उम्र या लिंग कुछ भी हो. न्यायमूर्ति अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और न्यायमूर्ति आर महादेवन की पीठ ने कहा कि उसे यह जानकर हैरानी हुई है कि कुछ राज्य इस गलतफहमी में कि कुछ राज्य का 'व्यक्ति' मतलब सिर्फ बच्चों से है और इसमें वयस्क शामिल नहीं हैं.

पीठ ने अपने आदेश में कहा कि हमें लगता है कि ऐसे राज्यों ने जानबूझकर और गलत नीयत से यह मुद्दा उठाया है. हमारे पिछले आदेश की भाषा स्पष्ट है. "व्यक्ति" शब्द का अर्थ हर व्यक्ति से है, चाहे उसकी उम्र या लिंग कुछ भी हो. अगर किसी राज्य या केंद्र-शासित प्रदेश ने आदेश का अक्षरशः और उसकी मूल भावना के अनुरूप पालन नहीं किया है, तो संबंधित मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक को अवमानना का नोटिस जारी किया जायेगा. मामले की अगली सुनवाई पांच अक्टूबर को होगी.

सभी मुख्य सचिव और डीजीपी तलब

शीर्ष अदालत ने मुख्य सचिवों तथा पुलिस महानिदेशकों को उसके समक्ष व्यक्तिगत रूप से पेश होने और कारण बताओ हलफनामे दाखिल कर यह बताने का निर्देश दिया कि आदेशों की जानबूझकर अवहेलना करने के लिए उनके खिलाफ कार्रवाई क्यों न की जाए.

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47,000 बच्चों की गुमशुदगी का कोर्ट ने लिया था संज्ञान

सुप्रीम कोर्ट ने भारत में 47,000 बच्चों के लापता होने का संज्ञान लेते हुए 22 मई को देशभर की पुलिस को गुमशुदगी के मामलों में तुरंत प्राथमिकी दर्ज करने कि का निर्देश दिया था. उसने कहा था मानव तस्करी विरोधी इकाइ‌यों को चार हफ्ते में सक्षम बना दिया जाये.

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हलफनामा दाखिल नहीं, तो अवमानना

पीठ ने कहा कि जिन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने पहले के उसके निर्देशों के अनुसार हलफनामे दाखिल नहीं किए हैं, वे प्रथम दृष्टया अदालत की अवमानना के दोषी हैं. इसके मद्देनजर संबंधित राज्यों और केंद्र-शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों तथा पुलिस महानिदेशकों को का अवमानना नोटिस जारी किया जायेगा. उक्त अधिकारियों को न्यायालय के सामने व्यक्तिगत रूप से पेश होना होगा और 'कारण बताओं' हलफनामा दाखिल कर बताना होगा कि अदालत के विशेष निर्देशों का पालन न करने के लिए उनके खिलाफ अवमानना की कार्यवाही क्यों न शुरू की जाए.


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दीपक कुमार गुप्ता

लेखक के बारे में

By दीपक कुमार गुप्ता

दीपक कुमार गुप्ता 'प्रभात खबर डिजिटल' में कंटेंट राइटर हैं. इससे पहले वे 'ईटीवी भारत' में करीब ढाई साल तक कार्यरत रहे. इन्होंने भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC) से पत्रकारिता की पढ़ाई की है. 2021 से वे पत्रकारिता से जुड़े हैं और इस दौरान 'न्यूज प्लस', 'अंतर्कथा विजन न्यूज' और 'पब्लिक ऐप' के साथ भी काम कर चुके हैं.

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