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खुशहाल परिवार के लिए Spousal Transfer Policy जरूरी, स्वास्थ्य मंत्री को AIGNF ने लिखी चिट्ठी

Updated at : 09 Aug 2025 6:43 PM (IST)
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Spousal Transfer Policy News

स्पाउजल ट्रांसफर नीति की मांग कर रहे हैं एम्स के नर्सिंग स्टाफ्स.

Spousal Transfer Policy: ऑल इंडिया गवर्नमेंट नर्सेज फेडरेशन (AIGNF) ने एम्स के नर्सिंग स्टाफ्स की ओर से लंबे समय से की जा रही स्पाउजल ट्रांसफर पॉलिसी को लागू करने की मांग स्वास्थ्य मंत्री से की है. इस संबंध में फेडरेशन ने स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा को एक चिट्ठी लिखी है, जिसमें इस नीति को लागू किये जाने की वजह से होने वाले फायदे और नीति न होने की वजह से होने वाले नुकसान के बारे में बताया है.

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Spousal Transfer Policy: लगातार स्पाउजल ट्रांसफर की मांग कर रहे देश भर के एम्स के नर्सिंग स्टाफ्स को ऑल इंडिया गवर्नमेंट नर्सेज फेडरेशन (AIGNF) का साथ मिला है. फेडरेशन ने स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा को एक पत्र लिखा है. इसमें कहा है कि स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के अधीन सभी अस्पतालों में स्पाउजल ट्रांसफर पॉलिसी लागू करने के लिए एक बैठक का आयोजन किया जाये, जिसमें इस विषय पर चर्चा हो.

AIGNF ने स्वास्थ्य मंत्रालय को लिखी चिट्ठी

AIGNF की अध्यक्ष रिंकी डांग और महासचिव अनिता पंवार ने स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा को लिखा है कि स्वास्थ्य मंत्रालय के अधीन काम करने वाले लोगों के संगठनों में यह संगठन सबसे बड़ा है. संगठन से जुड़ी इकाइयों ने बताया है कि ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (एम्स), केंद्र सरकार के अस्पतालों, ऑटोनमस संस्थानों और राष्ट्रीय महत्व के संस्थानों में स्पाउजल ट्रांसफर पॉलिसी लागू की जाये.

फेडरेशन ने कहा- स्पाउजल ट्रांसफर पॉलिसी जरूरी

नर्सेज फेडरेशन ने कहा है कि स्पाउजल ट्रांसफर पॉलिसी लागू करना जरूरी है. इसके बगैर नर्सिंग स्टाफ के लिए परिवार को बैलेंस करना मुश्किल हो जाता है. इस जरूरी नीति की मांग लंबे समय से हो रही है, ताकि नर्सिंग स्टाफ अपने परिवार के साथ रह सकें.

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‘स्पाउजल ट्रांसफर पॉलिसी के अभाव में हो रहा ये नुकसान’

पत्र में कहा गया है कि अगर यह नीति लागू हो जाती है, तो इसके कई फायदे होंगे. अभी नर्सिंग स्टाफ्स को कई तरह के नुकसान झेलने पड़ रहे हैं, खासकर महिला नर्सों को. वे अपने परिवार से दूर रहतीं हैं. इसका विपरीत असर उनके पारिवारिक जीवन और उनके बच्चों की शिक्षा पर पड़ता है. वे मानसिक रूप से भी परेशान रहतीं हैं.

‘स्पाउजल ट्रांसफर नीति से खुशहाल होगा नर्सों का परिवार’

अगर स्पाउजल ट्रांसफर नीति बन जाती है, तो नर्सिंग स्टाफ का पारिवारिक जीवन खुशहाल होगा. वे बेहतर काम कर पायेंगे. फेडरेशन ने कहा है कि कार्मिक विभाग के 30 सितंबर 2009 के गाइडलाइन का पालन किया जाये, ताकि ट्रांसफर-पोस्टिंग में इस बात का ध्यान रखा जाये कि किसका पति कहां है और किसकी पत्नी कहां है.

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‘परेशान नर्स बीमार की अच्छी देखभाल नहीं कर सकती’

फेडरेशन ने स्वास्थ्य मंत्री को लिखा है कि दिल्ली हाईकोर्ट ने 26 अप्रैल 2025 को इस संबंध में दाखिल याचिका स्वीकार कर ली है. केंद्र सरकार और एम्स से जवाब मांगा है. फेडरेशन ने कहा है कि नर्सिंग स्टाफ की मानसिक स्थिति का सीधा असर मरीजों की देखभाल पर पड़ता है. मानसिक रूप से परेशान कोई नर्स बीमार की अच्छी देखभाल नहीं कर पायेगी.

फेडरेशन ने सरकार के सामने रखी 4 मांगें

फेडरेशन ने सरकार के समक्ष 4 मांगें भी रखी हैं. इसमें स्पाउजल ट्रांसफर पॉलिसी, सेंट्रलाइज्ड ट्रांसफर बोर्ड का गठन, जीएफआर-2017 रूल 21 को लागू करने के अलावा एक बैठक का आयोजन शामिल है. फेडरेशन ने अपील की है कि जल्द से जल्द एक स्वास्थ्य मंत्रालय एक बैठक की तारीख तय करें, ताकि इन सभी 4 मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हो सके.

इन्हें भी भेजी चिट्ठी की कॉपी

इस चिट्ठी की कॉपी भारत सरकार के स्वास्थ्य मंत्रालय के सचिव, संयुक्त सचिव (पीएमएसएसवाई), डायरेक्टर (नर्सिंग) और नर्सिंग एडवाइजर को भी भेजी गयी है.

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Mithilesh Jha

लेखक के बारे में

By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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