बर्बाद हो रहा परिवार, कुछ कीजिए सरकार, जेपी नड्डा से नर्सिंग यूनियनों की गुहार

एम्स रिषिकेश में मेमोरेंडम देने आये नर्सिंग और मेडिकल स्टाफ के साथ केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा.
Nursing Staffs Memorandum to JP Nadda: केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा से नर्सिंग स्टाफ्स ने गुहार लगायी है कि उनकी पोस्टिंग ऐसी जगह की जाये, जहां उनके पति या पत्नी नौकरी कर रहे हैं. कार्मिक विभाग इसकी अनुमति दे चुका है, स्वास्थ्य विभाग को सिर्फ इसे लागू करना है. नर्सिंग स्टाफ यूनियनों स्वास्थ्य मंत्री को बताया है कि ऐसा नहीं होने की वजह से स्टाफ को कितनी परेशानियों का सामना करना पड़ता है.
Nursing Staffs Memorandum to JP Nadda| केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जगत प्रकाश नड्डा से नर्सिंग यूनियनों ने नर्सों के परिवार को बचाने की गुहार लगायी है. नर्सिंग स्टाफ्स की अगुवाई कर रहे यूनियनों ने स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा को अलग-अलग मांगपत्र सौंपा है. यूनियनों का कहना है कि नर्सिंग स्टाफ अलग-अलग राज्यों में काम करते हैं. इसकी वजह से उन्हें अपने पति और परिवार से दूर रहना पड़ता है. लिहाजा उनका परिवार बिखर रहा है. बर्बाद हो रहा है. इसलिए स्वास्थ्य मंत्री कार्मिक विभाग के निर्देश के आलोक में नर्सिंग स्टाफ्स की पोस्टिंग उसी शहर में करें, जहां उनके पति या पत्नी काम करते हैं, ताकि परिवार नियोजन और परिवार संभालने दोनों में आसानी हो.
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा को सौंपा ज्ञापन
ऑल इंडिया एम्स एंप्लॉईज यूनियन ने बुधवार 16 अप्रैल को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री को दिल्ली में इस संबंध में एक ज्ञापन सौंपा, तो दूसरा ज्ञापन उत्तराखंड के नर्सिंग प्रोफेशनल डेवलपमेंट एसोसिएशन एम्स रिषिकेष में भी सौंपा गया. एम्स में जेपी नड्डा को सौंपे गये 3 पन्नों के ज्ञापन में एक-एक बिंदु का उल्लेख करते हुए उनसे आग्रह किया गया है कि नर्सिंग स्टाफ की पोस्टिंग उसी राज्य में करें, जहां उनके पति या पत्नी कार्यरत हैं. ज्ञापन में कहा गया है कार्मिक विभाग की ओर से पहले से ही ऐसा आदेश जारी किया जा चुका है. स्वास्थ्य विभाग को सिर्फ जीवनसाथी स्तर (स्पाउस ग्राउंड) पर ट्रांसफर नीति को लागू करना है.
परिवार टूटने तक की आ जाती है नौबत
ज्ञापन में कहा गया है कि सैकड़ों महिला स्वास्थ्यकर्मी अपने गृह राज्य और परिवार से दूर रहकर नौकरी कर रहीं हैं. इन्हें अक्सर व्यक्तिगत और घर की जिम्मेदारियों का निर्वहन करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है. लंबे सय तक घर से दूर रहने की वजह से जीवनसाथी को भी वक्त नहीं दे पातीं. माता-पिता और अपने बच्चों के प्रति अपने कर्तव्य नहीं निभा पातीं. कई बार ऐसा होता है कि नौकरी की वजह से परिवार तक टूटने की समस्या आ जाती है.
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‘छुट्टियों पर परिवार के पास जाना या परिवार का उनके पास आना होता है जोखिम भरा’
नर्सिंग प्रोफेशनल डेवलपमेंट एसोसिएशन एम्स रिषिकेश के ज्ञापन में आगे कहा गया है कि कई बार एकल महिला स्वास्थ्यकर्मी को अपने घर-परिवार से 2000-2000 किलोमीटर दूर जाकर काम करना पड़ता है. अगर छुट्टियों में वह अपने परिवार तक जाना चाहे या उनका परिवार उनके पास आना चाहें, तो यात्रा में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है. जोखिम भरा होता है.
पति-पत्नी के अकेले-अकेले रहने के नुकसान के बारे में जेपी नड्डा को बताया
पति-पत्नी के अलग-अलग रहने के नुकसान के बारे में भी स्वास्थ्य मंत्री को बताया गया है. कहा गया है कि स्वास्थ्य मंत्रालय में ट्रांसफर पॉलिसी नहीं होने की वजह से पति-पत्नी को अपनी-अपनी जिम्मेदारियां अकेले निभानी होती है. अलग-अलग रहने की वजह से उनका खर्च कई गुणा बढ़ जाता है. बच्चे माता-पिता के साथ नहीं रह पाते. उनका बचपन छिन जाता है. उनकी परवरिश प्रभावित होती है.
2021-23 के बीच 800 नर्सिंग स्टाफ ने छोड़ दी नौकरी
एसोसिएशन ने स्वास्थ्य मंत्री को बताया है कि जीवनसाथी और अपने परिवार के करीब जाने के लिए लोग नौकरी छोड़ने लगे हैं. वर्ष 2021 से 2023 के बीच 800 नर्सिंग स्टाफ ने इस्तीफा देकर अन्यत्र नौकरी कर ली. अगर सरकार इस पर ध्यान दे और स्थानांतरण नीति लागू कर दे, तो कर्मचारियों के घर-परिवार की समस्या दूर होगी और वे बेहतर सेवा दे पायेंगे. अभी वे चुनौतीपूर्ण और विषम परिस्थितियों में काम करने के लए मजबूर हैं.
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By Mithilesh Jha
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