दिल्ली दंगा: IB ऑफिसर के चेहरे-सीने पर एसिड के निशान, परिवार का दावा- हिंदू होने की वजह से हुई हत्या

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काली बंडी में पूर्व आप पार्षद ताहिर हुसैन, आईबी ऑफिसर अंकित शर्मा गोल घेरे में

फरवरी 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुई सांप्रदायिक हिंसा के दौरान आईबी ऑफिसर अंकित शर्मा पर भीड़ ने हमला कर दिया था. हमले में उनके सिर पर कई धारदार और भारी चीजों से वार किए गए, जिससे उनकी मौत हो गई. कोर्ट के फैसले पर पढ़ें परिवार ने क्या कहा.

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सोमवार (13 जुलाई) को कड़कड़डूमा कोर्ट ने इस मामले में पूर्व आप पार्षद ताहिर हुसैन समेत पांच लोगों को दोषी करार दिया. इससे परिवार को न्याय मिलने की उम्मीद जाग गई. अंकित पर भीड़ ने हमला किया था. बाद में उनका शव चांद बाग इलाके के एक नाले से बरामद हुआ था.

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भाई ने कहा- हिंदू होने की वजह से निशाना बनाया गया अंकित को

फैसले से अंकित शर्मा के परिवार को राहत जरूर मिली, लेकिन इससे 2020 के दंगों की दर्दनाक यादें भी ताजा हो गईं. अंकित के भाई ने अंग्रेजी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया से बात करते हुए कहा कि देश और लोगों की सेवा करते हुए उनकी मौत हुई. उनके साथ जो हुआ, उसे शब्दों में बयां करना भी मुश्किल है. उन्होंने आरोप लगाया कि भीड़ ने उन्हें हिंदू होने की वजह से निशाना बनाया. अंकित देश की सेवा करते हुए अपनी जान गंवा बैठे और परिवार आज भी उस दर्द को नहीं भूल पाया है.

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सीनियर ऑफिसर ने भेजा था अंकित को हालात का जायजा लेने के लिए

अंकित शर्मा के भाई ने कहा कि मेरा भाई ड्यूटी पर था, तभी भीड़ ने उसकी बेरहमी से हत्या कर दी. आईबी अधिकारी अपनी पहचान आमतौर पर उजागर नहीं करते, इसलिए उसने खुद को दिल्ली पुलिस का अधिकारी बताया था. न्यूज एजेंसी पीटीआई से बातचीत में अंकित शर्मा के भाई ने कहा कि उनके सीनियर ऑफिसर ने उन्हें हालात का जायजा लेने के लिए भेजा था. उनका क्या कसूर था? वह सिर्फ अपनी ड्यूटी निभा रहे थे. हमें लगता है कि उन्हें उनके धर्म की वजह से निशाना बनाया गया और यह दर्द आज भी हमारे साथ है.

बेरहमी से हत्या की गई थी अंकित की

अंकित शर्मा के भाई ने बताया कि शव के चेहरे और सीने समेत कई जगह एसिड के निशान थे. उन्होंने कहा कि शरीर पर कई जगह चाकू से वार किए गए थे. परिवार का कहना है कि बेहद बेरहमी से हत्या की गई थी. कोर्ट के फैसले पर अंकित के भाई ने कहा कि दोषियों को सजा मिलने से परिवार को न्याय की उम्मीद जरूर जगी है, लेकिन इस फैसले ने 2020 की उस दर्दनाक घटना की यादें भी फिर से ताजा कर दी हैं. परिवार आज भी उस सदमे से पूरी तरह उबर नहीं पाया है.


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