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नर्सों की वैवाहिक ट्रांसफर नीति की मांग को मिला एनजीओ का समर्थन

Updated at : 15 Jun 2025 6:28 PM (IST)
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Nursing Staff Spouse Transfer Policy News Today

एम्स के नर्सिंग स्टाफ्स की मांग को मिला एनजीओ का समर्थन.

Nursing Staff Spouse Transfer Policy News: ऑल इंडिया एम्स इम्प्लाईज यूनियन लगातार केंद्र सरकार से मांग कर रही है कि देश के अलग-अलग एम्स में कार्यरत पति-पत्नी को एक ही जगह पदस्थापित किया जाये. कई ऐसे मामले हैं, जिसमें पति और पत्नी दोनों एम्स में कार्यरत हैं, लेकिन दोनों के बीच कई हजार किलोमीटर की दूरी है. ऐसे में वे फैमिली प्लानिंग तक नहीं कर पा रहे हैं. कई लोगों ने परेशान होकर नौकरी छोड़ दी.

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Nursing Staff Spouse Transfer Policy News: ऑल इंडिया एम्स इम्प्लाईज यूनियन के नर्सिंग स्टाफ की वैवाहिक ट्रांसफर नीति की मांग को गैरसरकारी संगठनों का समर्थन मिलना शुरू हो गया है. नयी दिल्ली की एक संस्था ने उनकी मांग का समर्थन करते हुए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय को एक चिट्ठी लिखी है. इस चिट्ठी में पति-पत्नी को एक ही शहर में पोस्टिंग देने की अपील की गयी है. सादिक मसीह मेडिकल सोशल सर्वेंट सोसाइटी ने स्वास्थ्य मंत्रालय से अपील की है कि मेडिकल इंस्टीट्यूट्स के लिए ट्रांसफर की जो नीति बनी हुई है, उसी का पालन नर्सिंग स्टाफ के लिए भी किया जाये.

नर्सों का पारिवारिक जीवन होगा सुखमय – सोसाइटी

सोसाइटी ने कहा है कि अगर इस नीति को लागू किया जाता है, तो स्वास्थ्य के क्षेत्र में महिलाओं की स्थिति में सुधार होगा और उनका पारिवारिक जीवन भी सुखमय होगा. सोसाइटी की अपील है कि अगर पति-पत्नी एक ही शहर में रहकर काम करेंगे, तो उनकी कई परेशानियां दूर हो जायेंगी, जिससे उनके काम की एफिशिएंसी बढ़ेगी.

स्वास्थ्यकर्मियों के लिए वर्क-लाइफ बैलेंस होगा बेहतर

सोसाइटी ने कहा कि इसके कई फायदे भी होंगे. स्वास्थ्यकर्मियों के लिए वर्क-लाइफ बैलेंस बेहतर हो जायेगा. तनाव और भावनात्मक चुनौतियों से निबटने में आसानी होगी. दोनों कम हो जायेगा. पति-पत्नी के बीच दूरी खत्म होगी, तो नर्सिंग स्टाफ नौकरी नहीं छोड़ेंगे और मेडिकल संस्थानों में उनकी मेहनत का असर भी दिखेगा.

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स्वास्थ्य क्षेत्र को भी होगा फायदा

सोसाइटी ने कहा है कि अगर सरकार इस मांग पर गौर करती है और पति-पत्नी को एक ही शहर में पदस्थापित करने की नीति को लागू करती है, तो इसका फायदा नर्सिंग स्टाफ्स को मिलेगा. इससे कार्यस्थल का वातावरण बेहतर होगा और अंतत: इसका लाभ स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र को मिलेगा.

फैमिली प्लानिंग नहीं कर पा रहे कई लोग

ऑल इंडिया एम्स इम्प्लाईज यूनियन लगातार केंद्र सरकार से मांग कर रही है कि देश के अलग-अलग एम्स में कार्यरत पति-पत्नी को एक ही जगह पदस्थापित किया जाये. कई ऐसे मामले हैं, जिसमें पति और पत्नी दोनों एम्स में कार्यरत हैं, लेकिन दोनों के बीच कई हजार किलोमीटर की दूरी है. ऐसे में वे फैमिली प्लानिंग तक नहीं कर पा रहे हैं. कई लोगों ने परेशान होकर नौकरी छोड़ दी.

5 साल में 2583 नर्सिंग स्टाफ ने सरकारी नौकरी छोड़ी

केंद्र सरकार के आंकड़े बताते हैं कि महज 5 साल में (1 जनवरी 2019 से 31 दिसंबर 2023) तक 2,583 नर्सिंग ऑफिसर्स और सीनियर नर्सिंग ऑफिसर्स ने इसी परेशानी की वजह से नौकरी छोड़ दी. नौकरी छोड़ने के बाद उन्होंने किसी प्राइवेट संस्थान में नौकरी शुरू कर दी. सरकार से कई बार इस बारे में गुहार लगायी गयी, लेकिन यूनियन की मांगों पर गौर नहीं किया गया. अब मामला कोर्ट पहुंच चुका है. सभी पक्षों से कोर्ट ने जवाब मांगा है.

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Mithilesh Jha

लेखक के बारे में

By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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