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सोनिया गांधी ने किया सवाल, खामेनेई की हत्या पर सरकार चुप्प क्यों?

Updated at : 03 Mar 2026 12:04 PM (IST)
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Sonia Gandhi react on Iran

सोनिया गांधी, गोल घेरे में खामेनेई (Photo: PTI)

Ayatollah Khamenei : कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने कहा कि ईरान के सुप्रीम लीडर खामेनेई की हत्या पर सरकार की चुप्पी तटस्थता नहीं है. संसद में इस मामले पर चर्चा होनी चाहिए. पढ़ें और कांग्रेस नेता ने क्या कहा.

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Ayatollah Khamenei : सोनिया गांधी ने ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की टारगेट किलिंग पर मोदी सरकार की‘चुप्पी पर सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि उसका यह रुख भारत की विदेश नीति की दिशा और विश्वसनीयता पर गंभीर संदेह पैदा करता है. उन्होंने अंग्रेजी डेली न्यूज पेपर ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ में प्रकाशित अपने लेख में यह भी कहा कि आगामी नौ मार्च से जब संसद के बजट सत्र के दूसरे चरण की बैठक शुरू हो तो अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था के भंग होने पर सरकार की ‘‘परेशान करने वाली चुप्पी’’ पर स्पष्ट चर्चा होनी चाहिए.

सोनिया गांधी ने कहा कि जारी कूटनीतिक वार्ता के बीच किसी पदासीन राष्ट्राध्यक्ष की हत्या समकालीन अंतरराष्ट्रीय संबंधों में एक भयावह विघटन का संकेत है. लेकिन इस स्तब्ध कर देने वाली घटना से परे नयी दिल्ली की चुप्पी भी हैरान करने वाली है. उन्होंने कहा कि भारत सरकार ने न तो इस हत्या और न ही ईरान की संप्रभुता के उल्लंघन की निंदा की है.

मौन रहना तटस्थता नहीं : सोनिया गांधी

कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष ने कहा कि अमेरिका-इज़राइल के व्यापक हमले की अनदेखी करते हुए, प्रधानमंत्री ने केवल ईरान द्वारा संयुक्त अरब अमीरात पर किए गए प्रतिशोधी हमले की निंदा तक स्वयं को सीमित रखा और उससे पहले के घटनाक्रमों का उल्लेख नहीं किया. बाद में उन्होंने गहरी चिंता व्यक्त की और संवाद और कूटनीति की बात की, जबकि यही प्रक्रिया इजरायल और अमेरिका द्वारा किए गए व्यापक, अकारण हमलों से पहले जारी थी. उन्होंने कहा कि जब किसी विदेशी नेता की टारगेट किलिंग पर हमारा देश संप्रभुता या अंतरराष्ट्रीय कानून की स्पष्ट रक्षा नहीं करता और निष्पक्षता त्याग दी जाती है, तो यह हमारी विदेश नीति की दिशा और विश्वसनीयता पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है. मौन रहना तटस्थता नहीं है.

ईरानी नेता की हत्या बिना किसी औपचारिक युद्ध घोषणा के

सोनिया गांधी ने कहा कि ईरानी नेता की हत्या बिना किसी औपचारिक युद्ध घोषणा के और चल रही राजनयिक प्रक्रिया के दौरान की गई. उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र चार्टर का अनुच्छेद 2 (4) किसी भी राष्ट्र की क्षेत्रीय अखंडता या राजनीतिक स्वतंत्रता के विरुद्ध बल के प्रयोग या धमकी को प्रतिबंधित करता है. किसी सेवारत राष्ट्राध्यक्ष की सोनिया गांधी इन सिद्धांतों पर सीधा प्रहार है. उन्होंने तर्क दिया कि यदि ऐसे कृत्यों पर दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र द्वारा सैद्धांतिक आपत्ति न जतायी जाए तो अंतरराष्ट्रीय मानदंडों के क्षरण को सामान्य बनाना आसान हो जाता है.

यह भी पढ़ें : सऊदी, कुवैत में US एंबेसी पर ईरान का हमला, अमेरिका बोला- इन 15 देशों को तुरंत छोड़ दें अमेरिकी

हत्या से मात्र 48 घंटे पहले प्रधानमंत्री इजरायल की यात्रा से लौटे

सोनिया गांधी ने कहा कि समय की दृष्टि से भी यह असहज करने वाला है. हत्या से मात्र 48 घंटे पहले प्रधानमंत्री इजरायल की यात्रा से लौटे थे, जहां उन्होंने बेंजामिन नेतन्याहू की सरकार के प्रति स्पष्ट समर्थन दोहराया, जबकि गाजा संघर्ष में बड़ी संख्या में नागरिको, विशेषकर महिलाओं और बच्चों की मौतों पर वैश्विक आक्रोश बना हुआ है. उन्होंने कहा कि ऐसे समय में जब ‘ग्लोबल साउथ’ के कई देश, साथ ही रूस और चीन जैसे भारत के ब्रिक्स साझेदार दूरी बनाए हुए हैं, भारत का उच्च स्तरीय राजनीतिक समर्थन, बिना नैतिक स्पष्टता के एक चिंताजनक बदलाव का संकेत देता है. कांग्रेस नेता ने कहा कि भारत का रुख इस त्रासदी के प्रति मौन समर्थन का संकेत दे रहा है.

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Amitabh Kumar

लेखक के बारे में

By Amitabh Kumar

डिजिटल जर्नलिज्म में 14 वर्षों से अधिक का अनुभव है. करियर की शुरुआत Prabhatkhabar.com से की. राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय खबरों पर अच्छी पकड़ है. राजनीति और सामाजिक मुद्दों पर गहन लेखन का अनुभव रहा है. तथ्यपरक रिपोर्टिंग और विश्लेषणात्मक लेखन में विशेष रुचि है. ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग खबरों पर लगातार फोकस रहता है.

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