Smriti Irani : राहुल गांधी के प्रति नरम क्यों हो गईं स्मृति ईरानी, खुद किया खुलासा

Published by : Amitabh Kumar Updated At : 24 Jul 2025 7:52 AM

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Smriti Irani

Smriti Irani : स्मृति ईरानी ने एक इंटरव्यू में कहा, “गांधी परिवार ने 2024 में मेरे खिलाफ चुनाव लड़ने से इनकार कर दिया. जब वे मैदान में ही नहीं उतरे, तो मैं क्या कह सकती हूं? कभी राहुल गांधी की प्रखर आलोचक रहीं केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी अब कांग्रेस नेता के प्रति काफी नरम रुख अपनाती नजर आ रही हैं. इंडिया टुडे को दिए एक इंटरव्यू में जब उनसे पूछा गया कि वह अब राहुल गांधी पर आक्रामक तेवर क्यों नहीं दिखातीं, तो ईरानी ने सीधा और स्पष्ट जवाब दिया, "क्योंकि गांधी परिवार ने 2024 में मुझसे लड़ने से इनकार कर दिया."

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Smriti Irani : पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने कहा है कि अब राहुल गांधी पर हमला करना उनकी जिम्मेदारी नहीं रही. उन्होंने कहा, “पहले ये मेरा दायित्व था, अब नहीं है.” यह बात उन्होंने तब कही जब उनसे पूछा गया कि अब वो राहुल गांधी पर पहले की तरह तीखे हमले क्यों नहीं करतीं. स्मृति ईरानी ने 2019 के लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश की अमेठी सीट से राहुल गांधी को हराया था. स्मृति ईरानी ने दावा किया कि अगर राहुल गांधी 2024 में अमेठी से उनके खिलाफ चुनाव लड़ते, तो वह उन्हें फिर से हरातीं. उन्होंने कहा, “इसीलिए राहुल गांधी ने अमेठी से चुनाव नहीं लड़ा.”

गांधी परिवार ने चुनाव लड़ने से इनकार कर दिया : स्मृति ईरानी

2024 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने अमेठी से केएल शर्मा को उतारा, जिन्होंने ईरानी को हराया. वहीं, राहुल गांधी रायबरेली और केरल की वायनाड सीट से जीते. स्मृति ईरानी ने इंडिया टुडे टीवी को दिए इंटरव्यू में कहा, “गांधी परिवार ने 2024 में मेरे खिलाफ चुनाव लड़ने से इनकार कर दिया. जब वो मैदान में ही नहीं उतरे, तो मैं क्या कह सकती हूं? मैं तो उन्हें बस यूं ही पीछा करते हुए नहीं दौड़ा सकती.”

2019 में मैंने असंभव को संभव कर दिखाया : स्मृति ईरानी

स्मृति ईरानी ने आगे कहा, “इतिहास गवाह है कि अमेठी कोई आसान सीट नहीं रही है. शरद यादव जैसे वरिष्ठ नेता वहां हार चुके हैं. यहां तक कि मेनका गांधी, जो खुद उसी परिवार से थीं, वे भी अमेठी से चुनाव हार चुकी हैं.” उन्होंने कहा, “कोई भी समझदार नेता ऐसी सीट नहीं चुनता जहां हार तय दिखे. लेकिन एक पार्टी कार्यकर्ता के रूप में अगर ऐसी सीट दी जाती है, तो उसे कर्तव्य समझकर स्वीकार करना पड़ता है.” ईरानी ने आगे कहा, “2019 में मैंने असंभव को संभव कर दिखाया.” साथ ही उन्होंने यह भी जोड़ा कि 2014 में राहुल गांधी से हारने के बाद उन्होंने अमेठी में बहुत काम किया.

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स्मृति ईरानी ने कहा कि गांधी परिवार हमेशा अमेठी को इसलिए चुनता रहा है क्योंकि वहां की “सामाजिक समीकरण” उनके पक्ष में रहते हैं.

मैंने राष्ट्रीय हित में काम किया : स्मृति ईरानी

स्मृति ईरानी ने कहा, “प्रदर्शन और राजनीतिक समीकरण में फर्क होता है.” जब उनसे 2024 में हारने पर सवाल किया गया, तो उन्होंने कहा, “अगर लोगों ने कहा होता कि मैंने काम नहीं किया, तो मुझे दुख होता. लेकिन लोग कहते हैं कि मैंने बहुत काम किया. आप राजनीतिक नतीजों की बात कर रहे हैं, मैंने राष्ट्रीय हित में काम किया.”

अब मुझे ज्यादा ताने सुनने पड़ेंगे : स्मृति ईरानी

स्मृति ईरानी ने इन अटकलों को खारिज किया कि वह राजनीति से दूर हो रही हैं और टीवी सीरियल ‘क्योंकि सास भी कभी बहू थी’ की वापसी के साथ अब अभिनय पर ज्यादा ध्यान दे रही हैं. उन्होंने कहा, “मैं राजनीति से दूर नहीं हुई हूं. लेकिन मुझे यह समझ है कि 2019 में कांग्रेस अध्यक्ष (राहुल गांधी) को हराने के बाद अब मुझे ज्यादा ताने सुनने पड़ेंगे.”

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लेखक के बारे में

By Amitabh Kumar

अमिताभ कुमार झारखंड की राजधानी रांची के रहने वाले हैं और पिछले कई वर्षों से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय हैं. डिजिटल न्यूज में अच्छी पकड़ है और तेजी के साथ सटीक व भरोसेमंद खबरें लिखने के लिए जाने जाते हैं. वर्तमान में अमिताभ प्रभात खबर डिजिटल में नेशनल और वर्ल्ड न्यूज पर फोकस करते हैं और तथ्यों पर आधारित खबरों को प्राथमिकता देते हैं. हरे-भरे झारखंड की मिट्टी से जुड़े अमिताभ ने अपनी शुरुआती पढ़ाई जिला स्कूल रांची से पूरी की और फिर Ranchi University से ग्रेजुएशन के साथ पत्रकारिता की पढ़ाई की. पढ़ाई के दौरान ही साल 2011 में रांची में आयोजित नेशनल गेम को कवर करने का मौका मिला, जिसने पत्रकारिता के प्रति जुनून को और मजबूत किया.1 अप्रैल 2011 से प्रभात खबर से जुड़े और शुरुआत से ही डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय रहे. खबरों को आसान, रोचक और आम लोगों की भाषा में पेश करना इनकी खासियत है. डिजिटल के साथ-साथ प्रिंट के लिए भी कई अहम रिपोर्ट कीं. खासकर ‘पंचायतनामा’ के लिए गांवों में जाकर की गई ग्रामीण रिपोर्टिंग करियर का यादगार अनुभव है. प्रभात खबर से जुड़ने के बाद कई बड़े चुनाव कवर करने का अनुभव मिला. 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के साथ-साथ झारखंड विधानसभा चुनावों (2014, 2019 और 2024) की भी ग्राउंड रिपोर्टिंग की है. चुनावी माहौल, जनता के मुद्दे और राजनीतिक हलचल को करीब से समझना रिपोर्टिंग की खास पहचान रही है.

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