ePaper

जम्मू-कश्मीर में जल्द चुनाव कराने वाली याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने किया स्थगित, जानें क्या है वजह?

Updated at : 06 Jul 2023 12:36 PM (IST)
विज्ञापन
जम्मू-कश्मीर में जल्द चुनाव कराने वाली याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने किया स्थगित, जानें क्या है वजह?

जम्मू कश्मीर में विधानसभा चुनाव कराने के लिए नेशनल कॉन्फ्रेंस प्रमुख डॉ. फारूक अब्दुल्ला के नेतृत्व 13 दलों के नेताओं ने 16 मार्च को दिल्ली में चुनाव आयोग का दरवाजा खटखटाया था. आयोग से मिलने के बाद यह उम्मीद जताई जा रही थी कि इस बाबत कोई फैसला लिया जा सकता है.

विज्ञापन

सुप्रीम कोर्ट ने जम्मू-कश्मीर में जल्द चुनाव के लिए दायर याचिका पर सुनवाई को स्थगित कर दिया है. जानकारी के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर में बिना किसी देरी के विधानसभा चुनाव कराने के लिए चुनाव आयोग को निर्देश देने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई स्थगित कर दिया है, SC का कहना है कि अनुच्छेद 370 से संबंधित मामला 11 जुलाई को सूचीबद्ध है और वे इसके बाद ही इस याचिका पर सुनवाई करेंगे.


चुनाव से पहले धारा 370 पर होगी सुनवाई 

आपको बताएं कि, भारत के मुख्य न्यायाधीश डी.वाई. चंद्रचूड़ की अगुवाई वाली पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ 11 जुलाई को दो दर्जन से अधिक याचिकाओं पर सुनवाई करेंगे, जिसमें जम्मू और कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम, 2019 की कानूनी वैधता को चुनौती देने की मांग की गई है, जिसने जम्मू-कश्मीर को दो केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजित कर दिया था और 5 अगस्त 2019 के राष्ट्रपति के आदेश ने संविधान के अनुच्छेद 370 (जिसने तत्कालीन राज्य को विशेष दर्जा दिया) को रद्द कर दिया था.

साल 2019 को देश से विवादित अनुच्छेद 370 खत्म कर दिया गया

भारतीय सरकार ने ऐतिहासिक फैसला लेते हुए साल 2019 को देश से विवादित अनुच्छेद 370 खत्म कर दिया गया था। जिसकी शुरुआत कश्मीर के राजा हरि सिंह से हुई थी। अक्टूबर 1947 में, कश्मीर के तत्कालीन महाराजा, हरि सिंह ने एक विलय पत्र पर हस्ताक्षर किए, जिसमें कहा गया कि तीन विषयों के आधार पर यानी विदेश मामले, रक्षा और संचार पर जम्मू और कश्मीर भारत सरकार को अपनी शक्ति हस्तांतरित करेगा.

13 दलों ने 16 मार्च को चुनाव आयोग को सौंपा था ज्ञापन 

बाताएं कि , जम्मू कश्मीर में विधानसभा चुनाव कराने के लिए नेशनल कॉन्फ्रेंस प्रमुख डॉ. फारूक अब्दुल्ला के नेतृत्व 13 दलों के नेताओं ने 16 मार्च को दिल्ली में चुनाव आयोग का दरवाजा खटखटाया था. आयोग को ज्ञापन भी सौंपा गया था जिसमें कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, शरद पवार, सीताराम येचुरी व अन्य ने दस्तखत किए थे. गुलाम नबी आजाद की पार्टी को छोड़ जम्मू कश्मीर के लगभग सभी प्रमुख विपक्षी दलों के नेता चुनाव आयोग से मिले थे. पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा नहीं थीं, बल्कि उन्होंने पार्टी महासचिव अमरीक सिंह रीन को भेजा था. आयोग से मिलने के बाद यह उम्मीद जताई जा रही थी कि इस बाबत कोई फैसला लिया जा सकता है

Also Read: Explainer: क्या है धारा-370 का इतिहास, जिसे निरस्त करने के खिलाफ दायर याचिकाओं पर SC करेगा सुनवाई

विज्ञापन
Abhishek Anand

लेखक के बारे में

By Abhishek Anand

'हम वो जमात हैं जो खंजर नहीं, कलम से वार करते हैं'....टीवी और वेब जर्नलिज्म में अच्छी पकड़ के साथ 10 साल से ज्यादा का अनुभव. झारखंड की राजनीतिक और क्षेत्रीय रिपोर्टिंग के साथ-साथ विभिन्न विषयों और क्षेत्रों में रिपोर्टिंग. राजनीतिक और क्षेत्रीय पत्रकारिता का शौक.

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola