राजीव गांधी हत्याकांड: 31 साल बाद छूटेगा एजी पेरारिवलन, सुप्रीम कोर्ट ने दिया रिहाई का आदेश

Published by : Pritish Sahay Updated At : 18 May 2022 12:48 PM

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राजीव गांधी हत्याकांड: राजीव गांधी हत्याकांड मामले में एजी पेरारिवलन ने कोर्ट में दायर अपनी याचिका में कहा था कि, तमिलनाडु सरकार ने उनकी रिहाई का फैसला लिया था, लेकिन राज्यपाल ने काफी समय तक उनकी फाइल को अपने पास होल्ड कर लिया था, उसके बाद फाइल को राष्ट्रपति के पास भेजा गया.

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Rajiv Gandhi Assassination Case: भारत के पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी हत्याकांड के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला किया है. हत्याकांड में दोषी और उम्र कैद की सजा काट रहे एजी पेरारिवलन को सुप्रीम कोर्ट ने रिहा करने का आदेश दिया है. एजी पेरारिवलन बीते 31 सालों से जेल में सजा काट रहे थे. इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने उम्रकैद की सजा काट रहे पेरारिवलन की समयपूर्व रिहाई की मांग करने वाली याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था.

9 मार्च को मिली थी जमानत

बता दें, राजीव गांधी हत्याकांड मामले में एजी पेरारिवलन ने कोर्ट में दायर अपनी याचिका में कहा था कि, तमिलनाडु सरकार ने उनकी रिहाई का फैसला लिया था, लेकिन राज्यपाल ने काफी समय तक उनकी फाइल को अपने पास होल्ड कर लिया था, उसके बाद फाइल को राष्ट्रपति के पास भेजा गया. उन्होंने इसे संविधान के खिलाफ बताया. बता दें, इससे पहले एजी पेरारिवलन को न्यायालय ने 9 मार्च को जमानत दे दी थी. कोर्ट ने कहा था कि, सजा काटने और पैरोल के दौरान उसके आचरण को लेकर किसी तरह की शिकायत नहीं मिली थी.

अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (ASG) केएम नटराज ने जस्टिस एल नागेश्वर राव, जस्टिस बी आर गवई और जस्टिस एएस बोपन्न की पीठ को बताया था कि केंद्रीय कानून के तहत दोषी ठहराए गए शख्स की सजा में छूट, माफी और दया याचिका के संबंध में याचिका पर सिर्फ राष्ट्रपति ही फैसला कर सकते हैं. इस पर, सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से सवाल किया था कि अगर इस दलील को मान लिया जाता है तो राज्यपालों की ओर से दी गई अब तक की छूट अमान्य हो जाएगी.

11 जून 1991 को पेरारिवलन को किया गया था गिरफ्तार
गौरतलब है कि, 21 मई 1991 को पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की तमिलनाडु के श्रीपेरंबदूर में हत्या की गई थी. इसके बाद 11 जून 1991 को पेरारिवलन को गिरफ्तार किया गया था. पेरारिवलन पर बम धमाके के लिए उपयोग में आई दो 9 वोल्ट की बैटरी खरीद कर मास्टरमाइंड शिवरासन को देने का आरोप सिद्ध हुआ था. पेरारिवलन घटना के वक्त महज 19 साल युवक था. बीते 31 साल से वो जेल में है इस दौरान उसने अपनी पढ़ाई जारी रखी है. उसने अच्छे नंबरों से कई डिग्रियां भी हासिल की है.

7 लोगों को मिली है आजीवन कारावास की सजा
बता दें, राजीव गांधी हत्याकांड मामले में 7 लोगों को दोषी ठहराया गया था. कोर्ट ने सभी को मौत की सजा सुनाई गई थी. हालांकि, साल 2014 में सुप्रीम कोर्ट ने मौत की सजा को आजीवन कारावास में तब्दील कर दिया था. इसके बाद 2016 में जे जयललिता और 2018 एके पलानीसामी की सरकार ने दोषियों की रिहाई की सिफारिश की थी. लेकिन राज्यपालों ने फाइल को लंबे समय तक अपने पास रख लिया था. काफी समय तक दया याचिका पर फैसला नहीं होने के कारण दोषियों ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था.

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By Pritish Sahay

प्रीतीश सहाय, इन्हें इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया इंडस्ट्री में 12 वर्षों से अधिक का अनुभव है. ये वर्तमान में प्रभात खबर डॉट कॉम के साथ डिजिटल कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं. मीडिया जगत में अपने अनुभव के दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण विषयों पर काम किया है और डिजिटल पत्रकारिता की बदलती दुनिया के साथ खुद को लगातार अपडेट रखा है. इनकी शिक्षा-दीक्षा झारखंड की राजधानी रांची में हुई है. संत जेवियर कॉलेज से ग्रेजुएट होने के बाद रांची यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता की डिग्री हासिल की. इसके बाद लगातार मीडिया संस्थान से जुड़े रहे हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत जी न्यूज से की थी. इसके बाद आजाद न्यूज, ईटीवी बिहार-झारखंड और न्यूज 11 में काम किया. साल 2018 से प्रभात खबर के साथ जुड़कर काम कर रहे हैं. प्रीतीश सहाय की रुचि मुख्य रूप से राजनीतिक खबरों, नेशनल और इंटरनेशनल इश्यू, स्पेस, साइंस और मौसम जैसे विषयों में रही है. समसामयिक घटनाओं को समझकर उसे सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाने की इनकी हमेशा कोशिश रहती है. वे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय राजनीति से जुड़े मुद्दों पर लगातार लेखन करते रहे हैं. इसके साथ ही विज्ञान और अंतरिक्ष से जुड़े विषयों पर भी लिखते हैं. डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में काम करते हुए उन्होंने कंटेंट प्लानिंग, न्यूज प्रोडक्शन, ट्रेंडिंग टॉपिक्स जैसे कई क्षेत्रों में काम किया है. तेजी से बदलते डिजिटल दौर में खबरों को सटीक, विश्वसनीय और आकर्षक तरीके से प्रस्तुत करना पत्रकारों के लिए चुनौती भी है और पेशा भी, इनकी कोशिश इन दोनों में तालमेल बनाते हुए बेहतर और सही आलेख प्रस्तुत करना है. वे सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म की जरूरतों को समझते हुए कंटेंट तैयार करते हैं, जिससे पाठकों तक खबरें प्रभावी ढंग से पहुंच सकें. इंटरनेशनल विषयों में रुचि होने कारण देशों के आपसी संबंध, वार अफेयर जैसे मुद्दों पर लिखना पसंद है. इनकी लेखन शैली तथ्यों पर आधारित होने के साथ-साथ पाठकों को विषय की गहराई तक ले जाने का प्रयास करती है. वे हमेशा ऐसी खबरों और विषयों को प्राथमिकता देते हैं जो राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय लिहाज से महत्वपूर्ण हों. रूस यूक्रेन युद्ध, मिडिल ईस्ट संकट जैसे विषयों से लेकर देश की राजनीतिक हालात और चुनाव के दौरान अलग-अलग तरह से खबरों को पेश करते आए हैं.

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