Rahul Gandhi: 'भारत में EVM एक ब्लैक बॉक्स…', राहुल गांधी ने फिर उठाए ईवीएम पर सवाल

Published by : Pritish Sahay Updated At : 16 Jun 2024 1:58 PM

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Rahul Gandhi | PTI

Rahul Gandhi: लोकसभा चुनवा के दौरान ईवीएम का मुद्दा हावि रहा. चुनाव के बाद यह मुद्दा गौण हो गया था, लेकिन कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने एक बार फिर ईवीएम का मुद्दा उठा दिया है. उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि भारत में ईवीएम ब्लैक बॉक्स बन गया है.

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Rahul Gandhi: लोकसभा चुनाव के बाद एक बार फिर ईवीएम का मुद्दा उठा है. दरअसल कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (EVM) को लेकर कटाक्ष किया है. राहुल गांधी ने अपने सोशल मीडिय प्लेटफॉर्म ट्वविटर पर एक पोस्ट करके एक बार फिर ईवीएम का मुद्दा उछाला है. कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने बिजनेसमैन एलेन मस्क की एक्स पोस्ट को टैग करते हुए लिखा है कि भारत में ईवीएम एक ब्लैक बॉक्स हैं और किसी को भी उनकी जांच करने की अनुमति नहीं है. अपने पोस्ट में राहुल गांधी ने चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता पर भी सवाल उठाए. उन्होंने पोस्ट में शिवसेना शिंदे गुट के उम्मीदवार रवींद्र वायकर से जुड़ी एक खबर भी शेयर की है. शिंदे पर ईवीएम से छेड़छाड़ कर जीतने का आरोप लगा है.

ईवीएम पर फिर राहुल गांधी का हमला
भारत में ईवीएम एक “ब्लैक बॉक्स” हैं और किसी को भी उनकी जांच करने की अनुमति नहीं है. हमारी चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता को लेकर गंभीर चिंताएँ व्यक्त की जा रही हैं. जब संस्थानों में जवाबदेही की कमी हो जाती है तो लोकतंत्र एक दिखावा बन जाता है और धोखाधड़ी का शिकार हो जाता है.

राहुल गांधी ने शेयर किया न्यूज पेपर की रिपोर्ट
अपने ट्विटर पर राहुल गांधी ने एक अंग्रेजी अखबार की रिपोर्ट शेयर करते हुए कहा है कि वनराई पुलिस को अभी तक की जांच में रविंद्र वायकर के रिश्तेदार मंगेश पंडिलकर के खिलाफ कई सबूत मिले हैं. सारा मामला ईवीएम से छेड़छाड़ का है. दरअसल, मंगेश मंडिलकर पर आरोप है कि उसी ने ईवीएम में गड़बड़ी की जिसके बाद मुंबई उत्तर पश्चिम लोकसभा सीट से वायकर को 48 वोटों से जीत मिली. रिपोर्ट के मुताबिक आरोप है कि मंगेश वोटों की गिनती के दौरान जिस फोन का इस्तेमाल कर रहा था वह ईवीएम से जुड़ा था. उसी के जरिये रिजल्ट में हेर फेर की गई है.

लोकसभा चुनाव का प्रमुख मुद्दों में शामिल था ईवीएम
बता दें 18वीं लोकसभा चुनाव में विपक्ष की ओर से ईवीएम के मुद्दे को जमकर उछाला गया था. राहुल गांधी समेत कई और इंडिया गठबंधन के नेताओं ने ईवीएम में छेड़खानी की बात कही थी. इससे पहले भी चुनावों के दौरान और बाद में भी ईवीएम को लेकर सवाल उठते रहे हैं. हालांकि चुनाव के बाद यह मुद्दा शांत हो गया था लेकिन लगता है राहुल गांधी के ट्वीट के बाद यह मुद्दा एक बार फिर उछलेगा.

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By Pritish Sahay

प्रीतीश सहाय, इन्हें इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया इंडस्ट्री में 12 वर्षों से अधिक का अनुभव है. ये वर्तमान में प्रभात खबर डॉट कॉम के साथ डिजिटल कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं. मीडिया जगत में अपने अनुभव के दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण विषयों पर काम किया है और डिजिटल पत्रकारिता की बदलती दुनिया के साथ खुद को लगातार अपडेट रखा है. इनकी शिक्षा-दीक्षा झारखंड की राजधानी रांची में हुई है. संत जेवियर कॉलेज से ग्रेजुएट होने के बाद रांची यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता की डिग्री हासिल की. इसके बाद लगातार मीडिया संस्थान से जुड़े रहे हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत जी न्यूज से की थी. इसके बाद आजाद न्यूज, ईटीवी बिहार-झारखंड और न्यूज 11 में काम किया. साल 2018 से प्रभात खबर के साथ जुड़कर काम कर रहे हैं. प्रीतीश सहाय की रुचि मुख्य रूप से राजनीतिक खबरों, नेशनल और इंटरनेशनल इश्यू, स्पेस, साइंस और मौसम जैसे विषयों में रही है. समसामयिक घटनाओं को समझकर उसे सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाने की इनकी हमेशा कोशिश रहती है. वे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय राजनीति से जुड़े मुद्दों पर लगातार लेखन करते रहे हैं. इसके साथ ही विज्ञान और अंतरिक्ष से जुड़े विषयों पर भी लिखते हैं. डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में काम करते हुए उन्होंने कंटेंट प्लानिंग, न्यूज प्रोडक्शन, ट्रेंडिंग टॉपिक्स जैसे कई क्षेत्रों में काम किया है. तेजी से बदलते डिजिटल दौर में खबरों को सटीक, विश्वसनीय और आकर्षक तरीके से प्रस्तुत करना पत्रकारों के लिए चुनौती भी है और पेशा भी, इनकी कोशिश इन दोनों में तालमेल बनाते हुए बेहतर और सही आलेख प्रस्तुत करना है. वे सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म की जरूरतों को समझते हुए कंटेंट तैयार करते हैं, जिससे पाठकों तक खबरें प्रभावी ढंग से पहुंच सकें. इंटरनेशनल विषयों में रुचि होने कारण देशों के आपसी संबंध, वार अफेयर जैसे मुद्दों पर लिखना पसंद है. इनकी लेखन शैली तथ्यों पर आधारित होने के साथ-साथ पाठकों को विषय की गहराई तक ले जाने का प्रयास करती है. वे हमेशा ऐसी खबरों और विषयों को प्राथमिकता देते हैं जो राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय लिहाज से महत्वपूर्ण हों. रूस यूक्रेन युद्ध, मिडिल ईस्ट संकट जैसे विषयों से लेकर देश की राजनीतिक हालात और चुनाव के दौरान अलग-अलग तरह से खबरों को पेश करते आए हैं.

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