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Rahul Gandhi ने किया गुजरात हाईकोर्ट का रुख, मानहानि केस में सूरत कोर्ट के फैसले को दी चुनौती

Updated at : 25 Apr 2023 8:11 PM (IST)
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Rahul Gandhi ने किया गुजरात हाईकोर्ट का रुख, मानहानि केस में सूरत कोर्ट के फैसले को दी चुनौती

राहुल गांधी मानहानि केस में सूरत कोर्ट के फैसले को गुजरात हाई कोर्ट में चुनौती दी है. कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने मंगलवार को निचली अदालत के उस आदेश के खिलाफ गुजरात उच्च न्यायालय का रुख किया, जिसमें 'मोदी सरनेम' से जुड़े मानहानि के मामले में उनकी सजा पर रोक को खारिज कर दिया गया था.

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राहुल गांधी मानहानि केस में सूरत कोर्ट के फैसले को गुजरात हाई कोर्ट में चुनौती दी है. गुजरात कांग्रेस के एक पदाधिकारी ने बताया कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने मंगलवार को निचली अदालत के उस आदेश के खिलाफ गुजरात उच्च न्यायालय का रुख किया, जिसमें ‘मोदी सरनेम’ पंक्ति से जुड़े मानहानि के मामले में उनकी दोषसिद्धि पर रोक को खारिज कर दिया गया था.

सूरत कोर्ट ने राहुल को नहीं दी थी राहत 

21 अप्रैल को, सूरत की एक अदालत ने उनकी याचिका को खारिज कर दिया था, जिससे वायनाड से संसद के लोकसभा सदस्य के रूप में शीघ्र बहाली की उनकी उम्मीदों को झटका लगा था. न्यायाधीश ने एक सांसद के रूप में गांधी के कद का हवाला दिया था और कहा था कि उन्हें अपनी टिप्पणियों में अधिक सावधान रहना चाहिए था. अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश रॉबिन मोगेरा ने प्रथम दृष्टया निचली अदालत के सबूतों और टिप्पणियों का हवाला देते हुए कहा था कि ऐसा प्रतीत होता है कि राहुल गांधी ने चोरों के साथ एक ही उपनाम वाले लोगों की तुलना करने के अलावा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ कुछ अपमानजनक टिप्पणी की थी.

23 मार्च को राहुल को सुनाई गई थी सजा 

आपको बताएं कि, 23 मार्च को, राहुल गांधी को 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले की गई अपनी टिप्पणी के लिए आपराधिक मानहानि का दोषी ठहराया गया और दो साल की जेल की सजा सुनाई गई. सजा के बाद, कांग्रेस नेता को आठ साल की अवधि के लिए संसद के किसी भी सदन के सदस्य के रूप में अयोग्य घोषित कर दिया गया था.

राहुल को अयोग्य ठहराए जाने बाद खूब हुई राजनीति 

वहीं गांधी की अयोग्यता ने पूरे देश में एक बड़ा राजनीतिक तूफान खड़ा कर दिया है. कांग्रेस नेता यह कहते हुए अवहेलना कर रहे हैं कि वह माफी नहीं मांगेंगे. राहुल गांधी ने सूरत कोर्ट के फैसले के बाद कहा था , “यह पूरा ड्रामा है जो प्रधान मंत्री को बचाने के लिए किया गया है- अडानी की शेल कंपनियों में 20,000 करोड़ रुपये किसके गए? मैं इन धमकियों, अयोग्यताओं या जेल की सजा से डरने वाला नहीं हूं”.

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Abhishek Anand

लेखक के बारे में

By Abhishek Anand

'हम वो जमात हैं जो खंजर नहीं, कलम से वार करते हैं'....टीवी और वेब जर्नलिज्म में अच्छी पकड़ के साथ 10 साल से ज्यादा का अनुभव. झारखंड की राजनीतिक और क्षेत्रीय रिपोर्टिंग के साथ-साथ विभिन्न विषयों और क्षेत्रों में रिपोर्टिंग. राजनीतिक और क्षेत्रीय पत्रकारिता का शौक.

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