अदालत से राहत नहीं मिली तो 'बेघर' हो सकते हैं राहुल गांधी, खाली करना होगा सरकारी बंगला
Published by : KumarVishwat Sen Updated At : 25 Mar 2023 6:54 AM
आवासन और शहरी विकास मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा कि चूंकि, उन्हें लोकसभा से अयोग्य घोषित कर दिया गया है. इसलिए वह सरकारी आवास में रहने के हकदार नहीं हैं.
नई दिल्ली : गुजरात के सूरत की निचली अदालत की ओर से गुरुवार को मानहानि के मुकदमे में कांग्रेस नेता राहुल गांधी को दो साल की सजा सुनाए जाने के बाद उनकी लोकसभा की सदस्यता भी रद्द कर दी गई है. संसद की सदस्यता समाप्त होने के बाद उनके सामने आवास का एक नया संकट भी पैदा होने वाला है. खबर है कि ऊपरी अदालत यानी सेशन कोर्ट, हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट से उन्हें राहत नहीं मिलती है, तो वे ‘बेघर’ हो जाएंगे और उन्हें सरकारी बंगला खाली करना पड़ेगा.
समाचार एजेंसी भाषा की एक रिपोर्ट के अनुसार, सांसद के तौर पर अयोग्य ठहराए जाने के बाद कांग्रेस नेता राहुल गांधी को आपराधिक मानहानि मामले में ऊपरी अदालत से राहत नहीं मिलने पर एक महीने के भीतर दिल्ली के लुटियंस जोन स्थित अपना सरकारी बंगला खाली करना पड़ सकता है. राहुल गांधी को 2004 में लोकसभा सांसद चुने जाने के बाद 12, तुगलक लेन बंगला आवंटित किया गया था.
सूरत की एक अदालत द्वारा राहुल गांधी को 2019 के आपराधिक मानहानि मामले में दोषी ठहराए जाने और दो साल जेल की सजा सुनाए जाने के बाद शुक्रवार को लोकसभा सचिवालय ने उन्हें सांसद के रूप में अयोग्य घोषित कर दिया. हालांकि सूरत की अदालत ने तत्काल जमानत देते हुए कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष को ऊपरी अदालत में अपील करने के लिए 30 दिन का समय दिया है.
आवासन और शहरी विकास मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा कि चूंकि, उन्हें लोकसभा से अयोग्य घोषित कर दिया गया है. इसलिए वह सरकारी आवास में रहने के हकदार नहीं हैं. नियमों के अनुसार, उन्हें अयोग्यता आदेश की तारीख से एक महीने के भीतर अपना आधिकारिक बंगला खाली करना होगा. कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा को जुलाई 2020 में लोधी एस्टेट स्थित अपना आधिकारिक बंगला खाली करना पड़ा था, क्योंकि सुरक्षा कम किए जाने के बाद वह इसके लिए पात्र नहीं थीं.
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कांग्रेस पार्टी ने कहा है कि वह राहुल गांधी की दोषसिद्धि और अयोग्यता के खिलाफ राजनीतिक और कानूनी लड़ाई लड़ेगी. अयोग्य ठहराए जाने के बाद राहुल गांधी आठ साल तक चुनाव नहीं लड़ पाएंगे, जब तक कि ऊपरी अदालत उनकी दोषसिद्धि और सजा पर रोक नहीं लगा देती. इस मुद्दे पर सरकार पर निशाना साधते हुए कांग्रेस ने कहा कि यह ‘भारतीय लोकतंत्र के लिए काला दिन’ है. उसने कहा कि लड़ाई ‘कानूनी और राजनीतिक’ दोनों तरीके से लड़ी जाएगी. विपक्षी दल ने यह भी आरोप लगाया कि यह कार्रवाई ‘राजनीतिक प्रतिशोध’ से प्रेरित है.
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By KumarVishwat Sen
कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.
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