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भारत और फ्रांस के बीच सबसे बड़ी डील! 3.25 लाख करोड़ से होगा 114 राफेल का सौदा

Updated at : 13 Jan 2026 9:06 PM (IST)
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Rafale Deal

3.25 लाख करोड़ से होगा 114 राफेल का सौदा, एआई फोटो

Rafale Deal: भारतीय वायुसेना अपनी मारक क्षमता और ताकत को बढ़ाने में लगी है. इसी कड़ी में फ्रांस से 114 अतिरिक्त राफेल लड़ाकू विमान खरीदने की तैयारी चल रही है. इस प्रस्ताव पर चर्चा के लिए रक्षा मंत्रालय में इस सप्ताह एक हाईलेवल मीटिंग कर सकता है. बैठक में करीब 3.25 लाख करोड़ रुपये के इस बड़े रक्षा सौदे पर चर्चा की जाएगी.

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Rafale Deal: भारत अपने एयरफोर्स की ताकत और मारक क्षमता को बढ़ाने में लगा है. इसके लिए भारतीय वायुसेना फ्रांस से और 114 राफेल खरीद की तैयारी में जुटी है. इसी सप्ताह रक्षा मंत्रालय की हाई लेवल मीटिंग होनी है, जिसमें यह प्रस्ताव रखा जाएगा. बैठक में फ्रांस से 114 राफेल लड़ाकू जेट विमान खरीदने के लिए करीब 3.25 लाख करोड़ रुपये के सौदे पर बातचीत हो सकती है. सबसे बड़ी बात की इनके निर्माण में करीब 30 फीसदी स्वदेशी सामग्री का इस्तेमाल किया जाएगा. न्यूज एजेंसी एएनआई के मुताबिक सौदे में करीब 12 से 18 विमान भारत को तैयार हालत में मिलेंगे, यानी जो उड़ान भरने की स्थिति में होंगे. वहीं, बाकी विमानों का निर्माण भारत में होगा, जिसमें 30 फीसदी सामान भारत में बने होंगे.

राफेल में लगेंगे स्वदेशी सिस्टम!

न्यूज एजेंसी एएनआई की एक रिपोर्ट के मुताबिक रक्षा मंत्रालय की हाईलेवल मीटिंग में इस प्रस्ताव पर विस्तार से चर्चा की जाएगी कि फ्रांस राफेल विमानों में भारतीय हथियार और स्वदेशी प्रणालियों को लगाने की इजाजत दें. वहीं यह साफ है कि विमान के सोर्स कोड फिलहाल फ्रांस अपने ही पास रखेगा. यदि इस समझौते पर मंजूरी बन जाती है तो यह भारत का अब तक का सबसे बड़ा रक्षा सौदा होगा. इससे भारतीय वायुसेना में राफेल फाइटर जेट की संख्या बढ़कर 176 हो जाएगी. क्योंकि भारतीय वायु सेना के पास पहले से ही 36 राफेल जेट मौजूद हैं, जबकि भारतीय नौसेना ने पिछले साल 26 राफेल जेट का ऑर्डर दिया था.

ऑपरेशन सिंदूर के बाद वायुसेना के दिया था रक्षा मंत्रालय को एसओसी

भारतीय वायु सेना ने 114 राफेल जेट विमानों के प्रस्ताव का विवरण (SOC) कुछ महीने पहले ही रक्षा मंत्रालय को दिया था. रक्षा मंत्रालय की ओर से अप्रूवल होने के बाद इस प्रस्ताव को सुरक्षा संबंधी कैबिनेट समिति से अंतिम मंजूरी लेनी होगी. इस प्रस्ताव को आगे बढ़ाने का कदम वायुसेना ने ऑपरेशन सिंदूर में पाकिस्तान के खिलाफ राफेल के शानदार प्रदर्शन के बाद किया. जहां राफेल ने अपने स्पेक्ट्रा इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सूट का उपयोग करके चीनी पीएल-15 हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइलों को पूरी तरह से मात दे दी थी.

अमेरिका और रूस ने की है भारत को खास पेशकश

सबसे बड़ी बात की भारत राफेल खरीद के लिए फ्रांस के साथ समझौते को ऐसे समय में आगे बढ़ा रहा है जब भारतीय वायुसेना को अमेरिका एफ-35 और रूस एसयू-57 सहित अपने पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमानों की पेशकश कर दी है. हालांकि भारतीय वायु सेना कई बेमिसाल खूबियों के कारण राफेल की खरीद पर ज्यादा जोर दे रही है.

पांचवी पीढ़ी के विमानों पर जोर दे रहा भारत

क्षेत्र में बढ़ते खतरे से निपटने के लिए भारत लगातार अपने एयर पावर बढ़ाने में लगा है. इसके लिए भारतीय वायुसेना को लड़ाकू विमानों को अपने बेड़े में शामिल करने की तत्काल जरूरत है. भारतीय वायु सेना के लड़ाकू विमान बेड़े में खास तौर से Su-30 MKI, राफेल और स्वदेशी लड़ाकू विमान परियोजनाएं शामिल होने की उम्मीद है. भारत पहले ही 180 LCA मार्क 1A जेट का ऑर्डर दे चुका है. भारत आने वाले समय में बड़ी संख्या में पांचवीं पीढ़ी के स्वदेशी लड़ाकू विमानों को शामिल करने की योजना बना रहा है.

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Pritish Sahay

लेखक के बारे में

By Pritish Sahay

12 वर्षों से टीवी पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सेवाएं दे रहा हूं. रांची विश्वविद्यालय के पत्रकारिता विभाग से पढ़ाई की है. राजनीतिक, अंतरराष्ट्रीय विषयों के साथ-साथ विज्ञान और ब्रह्मांड विषयों पर रुचि है. बीते छह वर्षों से प्रभात खबर.कॉम के लिए काम कर रहा हूं. इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में काम करने के बाद डिजिटल जर्नलिज्म का अनुभव काफी अच्छा रहा है.

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