भगवंत मान सरकार को मिला भरोसा, पंजाब विधानसभा में विश्वासमत पास, सेफ है सरकार
पंजाब के सीएम भगवंत मान की फाइल फोटो, पीटीआई
Punjab Assembly: पंजाब विधानसभा में शुक्रवार (1 मई) को मुख्यमंत्री भगवंत मान ने विश्वास प्रस्ताव पेश. यह प्रस्ताव चर्चा के बाद पास हो गया. सीएम मान ने कहा कि पार्टी मजबूत है. इसकी मौजूदगी देश भर में है.
Punjab Assembly: पंजाब विधानसभा के विशेष सत्र के दौरान मुख्यमंत्री भगवंत मान ने विश्वास प्रस्ताव पेश करते हुए स्पष्ट किया कि पार्टी पूरी तरह मजबूत है और लगातार विस्तार कर रही है. उन्होंने कहा कि AAP के खत्म होने या विधायकों के पाला बदलने की अफवाहें बेबुनियाद हैं और इससे जनता के बीच भ्रम पैदा करने की कोशिश की जा रही है. पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान की सरकार ने यह कदम उस राजनीतिक घटनाक्रम के कुछ दिन बाद उठाया, जब आम आदमी पार्टी के सात राज्यसभा सदस्यों ने पार्टी छोड़कर भारतीय जनता पार्टी जॉइन कर लिया था.
जम्मू कश्मीर से गोवा तक हमारी मौजूदगी- सीएम मान
सीएम भगवंत मान ने विधानसभा में अपने संबोधन में कहा कि पार्टी मजबूत है. इसकी मौजूदगी देशभर में है. जम्मू-कश्मीर से लेकर गोवा पार्टी की मौजूदगी है. जम्मू कश्मीर के डोडा में ‘आप’ का एक विधायक है, जबकि पंजाब में उनकी सरकार सफलतापूर्वक काम कर रही है. इसके अलावा दिल्ली में पार्टी विपक्ष में है, गुजरात में उसके पांच और गोवा में दो विधायक हैं.
स्थानीय निकायों में भी मजबूत पकड़
मुख्यमंत्री मान ने यह भी कहा कि ‘आप’ की मौजूदगी सिर्फ विधानसभा तक सीमित नहीं है, बल्कि विभिन्न स्थानीय निकायों में भी पार्टी के महापौर, पार्षद और सरपंच हैं. यह पार्टी की राष्ट्रीय स्तर पर बढ़ती ताकत को दर् रहा है.
विधायकों को जारी किया गया व्हिप
मान सरकार ने शुक्रवार को विश्वास प्रस्ताव से पहले अपने सभी विधायकों को एक दिवसीय विशेष सत्र में मौजूद रहने के लिए व्हिप जारी किया था. पंजाब की 117 सदस्यीय विधानसभा में ‘आप’ को स्पष्ट बहुमत हासिल है और उसके पास 94 विधायक हैं. वहीं कांग्रेस के 16, बहुजन समाज पार्टी के एक, शिरोमणि अकाली दल के तीन, भाजपा के दो और एक निर्दलीय विधायक हैं.
AAP को राज्यसभा में लगा है बड़ा झटका
24 अप्रैल को ‘आप’ को उस समय बड़ा झटका लगा था जब उसके 10 में से सात राज्यसभा सांसद- राघव चड्ढा, अशोक मित्तल, संदीप पाठक, हरभजन सिंह, राजेंद्र गुप्ता, विक्रमजीत साहनी और स्वाति मालीवाल, ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया. इन नेताओं ने पार्टी पर अपने मूल सिद्धांतों भटकने का आरोप लगाते हुए बीजेपी जॉइन कर लिया था. बाद में राज्यसभा के सभापति सीपी राधाकृष्णन ने सातों सांसदों के भाजपा में विलय को मंजूरी दे दी थी. इसके बाद राज्य सभा में ‘आप’ के सांसदों की संख्या घटकर सिर्फ तीन रह गई है.
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By Pritish Sahay
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