झाविमो का कांग्रेस में विलय का प्रदीप यादव का दावा खारिज
Author : Prabhat Khabar News Desk Published by : Prabhat Khabar Updated At : 16 May 2020 5:03 AM
केंद्रीय चुनाव आयोग ने 18 मार्च को नये सिरे से जारी अपने आदेश में झारखंड विकास मोर्चा (प्रजातांत्रिक) के अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी में विलय का प्रस्ताव खारिज कर दिया है. इससे झारखंड विधान सभा में बाबूलाल मरांडी के नेता प्रतिपक्ष बनने का रास्ता तकनीकी तौर पर साफ होता नजर आ रहा है.
नयी दिल्ली : केंद्रीय चुनाव आयोग ने 18 मार्च को नये सिरे से जारी अपने आदेश में झारखंड विकास मोर्चा (प्रजातांत्रिक) के अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी में विलय का प्रस्ताव खारिज कर दिया है. इससे झारखंड विधान सभा में बाबूलाल मरांडी के नेता प्रतिपक्ष बनने का रास्ता तकनीकी तौर पर साफ होता नजर आ रहा है. नये आदेश में आयोग ने झारखंड विकास मोर्चा के प्रदीप यादव गुट की ओर से अपील करनेवाले अध्यक्ष रामनिवास जायसवाल को बताया है कि आयोग ने छह मार्च को ही झारखंड विकास मोर्चा के भारतीय जनता पार्टी में विलय पर फैसला कर लिया है.
फैसले की जानकारी आयोग की वेबसाइट पर अपलोड की जा चुकी है. उसके बाद आपकी इस अपील का कोई औचित्य नहीं है और न ही इस पर नये सिरे से विचार संभव है. आयोग ने श्री जायसवाल के पत्र पर विचार कर उसे खारिज करते हुए आदेश की प्रति उन्हें 18 मार्च को स्पीड पोस्ट के जरिये भेज दी है.झाविमो के भाजपा में विलय संबंधी आयोग का फैसला आने के एक दिन बाद, यानी सात मार्च को प्रदीप यादव गुट की ओऱ से झारखंड विकास मोर्चा के अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी में विलय के प्रस्ताव संबंधी सूचना आयोग को भेजी गयी.
झाविमो के अध्यक्ष की हैसियत से लिखे उस पत्र में श्री जायसवाल ने चुनाव आयोग को लिखा था कि 16 फरवरी को बनहोरा में झाविमो द्वारा आहूत बैठक में राज्य के केंद्रीय पदाधिकारी, केंद्रीय कार्यकारिणी के सदस्य, जिला कार्यकारिणी के सदस्य तथा प्रखंड स्तरीय कार्यकर्ता भी उपस्थित हुए थे. वहीं इसमें पार्टी के निर्वाचित तीन विधायकों में से दो विधायक प्रदीप यादव व बंधु तर्की भी उपस्थित थे. इस बैठक में सर्वसम्मति से पार्टी का विलय राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी में करने का निर्णय लिया गया.
कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष डॉ रामेश्वर उरांव ने भी विलय पर अपनी सहमति दी है.नेता प्रतिपक्ष के मुद्दे पर स्पीकर ने नहीं सुनाया है फैसलाभाजपा विधायक दल के नेता चुने जाने के बाद बाबूलाल मरांडी ने विधानसभा में प्रतिपक्ष के नेता पद पर दावा किया था़ विधानसभा अध्यक्ष रवींद्र नाथ महतो ने तकनीकी पहलू और कानूनी सलाह की बात करते हुए श्री मरांडी को प्रतिपक्ष के नेता का दर्जा अब तक नहीं दिया है़ इस मुद्दे पर भाजपा सदन के अंदर आक्रमक भी रही़ इससे सदन की कार्यवाही भी कई दिनों तक बाधित रही. विधानसभा अध्यक्ष श्री महतो का कहना था कि वह समय पर व बिना किसी दबाव के निर्णय लेंगे. वह इसका कानूनी पक्ष देख रहे है.
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