Land Occupation : जमीन हमें बेच दो, वरना बुलडोजर चल जाएगा, पुलिसकर्मियों पर लगा जमीन कब्जाने का आरोप

Published by : Amitabh Kumar Updated At : 10 Sep 2025 1:12 PM

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पुलिसकर्मियों पर जमीन कब्जाने का आरोप (File Photo)

Land Occupation : उत्तर प्रदेश के पुलिसकर्मियों पर जमीन कब्जाने का आरोप लगा है. इलाहाबाद हाई कोर्ट ने मामले के जांच के आदेश दिये हैं. जानें पूरा मामला आखिर है क्या?

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Land Occupation : इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ पीठ ने लखनऊ पुलिस आयुक्त को गोमती नगर थाने के कुछ पुलिसकर्मियों पर जमीन कब्जाने और मालिक को धमकाने के आरोपों की जांच का आदेश दिया है. अदालत ने एक पुलिसकर्मी की पत्नी के नाम पर हुए बैनामे की भी जांच करने को कहा है. साथ ही गोमती नगर पुलिस उपायुक्त को व्यक्तिगत हलफनामे के साथ जांच रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया गया है. इस मामले की अगली सुनवाई 24 सितंबर को होगी.

यह आदेश न्यायमूर्ति संगीता चंद्रा व न्यायमूर्ति बृजराज सिंह की खंडपीठ ने अरविंद कुमार शर्मा की याचिका पर पारित किया. याचिकाकर्ता के अधिवक्ता अविरल जायसवाल ने बताया कि याची ने खरगापुर में कुल 2,250 वर्ग फुट जमीन 2004 और 2008 में खरीदी थी. सलीम नाम का एक व्यक्ति याचिकाकर्ता को 2018 से उस जमीन से बेदखल करने की कोशिश कर रहा है, जिसकी शिकायत याचिकाकर्ता ने उच्च अधिकारियों से की थी.

खरगापुर चौकी के प्रभारी ने उल्टा याचिकाकर्ता पर डाला दबाव

दो नवंबर 2020 को जब कुछ लोग जमीन पर कब्जा करने आए, तो याचिकाकर्ता के बेटे ने पुलिस को बुलाया. लेकिन खरगापुर चौकी के प्रभारी ने उल्टा याचिकाकर्ता और उनके बेटे पर दबाव बनाना शुरू कर दिया कि वे जमीन उन लोगों को बेच दें जो उन्हें बेदखल करना चाहते हैं. इस दौरान गोमती नगर थाने के मालखाना के तत्कालीन प्रभारी अवधेश सिंह ने याचिकाकर्ता के बेटे को धमकी दी कि या तो वह जमीन उन्हें बेच दे, वरना उसने जो निर्माण किया है उसे बुलडोजर से गिरा दिया जाएगा.

गोमती नगर थाने के ही एक अन्य दरोगा अरविंद पंत पर भी याची के बेटे को धमकाने का आरोप है. इसमें कहा गया कि धमकियों के बावजूद, जब याचिकाकर्ता अपनी जमीन बेचने के लिए तैयार नहीं हुआ, तो सलीम के पिता मोहम्मद हनीफ ने मालखाना प्रभारी अवधेश सिंह की पत्नी उर्मिला सिंह के नाम एक बैनामा किया. इस बैनामे में याचिकाकर्ता की जमीन की सीमाएं भी अंकित की गईं.

सीजेएम ने भी याची के प्रार्थना पत्र को खारिज कर दिया

आरोप है कि अब स्थानीय पुलिस और उक्त पुलिसकर्मी लगातार याचिकाकर्ता को जमीन से बेदखल करने की कोशिश कर रहे हैं, जबकि शिकायत के बावजूद पुलिस आयुक्त और जिला मजिस्ट्रेट ने कोई कार्रवाई नहीं की. यही नहीं, मामले को दीवानी विवाद मानते हुए, लखनऊ के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) ने भी याची के प्रार्थना पत्र को खारिज कर दिया.

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लेखक के बारे में

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अमिताभ कुमार झारखंड की राजधानी रांची के रहने वाले हैं और पिछले कई वर्षों से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय हैं. डिजिटल न्यूज में अच्छी पकड़ है और तेजी के साथ सटीक व भरोसेमंद खबरें लिखने के लिए जाने जाते हैं. वर्तमान में अमिताभ प्रभात खबर डिजिटल में नेशनल और वर्ल्ड न्यूज पर फोकस करते हैं और तथ्यों पर आधारित खबरों को प्राथमिकता देते हैं. हरे-भरे झारखंड की मिट्टी से जुड़े अमिताभ ने अपनी शुरुआती पढ़ाई जिला स्कूल रांची से पूरी की और फिर Ranchi University से ग्रेजुएशन के साथ पत्रकारिता की पढ़ाई की. पढ़ाई के दौरान ही साल 2011 में रांची में आयोजित नेशनल गेम को कवर करने का मौका मिला, जिसने पत्रकारिता के प्रति जुनून को और मजबूत किया.1 अप्रैल 2011 से प्रभात खबर से जुड़े और शुरुआत से ही डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय रहे. खबरों को आसान, रोचक और आम लोगों की भाषा में पेश करना इनकी खासियत है. डिजिटल के साथ-साथ प्रिंट के लिए भी कई अहम रिपोर्ट कीं. खासकर ‘पंचायतनामा’ के लिए गांवों में जाकर की गई ग्रामीण रिपोर्टिंग करियर का यादगार अनुभव है. प्रभात खबर से जुड़ने के बाद कई बड़े चुनाव कवर करने का अनुभव मिला. 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के साथ-साथ झारखंड विधानसभा चुनावों (2014, 2019 और 2024) की भी ग्राउंड रिपोर्टिंग की है. चुनावी माहौल, जनता के मुद्दे और राजनीतिक हलचल को करीब से समझना रिपोर्टिंग की खास पहचान रही है.

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