नूर इनायत खान, पहली भारतीय महिला जासूस जिन्हें मिला ब्रिटिश प्लेक मेमोरियल सम्मान

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नूर इनायत खान पहली भारतीय महिला जासूस हैं जिन्हें ब्रिटिश सरकार ने ब्लू प्लेक ममोरियल सम्मान मिला है. उनके लंदन के ब्लूम्सबरी 4 तैविटन स्ट्रीट में लगाया जाएगा ब्लू प्लेक सम्मान लगाया गदया जहां वह दूसरे विश्व युद्ध के दौरान एक सीक्रेट एजेंट के तौर पर रहा करती थी. इस सम्मान को पाने वाली वह पहली भारतीय महिला जासूस हैं. नूर इनायत खान उन 6 महिलाओं में से एक हैं, जिन्हें ब्लू प्लेक से सम्मानित किया गया है.

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नूर इनायत खान पहली भारतीय महिला जासूस हैं जिन्हें ब्रिटिश सरकार ने ब्लू प्लेक ममोरियल सम्मान मिला है. उनके लंदन के ब्लूम्सबरी 4 तैविटन स्ट्रीट में लगाया जाएगा ब्लू प्लेक सम्मान लगाया गदया जहां वह दूसरे विश्व युद्ध के दौरान एक सीक्रेट एजेंट के तौर पर रहा करती थी. इस सम्मान को पाने वाली वह पहली भारतीय महिला जासूस हैं. नूर इनायत खान उन 6 महिलाओं में से एक हैं, जिन्हें ब्लू प्लेक से सम्मानित किया गया है.

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नूर इनायत खान जन्म 1914 में मॉस्को में हुआ था. वह पंद्रहवीं सदी के सूफ़ी संत जुमा शाह की वंश से जुड़ी थी. उन्हें सूफी संगीत से बेहद प्रेम था और वह पहुत खूबसूरत महिला थी. उन्हें भारत से खास लगाव था. वह महात्मा गांधी के विचारों की प्रशंसक थीं. नूर के पिता हजरत इनायत खान मैसूर के राजा टीपू सुल्तान के प्रपौत्र थे और उनकी मां ओरा मीना रे बेकर एक अमेरिकी महिला थीं.

नूर इनायत खान को फ्रेंच भाषा का काफी अच्छा ज्ञान था. उनकी फ्रेंच बोलने की अच्छी क्षमता के कारण उन्हें स्पेशल ऑपरेशन के लिए चुना गया और वह जासूसी का काम करने के लिए तैयार हो गयी. उन्होंने फ्रांस में एक महिला जासूस टीम के साथ काम शुरू किया. नूर इनायत मे दूसरे विश्व युद्ध के दौरान स्पेशल ऑपरेशन एक्जिक्युटिव में शानदार काम किया था. इससे पहले वो वोलेंटियर के तौर पर ब्रिटेन की सेना में भर्ती हुई थी.

नूर खान की नीली पट्टिका को ब्लूमसबेरी के 4 टैनिटन स्ट्रीट में रखा गया है. जहां वह 1943 में ब्रिटेन के स्पेशल ऑपरेशन के लिए अंडर कवर रेडियो ऑपरेटर के तौर पर नाजी के कब्जे वाली फ्रांस के लिए रवाना हुई थी. नयी पट्टिका में लिखा हुआ है कि नूर इनायत खान जीसी 1914-1944 एसओइ एजेंट कोडनेम मेजेलीन यहां रहती थी. वर्ष 1944 में डचाऊ कंसन्ट्रेशन कैंप में उनकी हत्या हो गयी, हालांकि जिन लोगों ने उन्हें बंदी बनाया था उन्हें भी उनका असली नाम पता नहीं चल पाया.

एसओइ एक स्वतंत्र ब्रिटिश सिक्रेट सर्विस थी. जिसकती स्थापना 1940 में ब्रिटन के तत्कालीन प्रधानमंत्री विंस्टन चर्चिल ने की थी. नूरप इनायत खान नाजी कब्जे वाले फ्रांस की पहली महिला रेडियो ऑपरेटर थीं. 1949 में मरणोपरांत उन्हें जॉर्ज क्रास से सम्मानित किया गया था. इसके अलावा महात्मा गांधी, बीआर अंबेडकर जैसी कुछ हस्तियां हैं जिन्हें लंदन में उनके प्रवास से जुड़ी इमारतों में ब्लू प्लेक सम्मानित किया गया है. इंग्लिश हेरिटेज सिटी द्वारा संचालित ब्लू प्लेक योजना लंदन भर में विशेष इमारतों से जुडे उल्लेखनिय लोगों और संगठनों को सम्मानित करती है.

Posted By : Pawan Singh

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