संसद के मानसून सत्र में सरकार ला सकती है समान नागरिक संहिता विधेयक! राजनीतिक गलियारों में बढ़ी हलचल

Published by : Pritish Sahay Updated At : 30 Jun 2023 11:02 AM

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केन्द्र सरकार संसद के मानसून सत्र में समान नागरिक संहिता ला सकती है. मीडिया रिपोर्ट में कहा जा रहा है कि सरकार इसी मानसून सत्र में यूसीसी बिल ला सकती है. समान नागरिक संहिता को लेकर राजनीतिक गलियारों में बीते काफी दिनों से चर्चा हो रही है.

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केंद्र सरकार आने वाले मानसून सत्र में समान नागरिक संहिता (UCC Bill) बिल सदन में पेश कर सकती है. आज तक न्यूज के हवाले खबर है कि संसद के मानसून सत्र में समान नागरिक संहिता बिल लाने की तैयारी कर ली गई है. सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक समान नागरिक संहिता कानून संबंधी बिल संसदीय समिति को भी भेजा जा सकता है. वहीं,  बिल को मानसून सत्र में पेश करने की अटकलों पर कांग्रेस और विपक्ष की ओर से कोई बयान नहीं आया है.

राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज

गौरतलब है कि समान नागरिक संहिता (यूसीसी) को लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चा का दौर काफी समय से जारी है. इस मुद्दे पर बहस भी चल रही है. हालांकि, कुछ राजनीतिक दलों का यूसीसी को समर्थन भी मिल रहा है. यूसीसी बिल को आम आदमी पार्टी ने समर्थन दिया है. हालांकि, AAP ने अभी इसे अपना सैद्धांतिक समर्थन ही दिया है. बिल को लेकर आम आदमी पार्टी ने कहा है कि सभी हितधारकों से व्यापक विचार-विमर्श के बाद आम सहमति से ही इसे लाया जाना चाहिए.

पीएम मोदी के बयान के बाद UCC पर शुरू हुआ बहस
बता दें, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को भोपाल में समान नागरिक संहिता की पुरजोर वकालत की थी. पीएम के बयान के बाद देशभर में इसकी चर्चा तेज हो गयी है. अपने बयान में पीएम मोदी ने कहा था कि हम देख रहे हैं यूसीसी के नाम पर लोगों को भड़काने का काम हो रहा है. एक घर में परिवार के एक सदस्य के लिए एक कानून हो, दूसरे के लिए दूसरा, तो क्या वह परिवार चल पाएगा. फिर ऐसी दोहरी व्यवस्था से देश कैसे चल पाएगा?

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क्या है समान नागरिक संहिता कानून
समान नागरिक संहिता का जिक्र संविधान के अनुच्छेद 44 में किया गया है. समान नागरिक संहिता कानून के तहत भारत में रहने वाले हर नागरिक के लिए समान कानून होगा. समान नागरिक संहिता कानून में शादी, तलाक और जमीन-जायदाद के बंटवारे में सभी धर्मों के लिए एक ही कानून लागू होगा. यह कानून एक पंथनिरपेक्ष कानून होगा, जो सभी धर्मों के लिए समान रूप से लागू होगा. फिलहाल देश में मुस्लिम, ईसाई और पारसी का पर्सनल ला लागू है. समान नागरिक संहिता कानून को लेकर काफी समय से बहस चल रही है. लेकिन इसे अब तक लागू नहीं किया जा सका है.

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By Pritish Sahay

प्रीतीश सहाय, इन्हें इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया इंडस्ट्री में 12 वर्षों से अधिक का अनुभव है. ये वर्तमान में प्रभात खबर डॉट कॉम के साथ डिजिटल कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं. मीडिया जगत में अपने अनुभव के दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण विषयों पर काम किया है और डिजिटल पत्रकारिता की बदलती दुनिया के साथ खुद को लगातार अपडेट रखा है. इनकी शिक्षा-दीक्षा झारखंड की राजधानी रांची में हुई है. संत जेवियर कॉलेज से ग्रेजुएट होने के बाद रांची यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता की डिग्री हासिल की. इसके बाद लगातार मीडिया संस्थान से जुड़े रहे हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत जी न्यूज से की थी. इसके बाद आजाद न्यूज, ईटीवी बिहार-झारखंड और न्यूज 11 में काम किया. साल 2018 से प्रभात खबर के साथ जुड़कर काम कर रहे हैं. प्रीतीश सहाय की रुचि मुख्य रूप से राजनीतिक खबरों, नेशनल और इंटरनेशनल इश्यू, स्पेस, साइंस और मौसम जैसे विषयों में रही है. समसामयिक घटनाओं को समझकर उसे सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाने की इनकी हमेशा कोशिश रहती है. वे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय राजनीति से जुड़े मुद्दों पर लगातार लेखन करते रहे हैं. इसके साथ ही विज्ञान और अंतरिक्ष से जुड़े विषयों पर भी लिखते हैं. डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में काम करते हुए उन्होंने कंटेंट प्लानिंग, न्यूज प्रोडक्शन, ट्रेंडिंग टॉपिक्स जैसे कई क्षेत्रों में काम किया है. तेजी से बदलते डिजिटल दौर में खबरों को सटीक, विश्वसनीय और आकर्षक तरीके से प्रस्तुत करना पत्रकारों के लिए चुनौती भी है और पेशा भी, इनकी कोशिश इन दोनों में तालमेल बनाते हुए बेहतर और सही आलेख प्रस्तुत करना है. वे सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म की जरूरतों को समझते हुए कंटेंट तैयार करते हैं, जिससे पाठकों तक खबरें प्रभावी ढंग से पहुंच सकें. इंटरनेशनल विषयों में रुचि होने कारण देशों के आपसी संबंध, वार अफेयर जैसे मुद्दों पर लिखना पसंद है. इनकी लेखन शैली तथ्यों पर आधारित होने के साथ-साथ पाठकों को विषय की गहराई तक ले जाने का प्रयास करती है. वे हमेशा ऐसी खबरों और विषयों को प्राथमिकता देते हैं जो राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय लिहाज से महत्वपूर्ण हों. रूस यूक्रेन युद्ध, मिडिल ईस्ट संकट जैसे विषयों से लेकर देश की राजनीतिक हालात और चुनाव के दौरान अलग-अलग तरह से खबरों को पेश करते आए हैं.

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