SIMI: आतंकवादी संगठन SIMI पर केंद्र सरकार की बड़ी कार्रवाई, पांच साल के लिए बढ़ाया प्रतिबंध
Published by : ArbindKumar Mishra Updated At : 29 Jan 2024 5:10 PM
गृह मंत्री कार्यालय ने सिमी पर प्रतिबंध लगाने की जानकारी साझा करते हुए एक्स पर लिखा, आतंकवाद के खिलाफ पीएम नरेंद्र मोदी के जीरो टॉलरेंस दृष्टिकोण के तहत 'स्टूडेंट्स इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया (सिमी)' को यूएपीए के तहत पांच साल की अगली अवधि के लिए 'गैरकानूनी संघ' घोषित किया गया है.
‘स्टूडेंट्स इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया (सिमी)’ पर केंद्र सरकार ने बड़ी कार्रवाई की है. आतंकी संगठन पर पांच साल के लिए प्रतिबंध बढ़ा दिया गया है. इसको लेकर गृह मंत्रालय ने आदेश जारी कर दिया है. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सिमी पर प्रतिबंध बढ़ाने को लेकर ट्वीट किया और बताया, मोदी सरकार ने जीरो टॉलरेंस नीति के तहत कार्रवाई की है.
गृह मंत्री कार्यालय ने सिमी पर प्रतिबंध बढ़ाने को लेकर क्या किया ट्वीट
गृह मंत्री कार्यालय ने सिमी पर प्रतिबंध लगाने की जानकारी साझा करते हुए एक्स पर लिखा, आतंकवाद के खिलाफ पीएम नरेंद्र मोदी के जीरो टॉलरेंस दृष्टिकोण के तहत ‘स्टूडेंट्स इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया (सिमी)’ को यूएपीए के तहत पांच साल की अगली अवधि के लिए ‘गैरकानूनी संघ’ घोषित किया गया है.
Bolstering PM @narendramodi Ji's vision of zero tolerance against terrorism ‘Students Islamic Movement of India (SIMI)’ has been declared as an 'Unlawful Association' for a further period of five years under the UAPA.
The SIMI has been found involved in fomenting terrorism,…— गृहमंत्री कार्यालय, HMO India (@HMOIndia) January 29, 2024
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सिमी पर केंद्र सरकार ने क्यों लगाया प्रतिबंध
सिमी को भारत की संप्रभुता, सुरक्षा और अखंडता को खतरे में डालने के लिए आतंकवाद को बढ़ावा देने, शांति और सांप्रदायिक सद्भाव को बिगाड़ने में शामिल पाया गया है.
क्या है सिमी और उसका उद्देश्य
स्टूडेंट्स इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया एक प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन है. जिसकी स्थापना अप्रैल 1977 में हुआ था. जिसके संस्थापक अध्यक्ष मोहम्मद अहमदुल्ला सिद्दीकी थे. हालांकि बताया जाता है कि सिमी की स्थापना पहले ही हो गई थी. 1956 में बने प्रतिबंधित संगठन जमात ए इस्लामी को ही नया रूप देकर सिमी बनाया गया.
9/11 हमले के बाद सरकार ने सिमी पर लगाया था बैन
9/11 हमले के बाद भारत सरकार ने 2001 में स्टूडेंट्स इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया पर प्रतिबंध लगा दिया था. सरकार ने यह कार्रवाई आतंकवादरी संगठन के साथ संबंध होने पर लगाया था. हालांकि अगस्त 2008 में एक विशेष न्यायाधिकरण द्वारा प्रतिबंध हटा दिया गया था. लेकिन फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई और सिमी पर फिर से प्रतिबंध लगा दिया है.
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अरबिंद कुमार मिश्रा वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में एक अनुभवी पत्रकार के रूप में कार्यरत हैं. अप्रैल 2011 से संस्थान का हिस्सा रहे अरबिंद के पास पत्रकारिता के क्षेत्र में बतौर रिपोर्टर और डेस्क एडिटर 15 वर्षों से अधिक का अनुभव है. वर्तमान में वह नेशनल और इंटरनेशनल डेस्क की जिम्मेदारी संभालने के साथ-साथ एक पूरी शिफ्ट का नेतृत्व (Shift Lead) भी कर रहे हैं. विशेषज्ञता और अनुभव अरबिंद की लेखनी में खबरों की गहराई और स्पष्टता है. उनकी मुख्य विशेषज्ञता इन क्षेत्रों में है. राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मामले: वैश्विक राजनीति और देश की बड़ी घटनाओं पर पैनी नजर. खेल पत्रकारिता: झारखंड में आयोजित 34वें नेशनल गेम्स से लेकर JSCA स्टेडियम में हुए कई अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैचों की ग्राउंड रिपोर्टिंग का अनुभव. झारखंड की संस्कृति: राज्य की कला, संस्कृति और जनजातीय समुदायों की समस्याओं और उनकी जीवनशैली पर विशेष स्टोरीज. पंचायतनामा: ग्रामीण विकास और जमीनी मुद्दों पर 'पंचायतनामा' के लिए विशेष ग्राउंड रिपोर्टिंग. करियर का सफर प्रभात खबर डिजिटल से अपने करियर की शुरुआत करने वाले अरबिंद ने पत्रकारिता के हर आयाम को बखूबी जिया है. डिजिटल मीडिया की बारीकियों को समझने से पहले उन्होंने आकाशवाणी (All India Radio) और दूरदर्शन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में एंकरिंग के जरिए अपनी आवाज और व्यक्तित्व की छाप छोड़ी है. शिक्षा और योग्यता UGC NET: अरबिंद मिश्रा ने यूजीसी नेट (UGC NET) उत्तीर्ण की है. मास्टर्स (MA): रांची यूनिवर्सिटी के जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग से एमए की डिग्री. ग्रेजुएशन: रांची यूनिवर्सिटी से ही मास कम्युनिकेशन एंड जर्नलिज्म में स्नातक.
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