MGNREGA Name Change : कड़कड़ाती ठंड में विपक्षी सांसदों ने पूरी रात दिया धरना, मोदी सरकार को घेरा
Published by : Amitabh Kumar Updated At : 19 Dec 2025 9:48 AM
मनरेगा का नाम बदलने का विरोध (Photo: PTI)
MGNREGA Name Change : विपक्षी सांसदों ने जी राम जी विधेयक के खिलाफ संसद परिसर में पूरी रात धरना दिया. इसका वीडियो सामने आया है. कांग्रेस नेता मुकुल वासनिक ने कहा कि जब मनरेगा का मसौदा तैयार किया गया था, तब 14 महीने तक परामर्श किया गया था. इसे संसद ने सर्वसम्मति से पारित किया था. यह नयी योजना राज्यों पर अत्यधिक बोझ डालेगी. इसका परिणाम यह होगा कि यह योजना विफल हो जाएगी.
MGNREGA Name Change : विपक्षी सांसदों ने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) के स्थान पर ‘विकसित भारत–जी राम जी विधेयक’ पारित किए जाने के विरोध में संसद परिसर में गुरुवार रात से शुक्रवार सुबह तक 12 घंटे का धरना दिया. विपक्ष ने कहा कि संसद में विरोध के बाद अब वे सरकार के इस कदम के खिलाफ सड़कों पर उतरेंगे. धरने का वीडियो न्यूज एजेंसी पीटीआई ने जारी किया है. वीडियो में टीएमसी सांसद डोला सेन शॉल ओढ़े नजर आ रहीं हैं.
VIDEO | Parliament Winter Session: TMC MPs sit on overnight protest in parliament against passage of G RAM G bill. Party MP Dola Sen says, "Poor, downtrodden people were provided employment through MGNREGA. People sitting in the treasury benches, BJP people have no respect for… pic.twitter.com/f8WDHr4Tii
— Press Trust of India (@PTI_News) December 19, 2025
टीएमसी के सांसदों ने रातभर धरना दिया
विरोध में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के सांसदों ने रातभर धरना दिया. पार्टी की सांसद डोला सेन ने कहा कि मनरेगा के जरिए गरीब और वंचित लोगों को रोजगार मिलता था. उन्होंने आरोप लगाया कि सत्ता पक्ष के भाजपा सांसदों को स्वतंत्रता सेनानियों और महात्मा गांधी के प्रति सम्मान नहीं है. डोला सेन ने कहा कि मनरेगा से गांधीजी का नाम हटाकर उन्हें दोबारा अपमानित किया गया है. उन्होंने यह भी कहा कि नया विधेयक राज्यों पर 40 प्रतिशत आर्थिक बोझ डालेगा, जिससे राज्य सरकारों पर अतिरिक्त दबाव बढ़ेगा.
विकसित भारत- जी राम जी विधेयक, 2025 को दी गई मंजूरी
संसद ने गुरुवार को ‘विकसित भारत- जी राम जी विधेयक, 2025’ को मंजूरी दी. पहले दिन में यह विधेयक लोकसभा और देर रात राज्यसभा से पारित किया गया. तृणमूल कांग्रेस की सांसद सागरिका घोष ने आरोप लगाया कि मोदी सरकार जिस तरह से यह पूरी तरह से “गरीब-विरोधी, जन-विरोधी, किसान-विरोधी और ग्रामीण गरीबों के खिलाफ” विधेयक लाई और मनरेगा को खत्म कर दिया है, वह निंदनीय है. उन्होंने कहा कि यह भारत के गरीबों का अपमान है, यह महात्मा गांधी का अपमान है, यह रवींद्रनाथ टैगोर का अपमान है. हमें सिर्फ पांच घंटे का नोटिस देकर इस विधेयक के बारे में सूचित किया गया. हमें इस पर उचित विचार विमर्श करने की अनुमति नहीं दी गई.
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मोदी सरकार किसान-विरोधी : रणदीप सिंह सुरजेवाला
कांग्रेस महासचिव रणदीप सिंह सुरजेवाला ने विधेयक पारित होने को देश के श्रमिक वर्ग के लिए “दुखद दिन” बताया और मोदी सरकार पर किसान-विरोधी और गरीब-विरोधी होने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि यह शायद भारत के लोकतंत्र मजदूरों के लिए सबसे दुखद दिन है. भाजपा नीत सरकार ने मनरेगा को रद्द कर 12 करोड़ लोगों की आजीविका पर हमला किया है. उन्होंने साबित कर दिया है कि मोदी सरकार किसान-विरोधी और गरीब-विरोधी है.
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By Amitabh Kumar
अमिताभ कुमार झारखंड की राजधानी रांची के रहने वाले हैं और पिछले कई वर्षों से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय हैं. डिजिटल न्यूज में अच्छी पकड़ है और तेजी के साथ सटीक व भरोसेमंद खबरें लिखने के लिए जाने जाते हैं. वर्तमान में अमिताभ प्रभात खबर डिजिटल में नेशनल और वर्ल्ड न्यूज पर फोकस करते हैं और तथ्यों पर आधारित खबरों को प्राथमिकता देते हैं. हरे-भरे झारखंड की मिट्टी से जुड़े अमिताभ ने अपनी शुरुआती पढ़ाई जिला स्कूल रांची से पूरी की और फिर Ranchi University से ग्रेजुएशन के साथ पत्रकारिता की पढ़ाई की. पढ़ाई के दौरान ही साल 2011 में रांची में आयोजित नेशनल गेम को कवर करने का मौका मिला, जिसने पत्रकारिता के प्रति जुनून को और मजबूत किया.1 अप्रैल 2011 से प्रभात खबर से जुड़े और शुरुआत से ही डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय रहे. खबरों को आसान, रोचक और आम लोगों की भाषा में पेश करना इनकी खासियत है. डिजिटल के साथ-साथ प्रिंट के लिए भी कई अहम रिपोर्ट कीं. खासकर ‘पंचायतनामा’ के लिए गांवों में जाकर की गई ग्रामीण रिपोर्टिंग करियर का यादगार अनुभव है. प्रभात खबर से जुड़ने के बाद कई बड़े चुनाव कवर करने का अनुभव मिला. 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के साथ-साथ झारखंड विधानसभा चुनावों (2014, 2019 और 2024) की भी ग्राउंड रिपोर्टिंग की है. चुनावी माहौल, जनता के मुद्दे और राजनीतिक हलचल को करीब से समझना रिपोर्टिंग की खास पहचान रही है.
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