फील्ड वर्क पर आधारित है लोकबाबू की 'जंगलगाथा', विश्व पुस्तक मेले में हुआ लोकार्पण

Updated at : 03 Mar 2023 12:02 AM (IST)
विज्ञापन
फील्ड वर्क पर आधारित है लोकबाबू की 'जंगलगाथा', विश्व पुस्तक मेले में हुआ लोकार्पण

सुप्रसिद्ध आलोचक और महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय के पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो शंभु गुप्त ने जंगलगाथा का लोकार्पण करते हुए कहा कि ऐसे लेखन के लिए नया सौंदर्यशास्त्र चाहिए, क्योंकि पारंपरिक सौंदर्यशास्त्र से ऐसी रचनाओं का वास्तविक मूल्यांकन नहीं हो सकता.

विज्ञापन

नई दिल्ली : पत्रकारिता पूरी तरह से फील्ड वर्क पर ही आधारित है. फील्ड वर्क के बिना पत्रकारिता अधूरी है. लेकिन, अब हिंदी साहित्य में भी पत्रकारिता की तर्ज पर फील्ड वर्क आधारित किताबें लिखी जाने लगी हैं या यूं कहें कि हिंदी में भी धीरे-धीरे फील्ड वर्क आधारित रचनात्मक लेखन की प्रवृत्ति बढ़ रही है. फील्ड वर्क का लेखन तभी प्रामाणिक और प्रभावशाली हो सकता है, जब रचनाकार का अपना जीवन उससे अभिन्न हो. लोकबाबू के संग्रह ‘जंगलगाथा’ की कहानियां इस मायने में विशिष्ट हैं, क्योंकि यहां आ रहे जीवन में लोकबाबू स्वयं उपस्थित हैं.

लोकबाबू की रचना नया सोपान है

सुप्रसिद्ध आलोचक और महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय के पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो शंभु गुप्त ने जंगलगाथा का लोकार्पण करते हुए कहा कि ऐसे लेखन के लिए नया सौंदर्यशास्त्र चाहिए, क्योंकि पारंपरिक सौंदर्यशास्त्र से ऐसी रचनाओं का वास्तविक मूल्यांकन नहीं हो सकता. विश्व पुस्तक मेले में आयोजित इस लोकार्पण समारोह में प्रो गुप्त ने कहा कि बस्तर के बाद जंगलगाथा लोकबाबू की रचनाशीलता का नया सोपान है.

वास्तविक जीवन से हम क्यों हुए बेखबर

वरिष्ठ आलोचक प्रो जीवन सिंह ने इस अवसर पर कहा कि हमारा लेखन संसार मध्यवर्गीय इलाकों से घिर गया है और भीतर से आ रहे वास्तविक जीवन से हम बेखबर हैं. ऐसे माहौल में लोकबाबू जैसे लेखकों का महत्त्व बहुत बढ़ जाता है, जो मध्यवर्गीय दायरों को तोड़कर अपने रचना संसार को गढ़ते हैं. उन्होंने लोकबाबू के लेखन को फणीश्वरनाथ रेणु और रांगेय राघव की परंपरा का विकास बताया. उदयपुर से आए आलोचक प्रो माधव हाड़ा ने लोकबाबू के लेखन को नये दौर का प्रतिनिधि लेखन बताते हुए कहा कि वे हाशिए के जीवन को गहराई से अंकित करते हैं. आयोजन में बनास जन के संपादक पल्लव ने कहा कि इस संग्रह में मुजरिम जैसी कहानी है जो किसान आत्महत्या के एक सर्वथा भिन्न और त्रासद अनुभव को उजागर करती है. पल्लव ने कहा कि हिंदी का रचना संसार लोकबाबू जैसे लेखकों की सक्रियता से और समृद्ध हुआ है.

Also Read: ‘गिरमिटिया मजदूर’ के दर्द की व्यथा है राजीव शुक्ला की ‘तीन समंदर पार’, विश्व पुस्तक मेला में लोकार्पण

कनक जैन ने दिया परिचय

संयोजन कर रहे डॉ कनक जैन ने लोकबाबू का परिचय दिया और संग्रह की कहानियों का संक्षिप्त विवरण भी दिया. इससे पहले प्रकाशक राजपाल एंड संस के निदेशक प्रणव जौहरी ने अतिथियों का स्वागत किया और अपने प्रकाशन गृह से आ रहे कथा सहित्य की जानकारी दी. अंत में चंद्रशेखर चतुर्वेदी ने सभी का आभार व्यक्त किया.

विज्ञापन
KumarVishwat Sen

लेखक के बारे में

By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola