'दिमाग खाने वाला अमीबा' का चौथा केस केरल में आया सामने, जानें कैसे फैलती है बीमारी

Edited by Amitabh Kumar
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‘अमीबा मेनिंगोएन्सेफलाइटिस’ को आमतौर पर 'दिमाग खाने वाला अमीबा' कहा जाता है. ऐसा इसलिए क्योंकि जब अमीबा युक्त पानी नाक में जाता है तो यह ब्रेन को इंफेक्टेड कर देता है.

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‘अमीबा मेनिंगोएन्सेफलाइटिस’ जिसे आमतौर पर ‘दिमाग खाने वाला अमीबा’ कहा जाता है, जिसका चौथा मामला केरल में सामने आया है. इससे पहले 14 वर्षीय लड़के की मौत के बाद केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने एक बैठक की. इस बैठक में संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए गंदे जल निकायों में न नहाने समेत कई सुझाव दिए गए. यह एक दुर्लभ मस्तिष्क संक्रमण है, जो दूषित जल में पाए जाने वाले एक अमीबा की वजह से होता है.

संक्रमण की तुरंत पहचान कर ली गई

मई के बाद से केरल में, अमीबा से होने वाले संक्रमण का यह चौथा मामला है. मरीज का इलाज कर रहे डॉक्टर ने कहा कि उसे एक जुलाई को अस्पताल में भर्ती कराया गया था. उसकी हालत में सुधार हो रहा है. संक्रमण की तुरंत पहचान कर ली गई और विदेश से दवाइयां मंगाने सहित अन्य उपचार दिए गए.

क्या दिया गया सुझाव

मुख्यमंत्री पिनराई विजयन के साथ हुई बैठक में यह सुझाव दिया गया कि स्विमिंग पूलों में उचित रूप से क्लोरीन डाला जाना चाहिए, साथ ही बच्चों को जल निकायों में प्रवेश करते समय सावधान रहना चाहिए क्योंकि वे इस बीमारी से सबसे अधिक प्रभावित होते हैं. मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि सभी को जल निकायों को साफ रखने का ध्यान रखना चाहिए.

‘अमीबा मेनिंगोएन्सेफलाइटिस’ से हो रही है मौत

केरल में गत बुधवार रात 14 वर्षीय लड़के की मौत से पहले मलप्पुरम की पांच वर्षीय लड़की और कन्नूर की एक 13 वर्षीय लड़की की क्रमशः 21 मई और 25 जून को दुर्लभ मस्तिष्क संक्रमण के कारण मृत्यु हो चुकी है.

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अमिताभ कुमार झारखंड की राजधानी रांची के रहने वाले हैं और पिछले कई वर्षों से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय हैं. डिजिटल न्यूज में अच्छी पकड़ है और तेजी के साथ सटीक व भरोसेमंद खबरें लिखने के लिए जाने जाते हैं. वर्तमान में अमिताभ प्रभात खबर डिजिटल में नेशनल और वर्ल्ड न्यूज पर फोकस करते हैं और तथ्यों पर आधारित खबरों को प्राथमिकता देते हैं. हरे-भरे झारखंड की मिट्टी से जुड़े अमिताभ ने अपनी शुरुआती पढ़ाई जिला स्कूल रांची से पूरी की और फिर Ranchi University से ग्रेजुएशन के साथ पत्रकारिता की पढ़ाई की. पढ़ाई के दौरान ही साल 2011 में रांची में आयोजित नेशनल गेम को कवर करने का मौका मिला, जिसने पत्रकारिता के प्रति जुनून को और मजबूत किया.1 अप्रैल 2011 से प्रभात खबर से जुड़े और शुरुआत से ही डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय रहे. खबरों को आसान, रोचक और आम लोगों की भाषा में पेश करना इनकी खासियत है. डिजिटल के साथ-साथ प्रिंट के लिए भी कई अहम रिपोर्ट कीं. खासकर ‘पंचायतनामा’ के लिए गांवों में जाकर की गई ग्रामीण रिपोर्टिंग करियर का यादगार अनुभव है. प्रभात खबर से जुड़ने के बाद कई बड़े चुनाव कवर करने का अनुभव मिला. 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के साथ-साथ झारखंड विधानसभा चुनावों (2014, 2019 और 2024) की भी ग्राउंड रिपोर्टिंग की है. चुनावी माहौल, जनता के मुद्दे और राजनीतिक हलचल को करीब से समझना रिपोर्टिंग की खास पहचान रही है.

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