Katchatheevu Issue: '1974 के समझौते में कच्चातिवु श्रीलंका को दे दिया गया', बोले विदेश मंत्री जयशंकर

Published by : Amitabh Kumar Updated At : 01 Apr 2024 10:18 AM

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S Jaishankar

Katchatheevu Issue: कच्चातिवु मामले को लेकर केंद्र सरकार की ओर से विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने प्रेस कॉन्फ्रेंस किया और इशारों-इशारों में कांग्रेस पर हमला किया. जानें क्या कहा

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Katchatheevu Issue: कच्चातिवु को लेकर पीएम नरेंद्र मोदी ने रविवार को सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर कुछ ऐसी बात लिखी जिसके बाद से कांग्रेस हमलावर हो गई है. इस बीच विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने मामले को लेकर सोमवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस किया और कहा कि कच्चातिवु का मुद्दा अचानक सामने नहीं आया. यह एक जीवंत मुद्दा है. संसद में अक्सर इस पर बहस की जाती रही है. उन्होंने कहा कि कांग्रेस ओर द्रमुक (DMK) ने कच्चातिवु मुद्दे पर ऐसा रुख अपनाया है जैसे उनकी कोई जिम्मेदारी नहीं है.

आगे विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा कि साल 1974 में भारत और श्रीलंका ने एक समझौते पर साइन किया था. इस समझौते के तहत उन्होंने एक समुद्री सीमा खींची और समुद्री सीमा खींचने में कच्चातीवु को सीमा के श्रीलंकाई पक्ष पर रख दिया गया. उन्होंने कहा कि हम सभी जानते हैं कि यह किसने किया है… यह नहीं पता कि इसे किसने छुपाया…हमारा यह मानना है कि जनता को यह जानने का अधिकार है कि यह स्थिति कैसे पैदा हुई.

20 वर्षों में 6184 भारतीय मछुआरों को श्रीलंका ने लिया हिरासत

एस. जयशंकर ने कहा कि कच्चातिवु मुद्दे को लेकर केंद्र और तमिलनाडु के बीच अक्सर पत्राचार होता है. मेरी ओर से 21 बार मुख्यमंत्री को जवाब देने का काम किया गया. उन्होंने कहा कि पिछले 20 वर्षों में 6184 भारतीय मछुआरों को श्रीलंका द्वारा हिरासत में लिया गया है. यही नहीं, 1175 भारतीय मछली पकड़ने वाली नौकाओं को श्रीलंका द्वारा जब्त करने का काम किया गया. यही पृष्ठभूमि है जिस मुद्दे पर हम चर्चा कर रहे हैं. पिछले पांच वर्षों में कच्चातिवू मुद्दा और मछुआरे का मुद्दा संसद में विभिन्न पार्टियों ने बार-बार उठाया है.

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कांग्रेस पर जयशंकर ने किया हमला

कांग्रेस पर इशारों-इशारों में हमला करते हुए जयशंकर ने कहा कि तत्कालीन प्रधानमंत्रियों ने भारतीय क्षेत्र के प्रति उदासीनता दिखाने का काम किया था. उन्हें कोई परवाह ही नहीं थी. उन्होंने कहा कि द्रमुक ने कच्चातिवु को श्रीलंका को सौंपने पर सवाल उठाए हैं. उसकी ओर से दावा किया गया कि तमिलाडु सरकार से विचार-विमर्श नहीं किया गया जबकि सच्चाई यह है कि उसे इसकी पूरी जानकारी दी गयी थी.

समाधान तलाशने की जरूरत: जयशंकर

केंद्रीय मंत्री एस. जयशंकर ने कच्चातिवु मुद्दे को लेकर कांग्रेस और द्रमुक पर निशाना साधा और कहा कि अब हम न केवल यह जानते हैं कि इसे किसने किया बल्कि यह भी जानते हैं कि इसे किसने छिपाने का काम किया. उन्होंने कहा कि हमें एक समाधान तलाशने की जरूरत है. हमें श्रीलंकाई सरकार के साथ इस पर काम करना होगा.

पीएम मोदी ने कच्चातिवु मुद्दे पर द्रमुक पर साधा निशाना

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कच्चातिवु द्वीप मुद्दे को लेकर सोमवार को द्रमुक पर निशाना साधा. उन्होंने आरोप लगाया कि तमिलनाडु की सत्तारूढ़ पार्टी ने प्रदेश के हितों की रक्षा के लिए कुछ भी नहीं किया. पीएम मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म ‘एक्स’ पर लिखा कि भारत द्वारा कच्चातिवु द्वीप श्रीलंका को सौंपे जाने के मुद्दे पर नई जानकारी सामने आ रही है जिसने द्रमुक के दोहरे मानकों को पूरी तरह से बेनकाब कर दिया है.

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अमिताभ कुमार झारखंड की राजधानी रांची के रहने वाले हैं और पिछले कई वर्षों से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय हैं. डिजिटल न्यूज में अच्छी पकड़ है और तेजी के साथ सटीक व भरोसेमंद खबरें लिखने के लिए जाने जाते हैं. वर्तमान में अमिताभ प्रभात खबर डिजिटल में नेशनल और वर्ल्ड न्यूज पर फोकस करते हैं और तथ्यों पर आधारित खबरों को प्राथमिकता देते हैं. हरे-भरे झारखंड की मिट्टी से जुड़े अमिताभ ने अपनी शुरुआती पढ़ाई जिला स्कूल रांची से पूरी की और फिर Ranchi University से ग्रेजुएशन के साथ पत्रकारिता की पढ़ाई की. पढ़ाई के दौरान ही साल 2011 में रांची में आयोजित नेशनल गेम को कवर करने का मौका मिला, जिसने पत्रकारिता के प्रति जुनून को और मजबूत किया.1 अप्रैल 2011 से प्रभात खबर से जुड़े और शुरुआत से ही डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय रहे. खबरों को आसान, रोचक और आम लोगों की भाषा में पेश करना इनकी खासियत है. डिजिटल के साथ-साथ प्रिंट के लिए भी कई अहम रिपोर्ट कीं. खासकर ‘पंचायतनामा’ के लिए गांवों में जाकर की गई ग्रामीण रिपोर्टिंग करियर का यादगार अनुभव है. प्रभात खबर से जुड़ने के बाद कई बड़े चुनाव कवर करने का अनुभव मिला. 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के साथ-साथ झारखंड विधानसभा चुनावों (2014, 2019 और 2024) की भी ग्राउंड रिपोर्टिंग की है. चुनावी माहौल, जनता के मुद्दे और राजनीतिक हलचल को करीब से समझना रिपोर्टिंग की खास पहचान रही है.

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