राशन वितरण गड़बड़ी मामले में गिरफ्तार बंगाल के मंत्री ज्योतिप्रिय मल्लिक को कोर्ट ने ईडी की हिरासत में भेजा

Edited by Amitabh Kumar
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ED Raid in Bengal : केंद्रीय एजेंसी ईडी ने गुरुवार को मलिक के परिसरों पर तलाशी शुरू की थी. ईडी ने मध्य कोलकाता में आमहर्स्ट स्ट्रीट पर मंत्री के पैतृक आवास की भी तलाशी ली. कथित घोटाला सार्वजनिक वितरण प्रणाली और कोविड लॉकडाउन के दौरान खाद्यान्न वितरण में कथित अनियमितताओं से संबंधित है.

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प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने पश्चिम बंगाल में कई करोड़ रुपये के कथित राशन वितरण घोटाले से संबंधित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में गिरफ्तार राज्य के पूर्व खाद्य आपूर्ति मंत्री ज्योतिप्रिय मलिक को अदालत ने ईडी की हिरासत में भेज दिया है. पीएमएलए कोर्ट ने उन्हें 6 नवंबर तक ईडी की हिरासत में भेज दिया है. केंद्रीय एजेंसी ने कल उनके ठिकानों पर छापेमारी शुरू की थी. बाद में उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया. गिरफ्तारी के बाद मलिक को मेडिकल चेकअप के लिए ले जाया गया. फिर कोर्ट में पेश किया गया. कोर्ट ने उन्हें 6 नवंबर तक ईडी की हिरासत में भेज दिया. खाद्य आपूर्ति मंत्री की गिरफ्तारी पर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की प्रतिक्रिया आई है. पश्चिम बंगाल बीजेपी की महासचिव और विधायक अग्निमित्र पॉल ने कहा है कि यह तो होना ही था. इसका हम इंतजार कर रहे थे. बहुत बड़ा घोटाला हुआ है. उन्होंने कहा कि सीएम ममता बनर्जी को इसकी जिम्मेदारी लेने की जरूरत है. ज्योतिप्रिय मलिक से पूछताछ के पहले ममता बनर्जी से पूछताछ करने की जरूरत है क्योंकि वह मुख्यमंत्री हैं और उनके रहते ये सब हुआ. क्या प्रदेश की मुख्यमंत्री को इसके बारे में कुछ नहीं पता होगा? वह सीएम पद क्यों हैं?

अग्निमित्र पॉल ने कहा कि ममता बनर्जी को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देकर घर में बैठना चाहिए, लेकिन इससे पहले उनसे पूछताछ की जानी चाहिए. ईडी की ओर से जो जानकारी दी गई है उसके अनुसार, मंत्री ज्योतिप्रिय मलिक को 17-18 घंटे से अधिक की पूछताछ के बाद शुक्रवार को तड़के धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत गिरफ्तार किया गया. ईडी अधिकारियों ने बताया कि मलिक को तड़के साढ़े तीन बजे कोलकाता के बाहरी इलाके में स्थित सॉल्ट लेक में उनके आवास से यहां केंद्रीय एजेंसी के कार्यालय लाया गया. मलिक को एक स्थानीय अदालत में पेश किया जाएगा जहां ईडी उनकी हिरासत का अनुरोध करेगा.

ज्योतिप्रिय मलिक हैं शुगर पेशेंट

मंत्री ज्योतिप्रिय मलिक के बारे में जो बात सामने आई है उसके अनुसार वे शुगर पेशेंट हैं. उन्हें कई अन्य बीमारियां भी हैं. उन्हें कोलकाता के दक्षिणी भाग में जोका के एक ईएसआई अस्पताल ले जाया गया जहां उनका डॉक्टरों ने चेकअप किया. ईडी के एक अधिकारी ने मामले के संबंध में बताया कि राज्य के मंत्री की जांच की जा रही है. यह नियमित जांच है. हम उन्हें स्थानीय अदालत में पेश करेंगे. अदालत से हम उनकी हिरासत का अनुरोध करेंगे.

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बहुत बड़ी साजिश का शिकार हुआ हूं: मलिक

इस बीच कथित राशन वितरण घोटाला से संबंधित मामले में ईडी द्वारा गिरफ्तार किए जाने के बाद तृणमूल कांग्रेस के मंत्री ने कहा कि मैं बहुत बड़ी साजिश का शिकार हुआ हूं. मलिक ने यह भी आरोप लगाया कि यह साजिश बीजेपी और उसके नेता शुभेंदु अधिकारी ने रची है जो पहले टीएमसी में पूर्व सहयोगी थे. मलिक ने कहा कि यह एक साजिश है. बीजेपी हम सब के खिलाफ नापाक साजिशें रचने में सक्रियता से शामिल रही है. मलिक वर्तमान में राज्य के वन मंत्री हैं और इससे पहले वह खाद्य एवं आपूर्ति विभाग का जिम्मा संभाल रहे थे.

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आमने-सामने बैठाकर हो सकती है पूछताछ

आपको बता दें कि ईडी ने इससे पहले मंत्री बकिबुर रहमान के एक विश्वासपात्र को गिरफ्तार किया था जिसकी रिमांड इस सप्ताह खत्म होने वाली है. सूत्रों की मानें तो केंद्रीय एजेंसी मामले में घटनाक्रमों के बारे में दोनों का बयान जानने के लिए उन्हें आमने-सामने बैठाकर पूछताछ कर सकती है. भ्रष्टाचार के मामलों के संबंध में केंद्रीय एजेंसी द्वारा टीएमसी के एक कैबिनेट मंत्री को पकड़े जाने के बाद मलिक की गिरफ्तारी इस तरह की दूसरी घटना है. पिछले साल राज्य के पूर्व मंत्री पार्थ चटर्जी को ईडी ने स्कूल भर्ती घोटाला से संबंधित मामले में गिरफ्तार किया था.

भाषा इनपुट के साथ

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Amitabh Kumar

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By Amitabh Kumar

अमिताभ कुमार झारखंड की राजधानी रांची के रहने वाले हैं और पिछले कई वर्षों से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय हैं. डिजिटल न्यूज में अच्छी पकड़ है और तेजी के साथ सटीक व भरोसेमंद खबरें लिखने के लिए जाने जाते हैं. वर्तमान में अमिताभ प्रभात खबर डिजिटल में नेशनल और वर्ल्ड न्यूज पर फोकस करते हैं और तथ्यों पर आधारित खबरों को प्राथमिकता देते हैं. हरे-भरे झारखंड की मिट्टी से जुड़े अमिताभ ने अपनी शुरुआती पढ़ाई जिला स्कूल रांची से पूरी की और फिर Ranchi University से ग्रेजुएशन के साथ पत्रकारिता की पढ़ाई की. पढ़ाई के दौरान ही साल 2011 में रांची में आयोजित नेशनल गेम को कवर करने का मौका मिला, जिसने पत्रकारिता के प्रति जुनून को और मजबूत किया.1 अप्रैल 2011 से प्रभात खबर से जुड़े और शुरुआत से ही डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय रहे. खबरों को आसान, रोचक और आम लोगों की भाषा में पेश करना इनकी खासियत है. डिजिटल के साथ-साथ प्रिंट के लिए भी कई अहम रिपोर्ट कीं. खासकर ‘पंचायतनामा’ के लिए गांवों में जाकर की गई ग्रामीण रिपोर्टिंग करियर का यादगार अनुभव है. प्रभात खबर से जुड़ने के बाद कई बड़े चुनाव कवर करने का अनुभव मिला. 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के साथ-साथ झारखंड विधानसभा चुनावों (2014, 2019 और 2024) की भी ग्राउंड रिपोर्टिंग की है. चुनावी माहौल, जनता के मुद्दे और राजनीतिक हलचल को करीब से समझना रिपोर्टिंग की खास पहचान रही है.

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