JNU Clash : छात्राओं के बाल खींचे, उनके साथ मारपीट की, एसएफआई ने पुलिस पर लगाये आरोप
Published by : Amitabh Kumar Updated At : 19 Oct 2025 9:05 AM
जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के छात्र प्रदर्शन करते (Photo: ANI)
JNU Clash : वामपंथी समूह द्वारा जारी पोस्टर में वसंत कुंज पुलिस थाने तक मार्च करने की अपील की गई थी. पोस्टर में पूछा गया कि वामपंथी छात्रों पर हमला करने वाले एबीवीपी के सदस्यों के खिलाफ अब तक एफआईआर क्यों दर्ज नहीं की गई है.
JNU Clash : जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) के कम से कम 28 छात्रों को वसंत कुंज थाने की ओर निकाले गए विरोध मार्च के दौरान हिरासत में लिया गया. छात्रों और पुलिस के बीच झड़प में छह पुलिसकर्मी घायल हो गए. यह मार्च जेएनयू छात्र संघ के वामपंथी सदस्यों ने निकाला था, जिन्होंने पुलिस पर छात्र संघ अध्यक्ष नीतीश कुमार की शिकायत पर कार्रवाई न करने का आरोप लगाया. कुमार ने आरोप लगाया कि आगामी छात्र संघ चुनावों के लिए चुनाव समिति सदस्य के चयन की विश्वविद्यालय बैठक के बाद, एबीवीपी के सदस्यों ने उन पर हमला किया. यही नहीं उन्हें बंधक बनाया और जातिसूचक टिप्पणियां कीं.
#WATCH | JNUSU president Nitish Kumar says, "…When GBM (General Body Meeting) began over JNUSU elections, counsellor Rajat was beaten up by ABVP goons. We resisted to ensure that things go on peacefully. But it didn't happen, and we adjourned the meeting at 6 am. As soon as we… https://t.co/PLEcQM0LV6 pic.twitter.com/yvPIqqPWkA
— ANI (@ANI) October 18, 2025
जेएनयू छात्र संघ (JNUSU) के अध्यक्ष नीतीश कुमार ने बताया कि उन्होंने दिल्ली पुलिस को बुलाया, लेकिन एसएचओ बलबीर सिंह वहां पहुंचने के बावजूद हस्तक्षेप नहीं किया. छात्रों को पीटा गया, कुर्ता फट गया. इसके बावजूद वे खुद को संभालते हुए बाहर आए. पुलिस शिकायत दर्ज कराई, लेकिन एफआईआर नहीं हुई. इसलिए वे एफआईआर दर्ज करने की मांग लेकर वसंत कुंज पुलिस स्टेशन की ओर मार्च कर रहे थे, लेकिन पुलिस ने बैरिकेड लगा कर रोक दिया और छात्रों पर हमला किया.
वामपंथी ग्रुप ने पुलिस बर्बरता का आरोप लगाया
जेएनयू में वामपंथी छात्र संगठनों ने एबीवीपी के खिलाफ हिंसा के मामले में एफआईआर दर्ज करने की मांग को लेकर शनिवार शाम विरोध प्रदर्शन किया. इस दौरान माहौल तनावपूर्ण हो गया. संगठनों ने आरोप लगाया कि पुलिस ने छात्रों पर बर्बर कार्रवाई की, जबकि पुलिस का कहना है कि प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड तोड़ दिए और पुलिसकर्मियों को घायल कर दिया.
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छात्राओं के बाल खींचे और उनके साथ मारपीट की : एसएफआई का आरोप
वामपंथी छात्र संगठन ‘ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन’ (आइसा) ने कहा कि जेएनयूएसयू अध्यक्ष नीतीश कुमार और कई छात्रों को जेएनयू के पश्चिमी गेट पर पुलिस ने बेरहमी से पीटा और हिरासत में लिया, जब वे वसंत कुंज पुलिस थाने तक मार्च करने की कोशिश कर रहे थे. आइसा ने बयान में कहा कि स्कूल जीबीएम में एबीवीपी की हिंसा के खिलाफ एफआईआर की मांग करते समय पुलिस ने छात्रों पर बर्बरता की. इसके अलावा, ‘स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया’ (एसएफआई) ने आरोप लगाया कि पुलिस ने छात्राओं के बाल खींचे और उनके साथ मारपीट की. छात्रों का कहना है कि यह अत्यंत हिंसक और अनुचित व्यवहार था.
कुल 28 छात्रों को हिरासत में लिया गया
पुलिस उपायुक्त (दक्षिण-पश्चिम) अमित गोयल ने आरोपों से इनकार किया है. उन्होंने कहा कि महिलाओं समेत लगभग 70-80 छात्र शाम छह बजे जेएनयू पश्चिमी गेट पर एकत्र हुए. उन्होंने पुलिस बैरिकेड तोड़ दिए, पुलिसकर्मियों के साथ मारपीट की और नेल्सन मंडेला मार्ग पर ट्रैफिक बाधित किया.’’ गोयल ने कहा, ‘‘किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए जेएनयूएसयू पदाधिकारियों समेत कुल 28 छात्रों को हिरासत में लिया गया.’’
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By Amitabh Kumar
अमिताभ कुमार झारखंड की राजधानी रांची के रहने वाले हैं और पिछले कई वर्षों से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय हैं. डिजिटल न्यूज में अच्छी पकड़ है और तेजी के साथ सटीक व भरोसेमंद खबरें लिखने के लिए जाने जाते हैं. वर्तमान में अमिताभ प्रभात खबर डिजिटल में नेशनल और वर्ल्ड न्यूज पर फोकस करते हैं और तथ्यों पर आधारित खबरों को प्राथमिकता देते हैं. हरे-भरे झारखंड की मिट्टी से जुड़े अमिताभ ने अपनी शुरुआती पढ़ाई जिला स्कूल रांची से पूरी की और फिर Ranchi University से ग्रेजुएशन के साथ पत्रकारिता की पढ़ाई की. पढ़ाई के दौरान ही साल 2011 में रांची में आयोजित नेशनल गेम को कवर करने का मौका मिला, जिसने पत्रकारिता के प्रति जुनून को और मजबूत किया.1 अप्रैल 2011 से प्रभात खबर से जुड़े और शुरुआत से ही डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय रहे. खबरों को आसान, रोचक और आम लोगों की भाषा में पेश करना इनकी खासियत है. डिजिटल के साथ-साथ प्रिंट के लिए भी कई अहम रिपोर्ट कीं. खासकर ‘पंचायतनामा’ के लिए गांवों में जाकर की गई ग्रामीण रिपोर्टिंग करियर का यादगार अनुभव है. प्रभात खबर से जुड़ने के बाद कई बड़े चुनाव कवर करने का अनुभव मिला. 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के साथ-साथ झारखंड विधानसभा चुनावों (2014, 2019 और 2024) की भी ग्राउंड रिपोर्टिंग की है. चुनावी माहौल, जनता के मुद्दे और राजनीतिक हलचल को करीब से समझना रिपोर्टिंग की खास पहचान रही है.
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