भारतीय नौसेना अफसरों को कतर में सुनायी गई मौत की सजा, एक्शन में मोदी सरकार, कांग्रेस ने कही ये बात
कांग्रेस सांसद शशि थरूर
सभी आठ भारतीय नागरिक अल दाहरा कंपनी के कर्मचारी हैं, जिन्हें पिछले साल कथित रूप से जासूसी के आरोप में हिरासत में लेने का काम किया गया था. जानें आठ भारतीय नौसेना अफसरों को मौत की सजा सुनाए जानें पर क्या बोली मोदी सरकार
भारतीय नौसेना के आठ पूर्व अधिकारियों को कतर की अदालत की ओर से गुरुवार को मौत की सजा सुनायी गयी जिसपर भारत ने विरोध जताया. मामले पर कांग्रेस सांसद शशि थरूर की प्रतिक्रिया आई है. उन्होंने कहा है कि कतर अधिकारियों द्वारा नौसेना में शामिल आठ भारतीयों को दी गई मौत की सजा चौंकाने वाली है. थरूर ने विदेश मंत्रालय और पीएम मोदी पर भरोसा जताया है और उम्मीद व्यक्त की कि आठ भारतीयों के वतन वापसी के लिए भारतीय सरकार कतर सरकार के साथ बात करेगी और इसका सकारात्मक परिणाम आएगा. कांग्रेस सांसद ने कहा कि पूरा मामला रहस्य से भरा हुआ है.
अल दाहरा कंपनी के कर्मचारी हैं सभी
बताया जा रहा है कि सभी आठ भारतीय नागरिक अल दाहरा कंपनी के कर्मचारी हैं, जिन्हें पिछले साल कथित रूप से जासूसी के आरोप में हिरासत में लेने का काम किया गया था. हालांकि कतर सरकार ने इन आठ भारतीयों पर लगे आरोपों को सार्वजनिक नहीं किया है. भारत ने इस फैसले का कड़ा विरोध किया है. भारत की ओर से कहा गया है कि वह इस फैसले से बेहद स्तब्ध है और इस मामले में सभी कानूनी विकल्पों पर विचार कर रहा है. विदेश मंत्रालय ने कहा कि हम फैसले के विस्तृत ब्योरे की प्रतीक्षा कर रहे हैं.
पिछले साल अगस्त में हुए थे गिरफ्तार
इन पूर्व नौसैनिकों को कतर की खुफिया एजेंसी के स्टेट सिक्योरिटी ब्यूरो ने पिछले साल 30 अगस्त को पकड़ा था. हालांकि, कतर सरकार ने इनकी गिरफ्तारी की सूचना भारतीय दूतावास को सितंबर के मध्य में दी. एक महीने तक परिवार के सदस्यों को भी इनकी गिरफ्तारी की जानकारी नहीं थी. 30 सितंबर को इन भारतीयों को अपने परिवार के सदस्यों के साथ थोड़ी देर के लिए टेलीफोन पर बात करने की इजाजत दी गयी थी. इन्हें पहली बार काउंसेलर एक्सेस तीन अक्तूबर को मिला और भारतीय दूतावास के अधिकारी को इनसे मिलने दिया गया. इसके बाद इन्हें हर हफ्ते परिवार के सदस्यों को फोन करने की अनुमति दी गयी.
Shocked to learn that #Qatar has passed a death sentence on eight former @IndianNavy officers. The details of the entire case are shrouded in mystery & opacity. Trust @MEAIndia & @PMOIndia will act immediately with the highest levels of the Qatar government to support an appeal…
— Shashi Tharoor (@ShashiTharoor) October 27, 2023
इन्हें मौत की सजा
कैप्टन नवतेज सिंह गिल, कैप्टन सौरभ वशिष्ठ, कैप्टन बीरेंद्र कुमार वर्मा, कमांडर अमित नागपाल, कमांडर पूर्णेंदु तिवारी, कमांडर संजीव गुप्ता, कमांडर सुग्नाकर पकाला और सेलर रागेश.
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इनमें से एक को मिल चुका है प्रवासी भारतीय सम्मान
इन आठ लोगों में रिटायर्ड कमांडर पूर्णेंदु तिवारी भी शामिल हैं, जिन्हें भारत और कतर के बीच द्विपक्षीय संबंधों को आगे बढ़ाने के लिए वर्ष 2019 में प्रवासी भारतीय सम्मान पुरस्कार मिला था. वह यह पुरस्कार पानेवाले सशस्त्र बल के इकलौते व्यक्ति हैं. वह भारतीय नौसेना में कई बड़े जहाजों की कमान संभाल चुके हैं.
कतर के नौसैनिकों को ट्रेनिंग देनेवाली कंपनी के लिए काम करते थे
ये पूर्व नौसैनिक कतर में अल दाहरा ग्लोबल टेक्नोलॉजीज एंड कंसल्टेंसी नामक निजी कंपनी में काम करते थे. इस कंपनी की बात करें तो यह रक्षा सेवा प्रदाता कंपनी है, जो कतर नौसेना को प्रशिक्षण और दूसरी सेवाएं प्रदान करती है. इसके मुख्य संचालक ओमान एयरफोर्स के पूर्व स्क्वाड्रन लीडर खमिस अल अजमी हैं. उन्हें भी इन भारतीय अधिकारियों के साथ गिरफ्तार किया गया था, लेकिन नवंबर में उन्हें छोड़ दिया गया.
भारत ने कहा-हम कानून विशेषज्ञों के संपर्क में
भारत की ओर से कहा गया है कि हम परिवार के सदस्यों और कानूनी दल के संपर्क में हैं. उन्हें छुड़ाने के लिए हम कानूनी रास्ते की तलाश कर रहे हैं. मंत्रालय ने कहा कि मामले में कार्यवाही की गोपनीय प्रकृति के कारण फिलहाल कोई और टिप्पणी करना उचित नहीं होगा. हम फैसले को कतर के अधिकारियों के समक्ष उठाने का काम करेंगे.
भाषा इनपुट के साथ
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By Amitabh Kumar
अमिताभ कुमार झारखंड की राजधानी रांची के रहने वाले हैं और पिछले कई वर्षों से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय हैं. डिजिटल न्यूज में अच्छी पकड़ है और तेजी के साथ सटीक व भरोसेमंद खबरें लिखने के लिए जाने जाते हैं. वर्तमान में अमिताभ प्रभात खबर डिजिटल में नेशनल और वर्ल्ड न्यूज पर फोकस करते हैं और तथ्यों पर आधारित खबरों को प्राथमिकता देते हैं. हरे-भरे झारखंड की मिट्टी से जुड़े अमिताभ ने अपनी शुरुआती पढ़ाई जिला स्कूल रांची से पूरी की और फिर Ranchi University से ग्रेजुएशन के साथ पत्रकारिता की पढ़ाई की. पढ़ाई के दौरान ही साल 2011 में रांची में आयोजित नेशनल गेम को कवर करने का मौका मिला, जिसने पत्रकारिता के प्रति जुनून को और मजबूत किया.1 अप्रैल 2011 से प्रभात खबर से जुड़े और शुरुआत से ही डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय रहे. खबरों को आसान, रोचक और आम लोगों की भाषा में पेश करना इनकी खासियत है. डिजिटल के साथ-साथ प्रिंट के लिए भी कई अहम रिपोर्ट कीं. खासकर ‘पंचायतनामा’ के लिए गांवों में जाकर की गई ग्रामीण रिपोर्टिंग करियर का यादगार अनुभव है. प्रभात खबर से जुड़ने के बाद कई बड़े चुनाव कवर करने का अनुभव मिला. 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के साथ-साथ झारखंड विधानसभा चुनावों (2014, 2019 और 2024) की भी ग्राउंड रिपोर्टिंग की है. चुनावी माहौल, जनता के मुद्दे और राजनीतिक हलचल को करीब से समझना रिपोर्टिंग की खास पहचान रही है.
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