IMD: अब देश के 87 फीसदी हिस्से में मौसम विभाग सटीक अनुमान लगाने में सक्षम

Published by :Anjani Kumar Singh
Published at :29 Apr 2026 8:13 PM (IST)
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IMD: अब देश के 87 फीसदी हिस्से में मौसम विभाग सटीक अनुमान लगाने में सक्षम

पिछले एक दशक में भारत की मौसम संबंधी नेटवर्क में व्यापक बदलाव आया है. आधुनिक प्रणाली के उपयोग से पूर्वानुमान अधिक विश्वसनीय और सटीक हुआ है. पूर्वानुमानों का उपयोग किसानों से लेकर पायलट और कई लोगों और संस्था लिए उपयोगी साबित हो रहा है.

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IMD: बदलते मौसम के कारण प्राकृतिक आपदाओं में लगातार वृद्धि हो रही है. हीटवेव, बाढ़ के कारण हर साल व्यापक पैमाने पर आर्थिक नुकसान होता है. साथ ही इससे कृषि पर भी प्रतिकूल असर पड़ रहा है. ऐसे में अगर मौसम का सटीक अनुमान होने से आपदाओं से निपटने से मदद मिलती है. अच्छी बात है कि भारत मौसम का आकलन करने के लिए डॉप्लर मौसम रडार नेटवर्क का लगातार विस्तार किया है. वर्ष 2014 के बाद से डॉप्टर मौसम रडार नेटवर्क 14 से बढ़कर 50 हो गया है. इस दौरान डॉप्लर रडार नेटवर्क में 250 फीसदी की वृद्धि हुई है और इससे देश का 87 फीसदी क्षेत्र कवर हो रहा है.

इस नेटवर्क के विस्तार से मौसम विभाग द्वारा चक्रवात, भारी बारिश और आंधी-तूफान के पूर्वानुमान में काफी सुधार हुआ है. मिशन मौसम के तहत ऐसे 50 और रडार स्थापित करने की योजना है. इसके अलावा ‘नाउकास्ट’ सेवा से अगले तीन घंटों के लिए बेहद स्थानीय और सटीक पूर्वानुमान का आकलन किया जा रहा है. वास्तविक समय में आकलन से आपदा प्रबंधन, शहरी नियोजन और रोजमर्रा के फैसले लेने में मदद मिल रही है. भारत की पूर्वानुमान क्षमता अब बारिश की तीव्रता, वर्षा के प्रकार, ओलावृष्टि की संभावना और यहां तक कि बारिश की बूंदों के आकार के बारे में भी विस्तृत जानकारी प्रदान कर रही है. 

कैसे काम करता है डॉप्लर रडार तकनीक

देश की मौसम निगरानी प्रणाली को मजबूत बनाने में डॉप्लर मौसम रडार तकनीक का अहम रोल है. यह रडार मौसम प्रणालियों की गति और वेग को ट्रैक करने के लिए ‘डॉप्लर’ प्रभाव का उपयोग करते हैं, जिससे सटीक और समय पर पूर्वानुमान लगाना संभव हो पाता है. मौसम विभाग द्वारा तैनात आधुनिक रडार दोहरी-ध्रुवीकरण तकनीक से लैस है. यह तकनीक वर्षा, ओले और फुहार जैसी वर्षा के प्रकारों की सटीक पहचान करने, वर्षा का बेहतर अनुमान लगाने और  मौसम की गंभीर घटनाओं का बेहतर पता लगाने में मदद करती है. इससे विमानन सुरक्षा, कृषि नियोजन और आपदा जोखिम को कम करने में मदद मिलती है. बुधवार को मौसम विज्ञान मुख्यालय में ‘मौसम राडार’ को दर्शाने वाले एक सेल्फी पॉइंट का उद्घाटन करने के बाद केंद्रीय पृथ्वी विज्ञान मंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में मौसम पूर्वानुमान अधिक सटीक हुआ है और इससे लोगों का विश्वास बढ़ा है. 

पिछले एक दशक में भारत की मौसम संबंधी नेटवर्क में व्यापक बदलाव आया है. आधुनिक प्रणाली के उपयोग से पूर्वानुमान अधिक विश्वसनीय और सटीक हुआ है. पूर्वानुमानों का उपयोग किसानों से लेकर पायलट और कई लोगों और संस्था लिए उपयोगी साबित हो रहा है. अब लोग घर से बाहर निकलने से पहले अपने मोबाइल फोन पर मौसम की जानकारी देखते हैं. इस दौरान मंत्रालय के सचिव डॉक्टर एम रविचंद्रन,  भारत मौसम विज्ञान विभाग के महानिदेशक मृत्युंजय महापात्र और अन्य वरिष्ठ अधिकारी और वैज्ञानिक भी मौजूद रहे. 

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