राहुल गांधी का नरवणे के अप्रकाशित ‘संस्मरण’ का उल्लेख करना कितना सही? जानें क्या बोले विशेषज्ञ
Published by : Amitabh Kumar Updated At : 03 Feb 2026 1:40 PM
लोकसभा में राहुल गांधी (Photo: PTI)
Rahul Gandhi : लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने सोमवार को सदन में एक पूर्व सेना प्रमुख की किताब के मसौदे का हवाला दिया. उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह पर निशाना साधते हुए कहा कि सरकार इस किताब के खुलासों से डर रही है. जानें मामले पर क्या है विशेषज्ञ की राय.
Rahul Gandhi : लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी द्वारा संसद में पूर्व सेना प्रमुख एम. एम. नरवणे के अप्रकाशित ‘संस्मरण’ से उद्धरण देने से जुड़े विवाद के बीच संसदीय प्रक्रियाओं के एक विशेषज्ञ ने मंगलवार को कहा कि नियम 349 सदस्यों को सदन के कामकाज से संबंधित मामलों के अलावा किसी भी किताब, अखबार या पत्र को पढ़ने से रोकता है. हालांकि, इस नियम में यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि वह दस्तावेज प्रकाशित है या अप्रकाशित.
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और अध्यक्ष ओम बिरला के बीच उस वक्त गतिरोध की स्थिति देखने को मिली, जब अध्यक्ष ने कांग्रेस नेता को पूर्व सेना प्रमुख के अप्रकाशित संस्मरण से उद्धरण देने की अनुमति नहीं दी और सदन के नियम का हवाला दिया. नरवणे के इस संस्मरण में भारत और चीन के बीच सैन्य तनाव से जुड़े प्रकरण का उल्लेख है.
लोकसभा अध्यक्ष ने नियम 349 का दिया हवाला
लोकसभा अध्यक्ष बिरला ने नियम 349 का हवाला देते हुए राहुल गांधी को इस पुस्तक के कुछ अंश उद्धृत करने से रोका. लोकसभा के पूर्व महासचिव पी. डी. आचारी ने न्यूज एजेंसी पीटीआई से कहा कि यदि दस्तावेज सदन के कामकाज से जुड़ा हो, तो कोई सदस्य इनसे संदर्भ दे सकता है. उन्होंने कहा कि नियम “नकारात्मक भाषा” में लिखा गया है, लेकिन उसका “सकारात्मक अर्थ” भी है, जो सदस्यों को सदन के काम से संबंधित दस्तावेज़ों से उद्धरण देने की अनुमति भी देता है. उनका कहना है कि सोमवार को सदन के समक्ष राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा हो रही थी, जिसमें विदेश नीति या अंतरराष्ट्रीय संबंधों का संदर्भ हो सकता था.
दस्तावेज को प्रमाणित करना होगा
आचारी ने इस बात को रेखांकित किया कि भले ही यह नियम में स्पष्ट न हो, लेकिन अतीत में अध्यक्षों ने यह व्यवस्था दी है कि जो सदस्य सदन में कुछ उद्धृत करना चाहता है, उन्हें उस दस्तावेज को प्रमाणित करना होगा. उन्होंने कहा कि सदस्य को यह कहना होगा कि वह उस पर कायम है और उद्धृत दस्तावेज की सामग्री को सत्यापित करता है. आचारी के अनुसार, एक बार दस्तावेज प्रमाणित हो जाने पर अध्यक्ष सदस्य को उसे उद्धृत करने की अनुमति देते हैं. उसके बाद सरकार की ज़िम्मेदारी होती है कि वह उसका जवाब दे और अध्यक्ष की भूमिका समाप्त हो जाती है. उन्होंने यह भी कहा कि सदन को केवल सच ही बताया जाना चाहिए और जो सदस्य किसी गलत या फर्जी दस्तावेज से उद्धरण देता है, उसकी जिम्मेदारी उसी की होती है.
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संविधान विशेषज्ञ ने कहा कि ऐसी स्थिति में संबंधित सदस्य के खिलाफ विशेषाधिकार प्रस्ताव लाया जा सकता है. राहुल गांधी ने जब अप्रकाशित किताब से उद्धरण देना शुरू किया, तो रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सवाल उठाया कि जो सामग्री प्रकाशित ही नहीं हुई है, उसे सदन में कैसे उद्धृत किया जा सकता है.
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By Amitabh Kumar
अमिताभ कुमार झारखंड की राजधानी रांची के रहने वाले हैं और पिछले कई वर्षों से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय हैं. डिजिटल न्यूज में अच्छी पकड़ है और तेजी के साथ सटीक व भरोसेमंद खबरें लिखने के लिए जाने जाते हैं. वर्तमान में अमिताभ प्रभात खबर डिजिटल में नेशनल और वर्ल्ड न्यूज पर फोकस करते हैं और तथ्यों पर आधारित खबरों को प्राथमिकता देते हैं. हरे-भरे झारखंड की मिट्टी से जुड़े अमिताभ ने अपनी शुरुआती पढ़ाई जिला स्कूल रांची से पूरी की और फिर Ranchi University से ग्रेजुएशन के साथ पत्रकारिता की पढ़ाई की. पढ़ाई के दौरान ही साल 2011 में रांची में आयोजित नेशनल गेम को कवर करने का मौका मिला, जिसने पत्रकारिता के प्रति जुनून को और मजबूत किया.1 अप्रैल 2011 से प्रभात खबर से जुड़े और शुरुआत से ही डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय रहे. खबरों को आसान, रोचक और आम लोगों की भाषा में पेश करना इनकी खासियत है. डिजिटल के साथ-साथ प्रिंट के लिए भी कई अहम रिपोर्ट कीं. खासकर ‘पंचायतनामा’ के लिए गांवों में जाकर की गई ग्रामीण रिपोर्टिंग करियर का यादगार अनुभव है. प्रभात खबर से जुड़ने के बाद कई बड़े चुनाव कवर करने का अनुभव मिला. 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के साथ-साथ झारखंड विधानसभा चुनावों (2014, 2019 और 2024) की भी ग्राउंड रिपोर्टिंग की है. चुनावी माहौल, जनता के मुद्दे और राजनीतिक हलचल को करीब से समझना रिपोर्टिंग की खास पहचान रही है.
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