जम्मू कश्मीर में अब पंचायती राज कानून भी लागू, क्या है खास, क्या बदलेगा ?

Updated at : 21 Oct 2020 4:46 PM (IST)
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जम्मू कश्मीर में अब पंचायती राज कानून भी लागू, क्या है खास, क्या बदलेगा ?

जम्मू कश्मीर में अनुच्छेद 370 के हटाये जाने के बाद केंद्र सरकार ने एक और अहम फैसला लिया है. केंद्रीय मंत्रीमंडल ने बुधवार को जम्मू कश्मीर में पंचायती राज अधिनियम 1989 को लागू कर दिया गया .

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जम्मू कश्मीर में अनुच्छेद 370 के हटाये जाने के बाद केंद्र सरकार ने एक और अहम फैसला लिया है. केंद्रीय मंत्रीमंडल ने बुधवार को जम्मू कश्मीर में पंचायती राज अधिनियम 1989 को लागू कर दिया गया . इस संबंध में जानकारी देते हुए सूचना और प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा, इससे देश के अन्य हिस्सों की तरह जम्मू-कश्मीर में भी जमीनी स्तर पर लोकतंत्र के तीनों स्तरों को स्थापित करने में मदद मिलेगी.


क्या बदलेगा

जम्मू कश्मीर के केंद्र शासित प्रदेश होने के बाद कई जनसरोकारी योजनाएं लागू हो सकेंगे. त्रिस्तरीय पंचायत समिति का जो कानून पूरे देश मे है, वह जम्मू कश्मीर में भी लागू हो गया. इस फैसले से जम्मू कश्मीर में क्या बदलेगा इसका जिक्र करते हुए जावड़ेकर ने कहा, इससे लोकतांत्रिक प्रक्रिया मजबूत होगी. लोगों के हाथ में सत्ता आएगी. यह बड़ा बदलाव है.

इस निर्णय पर मुहर लगने के बाद अब जिला विकास परिषद के सीधे चुनाव होकर जनप्रतिनिधी चुने जायेंगे. ग्राम पंचायत, ब्लॉक पंचायत और अब जिला पंचायत विकास के लिए बेहतर काम करेगी त्रिस्तरीय रचनाएं से विकास में मदद मिलती है.

क्या है, कैसे होगा

इसके तहत जिला विकास परिषद (डीडीसी) का गठन किया जाता है. इसके लिए जिले को 14 क्षेत्रीय निर्वाचन क्षेत्रों में बांटा जायेगा. चुनाव होगा और सभी चुने हुए विजेता मिलकर अपना प्रतिनिधित्व करने वाला का चयन करेंगे जो उनमें से अध्यक्ष और उपाध्यक्ष चुना जायेगा.

वही डीडीसी जिला विकास बोर्ड (डीडीबी) की जगह लेगा. जम्मू कश्मीर में जब अनुच्छेद 370 लागू था और जबतक यह एक राज्य था यही काम कैबिनेट मंत्री या राज्य मंत्री किया करते थे इसके साथ ही इसमें विधायक, एमएलसी और संसद सदस्य भी शामिल रहते थे. राज्य को दी जाने वाली सभी फंडिंग औऱ योजनाओं की इजाजत यहीं से मिलती थी.

आरक्षण की भी व्यस्था है कानून में

पंचायती राज अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार इसमें आरक्षण की भी व्यवस्था है, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और महिलाओं के लिए इसमें आरक्षण होगा. डीडीसी पांच साल की समय अवधि के लिए चुना जाता है. प्रत्येक डीडीसी पर पांच स्थायी समितियों का गठन किया जाता है. इन पांचों को वित्त, विकास, सार्वजनिक कार्य, स्वास्थ्य और शिक्षा एवं कल्याण में बांटा गया है.

Posted By – Pankaj Kumar Pathak

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