FCRA बिल को JPC के पास भेजने की तैयारी, अल्पसंख्यक और ईसाई संगठनों में बढ़ी बेचैनी

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संसद सत्र में शामिल सांसद, फोटो पीटीआई

'विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026' (FCRA Amendment Bill) पर विपक्ष और धार्मिक अल्पसंख्यक समूहों की चिंताओं को देखते हुए केंद्र सरकार इसे समीक्षा के लिए संसद की संयुक्त समिति (JPC) के पास भेज सकती है.

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मानसून सत्र के दौरान इस विधेयक को 12 अगस्त को लोकसभा में चर्चा और पारित कराने के लिए सूचीबद्ध किए जाने की संभावना थी. एएनआई की रिपोर्ट के अनुसार राजनीतिक दलों और ईसाई संगठनों द्वारा उठाए गए मुद्दों के बाद सरकार अब इसे जेपीसी को सौंपने पर विचार कर रही है. यह मूल विधेयक 25 मार्च 2026 को लोकसभा में पेश किया गया था, जो भारत में व्यक्तियों, संघों और कंपनियों द्वारा विदेशी योगदान की प्राप्ति और उपयोग को विनियमित करता है.

क्या हैं विधेयक के प्रमुख प्रावधान?

  • विदेशी फंड और संपत्ति की देखरेख: अगर किसी एनजीओ (NGO) या संस्था का विदेशी फंड लेने का लाइसेंस (FCRA रजिस्ट्रेशन) रद्द या खत्म हो जाता है, तो उसका बचा हुआ विदेशी पैसा और उससे खरीदी गई संपत्तियां फिलहाल एक सरकारी अधिकारी (नामित प्राधिकरण) के पास जमा करा दी जाएंगी.
  • संपत्ति का फैसला (वापसी या जब्ती): अगर संस्था तय समय के अंदर अपना लाइसेंस दोबारा चालू करा लेती है, तो उसकी संपत्ति और पैसा उसे वापस मिल जाएगा. लेकिन अगर समय पर लाइसेंस रिन्यू नहीं हुआ, तो वह पूरी संपत्ति हमेशा के लिए सरकार के पास चली जाएगी.
  • धार्मिक स्थलों की सुरक्षा और कोर्ट जाने का हक: अगर जब्त की गई संपत्ति में कोई मंदिर, मस्जिद या पूजा-पाठ का स्थान शामिल है, तो उसका धार्मिक स्वरूप बदला नहीं जाएगा. इसके अलावा, अगर संस्था सरकारी फैसले से असहमत है, तो वह अदालत में अपील कर सकती है.
  • कम सजा और केंद्र की मंजूरी: नियम तोड़ने पर मिलने वाली अधिकतम जेल की सजा 5 साल से घटाकर 1 साल कर दी गई है. साथ ही, अब राज्य की कोई भी पुलिस या जांच एजेंसी केंद्र सरकार की पूर्व इजाजत के बिना इस कानून के तहत जांच शुरू नहीं कर सकती.

गृह मंत्री अमित शाह से मिले प्रतिनिधिमंडल

विधेयक के प्रावधानों को लेकर ईसाई और अल्पसंख्यक संगठनों के प्रतिनिधिमंडल ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की थी. मिजोरम के मुख्यमंत्री लालदुहोमा ने भी एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल (जिसमें 'काउंसिल ऑफ चर्चेस इन मिजोरम' के प्रतिनिधि शामिल थे) के साथ गृह मंत्री से मुलाकात कर क्षेत्रीय और धार्मिक चिंताएं रखीं. प्रतिनिधिमंडल की मांग है कि विधेयक को या तो वापस लिया जाए या फिर जेपीसी के पास भेजा जाए.


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अरबिंद कुमार मिश्रा

लेखक के बारे में

By अरबिंद कुमार मिश्रा

अरबिंद कुमार मिश्रा मुख्यधारा की पत्रकारिता में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले एक वरिष्ठ पत्रकार और लेखक हैं. वर्तमान में, वह प्रभात खबर डॉट कॉम (Prabhat Khabar) में सीनियर कंटेंट राइटर के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. अरबिंद नेशनल, इंटरनेशनल और स्पोर्ट्स कैटेगरी में अपनी लेखनी के लिए जाने जाते हैं. गहरी रिसर्च पर आधारित स्पेशल स्टोरीज, रिपोर्टिंग और जटिल मुद्दों पर आसान भाषा में 'एक्सप्लेनर' लिखना उनकी मुख्य यूएसपी (USP) है.

झारखंड की समृद्ध संस्कृति और लोक परंपराओं में उनकी गहरी रुचि है. अपनी उत्कृष्ट और सरोकार से जुड़ी रिपोर्टिंग के लिए उन्हें संस्थान स्तर पर कई बार सम्मानित और पुरस्कृत भी किया जा चुका है.

करियर का सफरनामा

अरबिंद ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत देश की प्रतिष्ठित बहुभाषी न्यूज एजेंसी 'हिंदुस्थान समाचार' से बतौर रिपोर्टर की थी. इसके बाद उन्होंने प्रसार भारती के अंग दूरदर्शन और आकाशवाणी के साथ भी काम किया, जहां उन्होंने एंकरिंग, वॉइस-ओवर और रिपोर्टिंग के गुर सीखे. साल 2011 में वह 'प्रभात खबर डॉट कॉम' से जुड़े और तब से लगातार डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं.

प्रमुख उपलब्धियां और ग्राउंड रिपोर्टिंग

खेल पत्रकारिता और जमीनी रिपोर्टिंग में अरबिंद का योगदान उल्लेखनीय रहा है. उनकी कुछ सबसे बड़ी उपलब्धियों में शामिल हैं:

34वें राष्ट्रीय खेल: झारखंड में आयोजित ऐतिहासिक 34वें नेशनल गेम्स की बेहतरीन और व्यापक ग्राउंड रिपोर्टिंग.

अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट: रांची के जेएससीए (JSCA) स्टेडियम में आयोजित कई इंटरनेशनल क्रिकेट मैचों को करीब से कवर किया.

पुरुष हॉकी वर्ल्ड कप (2018): भुवनेश्वर में आयोजित वर्ल्ड कप के फाइनल मुकाबले की शानदार स्पोर्ट्स रिपोर्टिंग.

पंचायतनामा: प्रभात खबर के इस खास विंग के लिए ग्रामीण इलाकों का दौरा कर कई प्रेरक 'सक्सेस स्टोरीज' लिखीं.

शैक्षणिक योग्यता (Education & Credentials)

UGC NET: साल 2019 में यूजीसी नेट (UGC NET) की परीक्षा उत्तीर्ण की.

बैचलर ऑफ जर्नलिज्म (BJMC): रांची विश्वविद्यालय से साल 2011 में पत्रकारिता में स्नातक की डिग्री हासिल की.

एम.ए. (नागपुरी भाषा): रांची विश्वविद्यालय के 'जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग' से साल 2009 में नागपुरी भाषा में स्नातकोत्तर (MA) की डिग्री हासिल की.

लेखन शैली और विशेषज्ञता: एक्सप्लेनर, रिसर्च बेस्ड स्टोरीज, स्पोर्ट्स जर्नलिज्म, इंटरनेशनल अफेयर्स और झारखंड की लोक-संस्कृति.

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