Fact Check: अजमेर शरीफ के सर्वेक्षण की मांग करने वाले याचिकाकर्ता के बेटे को कैंसर, सर्वेयर को हार्ट अटैक के दावे का सच जानें

सोशल मीडिया में वायरल हो रहे दोनों दावे फर्जी साबित हुए.
Fact Check: अजमेर शरीफ दरगाह में संकट मोचन महादेव मंदिर का दावा करते हुए सर्वे कराने की मांग करने वाले के बेटे को कैंसर और सर्वेयर को हार्ट अटैक से संबंधित वायरल दावे का क्या है सच. यहां पढ़ें.
Fact Check: राजस्थान के अजमेर में ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह में संकट मोचन महादेव मंदिर होने का दावा करने वाली याचिका को अजमेर सिविल कोर्ट ने 27 नवंबर, 2024 को स्वीकार किया और इस संबंध में अल्पसंख्यक मंत्रालय, दरगाह कमेटी अजमेर और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग को नोटिस जारी किया है. मामले में अगली सुनवाई 20 दिसंबर को होगी.
इस बीच, सोशल मीडिया पर एक पोस्ट शेयर कर दावा किया जा रहा है कि दरगाह के सर्वेक्षण के लिए याचिका दायर करने वाले विष्णु गुप्ता के बेटे को कैंसर हो गया है. वहीं, एक अन्य पोस्ट में यह दावा किया गया है कि अजमेर दरगाह का सर्वे करने वाले अधिकारी को दिल का दौरा पड़ा है. पीटीआई फैक्ट चेक डेस्क ने इन दोनों दावों की पड़ताल की और पाया कि ये दोनों दावे पुरी तरह से फर्जी और मनगढ़ंत है.
दावा
फेसबुक यूजर ‘जावेद रफी विधायक’ ने लिखा, “ख्वाजा गरीब नवाज की दरगाह का सर्वे याचिका देने वाला का बेटा हुआ कैंसर से पीड़ित अल्लाह हिदायत दे शिफा दे और समझ दे.” पोस्ट का लिंक, आर्काइव लिंक और स्क्रीनशॉट यहां देखें.

‘इंडिया मुस्लिम एकता’ नाम के फेसबुक यूजर ने 11 दिसंबर को एक पोस्ट शेयर करते हुए लिखा, “अजमेर दरगाह का सर्वे करने वाले अधिकारी को आया हार्ट अटैक” पोस्ट का लिंक, आर्काइव लिंक और स्क्रीनशॉट यहां देखें.

पड़ताल
पुष्टि के लिए डेस्क ने संबंधित कीवर्ड की मदद से दावे से जुड़ी मीडिया रिपोर्ट्स को ढूंढने की कोशिश की. यदि याचिकाकर्ता विष्णु शर्मा का बेटा कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से वाकई में पीड़ित होता तो यह खबर मीडिया में जरूर प्रकाशित होती, लेकिन डेस्क को ऐसी कोई विश्वसनीय मीडिया रिपोर्ट नहीं मिली.
जांच के दौरान हमें विष्णु गुप्ता का ‘एक्स’ पोस्ट मिला, जिसमें उन्होंने वायरल दावे का खंडन करते हुए इसे फर्जी बताया. उन्होंने 11 दिसंबर को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक पोस्ट शेयर करते हुए लिखा, “कुछ जिहादी आतंकवादी मानसिकता के लोग सोशल मीडिया पर खबर फैला रहे हैं कि अजमेर दरगाह पर केस करने वाले के बेटे को कैंसर हुआ! यह सभी खबर झूठी हैं और महादेव के आशीर्वाद से हमारा परिवार स्वस्थ्य जल्द हम सनातनी अजमेर संकट मोचन महादेव मंदिर में महादेव पर अभिषेक व पूजा पाठ करेंगे!” पोस्ट का लिंक और स्क्रीनशॉट यहां देखें.

चूंकि, एक अन्य पोस्ट में यह भी दावा किया गया है कि अजमेर दरगाह का सर्वेक्षण करने वाले अधिकारी को हार्ट अटैक आया है. इसलिए डेस्क ने संबंधित कीवर्ड की मदद से गूगल पर इस बारे में सर्च किया. हमें न तो अजमेर दरगाह में हालिया सर्वेक्षण से जुड़ी कोई विश्वसनीय रिपोर्ट मिली और न ही किसी अधिकारी को हार्ट अटैक आने से जुड़ी खबरें.
ईटीवी भारत की वेबसाइट पर 9 दिसंबर 2024 को प्रकाशित रिपोर्ट में बताया गया कि सोशल मीडिया पर अजमेर शरीफ को लेकर सिर्फ अफवाह और भ्रम फैलाया जा रहा है. ईटीवी से बातचीत में अंजुमन कमेटी के सचिव सरवर चिश्ती ने कहा कि ऐसा संभव नहीं है कि यहां सर्वेक्षण की अनुमति दी जाए और मीडिया को पता न हो और भारत में इस बारे में कोई चर्चा न हो. ख्वाजा गरीब नवाज में करोड़ों लोगों की आस्था है. सोशल मीडिया पर अजमेर शरीफ को लेकर सिर्फ अफवाह और भ्रम फैलाया जा रहा है. आप उर्स के दौरान दरगाह पर आएं, यहां अमन-चैन के साथ सभी का स्वागत है.
उन्होंने आगे कहा, ‘उर्स से पहले ढाई दिन का झोपड़ा, दरगाह परिसर में सुरक्षा के मद्देनजर सुरक्षा एजेंसियां जांच करती हैं. अशांति जैसा यहां कुछ नहीं हुआ है. 2 जनवरी से अजमेर में 813वां उर्स शुरू होने जा रहा है. इस बार भी उसी शान-ओ-शौकत से उर्स मनाया जाएगा जैसे हमेशा से मनाया जाता है. यह सिर्फ भ्रम फैलाया जा रहा है कि ख्वाजा गरीब नवाज की दरगाह में सर्वे किया जा रहा है.’ पूरी रिपोर्ट यहां पढ़ें.

पुष्टि के लिए डेस्क ने अंजुमन कमेटी के सचिव सरवर चिश्ती से संपर्क किया. उन्होंने पीटीआई को बताया कि अजमेर दरगाह में हाल फिलहाल में ऐसा कोई सर्वेक्षण नहीं किया गया है. चिश्ती ने कहा कि अजमेर दरगाह में आखिरी सर्वेक्षण 1949 में किया गया था और वह केवल प्रशासनिक उद्देश्यों के लिए था.
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अजमेर सिविल कोर्ट ने ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह में संकट मोचन महादेव मंदिर होने का दावा करने वाली याचिका पर 27 नवंबर को सुनवाई करते हुए अल्पसंख्यक मंत्रालय, दरगाह कमेटी अजमेर और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) को नोटिस जारी किया गया है. यह याचिका हिंदू सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष विष्णु गुप्ता द्वारा दायर की गई है. इस मामले में अगली सुनवाई 20 दिसंबर को होगी. इससे जुड़ी रिपोर्ट यहां, यहां और यहां पढ़ें.

जांच के अंत में डेस्क ने दरगाह थाने के पुलिस निरीक्षक नरेन्द्र जाखड़ से संपर्क किया. उन्होंने डेस्क को बताया कि अजमेर दरगाह में कोई सर्वेक्षण नहीं हुआ है और न ही किसी अधिकारी को हार्ट अटैक आया है. इस मामले को लेकर कोर्ट में अगली सुनवाई 20 दिसंबर को होगी. सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा दावा गलत है.
हमारी अब तक की जांच से यह साफ है कि सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे इन दावों में कोई सच्चाई नहीं है. यूजर्स मनगढ़ंत और फर्जी दावे सोशल मीडिया पर शेयर कर रहे हैं.
दावा
सोशल मीडिया पर कुछ पोस्ट शेयर कर दावा किया जा रहा है कि ख्वाजा गरीब नवाज की दरगाह के सर्वेक्षण के लिए याचिका दायर करने वाले व्यक्ति के बेटे को कैंसर हो गया है, तथा सर्वेक्षण करने वाले अधिकारी को दिल का दौरा पड़ा है.
तथ्य
पीटीआई फैक्ट चेक की जांच में दोनों दावे फर्जी साबित हुए.
निष्कर्ष
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे इन दावों में कोई सच्चाई नहीं है. यूजर्स मनगढ़ंत और फर्जी दावे सोशल मीडिया पर शेयर कर रहे हैं.
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(डिस्क्लेमर : इस खबर का फैक्ट चेक पीटीआई ने किया है. प्रभात खबर (prabhatkhabar.com) ने शक्ति कलेक्टिव के साथ भागीदारी के तहत इस फैक्ट चेक को पुनर्प्रकाशित किया है.)
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लेखक के बारे में
By Mithilesh Jha
मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.
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