El Nino: अल नीनो के संभावित प्रभावों से निपटने के लिए केंद्र सरकार हर सप्ताह करेगी समीक्षा बैठक

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सरकार अरहर, उड़द और मूंग जैसी दालों में देश को आत्मनिर्भर बनाने के लिए काम कर रही है. इसके लिए बेहतर बीज, तकनीकी मार्गदर्शन और खेती के रकबे में वृद्धि पर ध्यान दिया जा रहा है. देश में फिलहाल पर्याप्त मात्रा में उर्वरक उपलब्ध हैं और किसानों को किसी प्रकार की कमी नहीं होने दी जायेगी.

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El Nino: मंगलवार को कृषि भवन में एक उच्चस्तरीय बैठक हुई जिसमें खरीफ सीजन 2026 की तैयारियों की समीक्षा की गयी. बैठक में संभावित अल नीनो के असर, कपास उत्पादन बढ़ाने, दलहन में आत्मनिर्भरता और किसानों के लिए जरूरी तैयारियों पर चर्चा हुई. बैठक में यह तय किया गया कि अल नीनो के कारण जिन जिलों में कम बारिश या सूखे जैसी स्थिति बनने की आशंका है, वहां पहले से विशेष तैयारी की जायेगी. इसके लिए जिलेवार कंटिंजेंसी प्लान (आपात या वैकल्पिक कार्ययोजना) तैयार किए जायेंगे और किसानों को समय पर सलाह व सहायता उपलब्ध करायी जायेगी. समीक्षा बैठक में उर्वरकों की उपलब्धता, मंडी भाव, जलाशयों की स्थिति और राज्यों में खाद के भंडार की भी जानकारी ली गई. बैठक में कपास उत्पादन बढ़ाने पर विशेष जोर दिया गया. 


बैठक में अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि जिन 9-10 राज्यों में अल नीनो का असर ज्यादा पड़ सकता है, वहां जिला प्रशासन, कृषि विभाग और कृषि विज्ञान केंद्रों के साथ बैठकें आयोजित की जाये. किसानों को मौसम संबंधी चुनौतियों और वैकल्पिक फसलों की जानकारी देने के लिए जागरूकता अभियान भी चलाया जाये. अल नीनो से प्रभावित होने वाले राज्यों में झारखंड सहित राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़,ओडिशा, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक आदि है.


केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि इस विषय पर अब हर सप्ताह समीक्षा बैठक होगी. उन्होंने वैज्ञानिक खेती, बेहतर बीज, अंतर फसली खेती, नमी संरक्षण जैसी तकनीकों को बढ़ावा देने के निर्देश दिये ताकि किसानों की पैदावार और आय दोनों बढ़ सकें. दलहन उत्पादन के संबंध में उन्होंने कहा कि सरकार अरहर, उड़द और मूंग जैसी दालों में देश को आत्मनिर्भर बनाने के लिए काम कर रही है. इसके लिए बेहतर बीज, तकनीकी मार्गदर्शन और खेती के रकबे में वृद्धि पर ध्यान दिया जा रहा है. देश में फिलहाल पर्याप्त मात्रा में उर्वरक उपलब्ध हैं और किसानों को किसी प्रकार की कमी नहीं होने दी जायेगी. उन्होंने कृषि विश्वविद्यालयों, आईसीएआर संस्थानों, कृषि विज्ञान केंद्रों और राज्य कृषि विभागों के बीच बेहतर तालमेल पर भी जोर देते हुए कहा कि वैज्ञानिक जानकारी समय पर किसानों तक पहुंचनी चाहिए, ताकि खरीफ सीजन सफल और सुरक्षित बनाया जा सके.

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Anjani Kumar Singh

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By Anjani Kumar Singh

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