महाराष्ट्र राजनीतिक संकट: एकनाथ शिंदे बने रहेंगे विधायक दल के नेता, 34 एमएलए ने राज्यपाल को भेजा प्रस्ताव
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 23 Jun 2022 8:35 AM
महाराष्ट्र में राजनीतिक संकट थमने का नाम नहीं ले रहा है. शिवसेना के बागी नेता को मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे से नाराजगी नहीं है. वे एनसीपी और कांग्रेस के साथ पार्टी के गठबंधन से नाराज हैं. उन्होंने यह साफ कर दिया है कि शिवसेना के साथ मिलकर महाराष्ट्र में ये दोनों पार्टियां मजबूत हुई हैं.
मुंबई : महाराष्ट्र में राजनीतिक संकट थमने का नाम नहीं ले रहा है. सत्ता पाने के लिए हो रहे जोड़-तोड़ के बीच खबर निकलकर सामने आ रही है कि शिवसेना के बागी नेता और बाला साहेब ठाकरे के हिंदुत्व को मानने का दावा करने वाले एकनाथ शिंदे विधायक दल के नेता बने रहेंगे. इसके लिए शिवसेना के 34 विधायकों के हस्ताक्षर से एक प्रस्ताव भी पारित किया गया है. दिलचस्प बात यह भी है कि एकनाथ शिंदे को विधायक दल का नेता बनाने को लेकर इन 34 विधायकों के हस्ताक्षर वाला यह प्रस्ताव महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी को भेज दिया गया है.
सबसे बड़ी बात यह है कि शिवसेना के बागी नेता एकनाथ शिंदे मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे से कोई शिकायत नहीं है. उन्हें कांग्रेस और एनसीपी के गठबंधन से दिक्कत है. उन्हों यह स्पष्ट कर दिया है कि महाराष्ट्र में सरकार बनाने के लिए शिवसेना ने कांग्रेस और एनसीपी के साथ मिलकर गठबंधन किया. इससे राज्य में कांग्रेस और एनसीपी पहले के मुकाबले मजबूत हुए हैं, जबकि जमीनी स्तर पर शिवसेना और शिवसैनिकों का मनोबल कमजोर हुआ है. उन्होंने साफ तौर पर कह दिया है कि शिवसेना को कांग्रेस और एनसीपी के साथ हुए गठबंधन से बाहर आ जाना चाहिए. इसके साथ ही, उन्होंने यह भी साफ कर दिया है कि सरकार में व्याप्त भ्रष्टाचार से शिवसैनिकों में असंतोष बना हुआ है.
समाचार एजेंसी एएनआई की एक रिपोर्ट के अनुसार, मंगलवार को पारित प्रस्ताव में कहा गया कि एकनाथ शिंदे 2019 में सर्वसम्मति से शिवसेना विधायक दल के नेता चुने गए और विधायक दल के नेता बने रहेंगे. प्रस्ताव में कहा गया है कि भरत गोगावाले को पार्टी का मुख्य सचेतक नियुक्त किया गया है. हालांकि, महाराष्ट्र में पैदा हुए राजनीतिक संकट के बाद शिवसेना ने एकनाथ शिंदे को पार्टी विधायक दल के नेता के पद से हटा दिया था. हालांकि, बागी विधायकों ने अपने नए संकल्प के साथ पलटवार भी किया है.
पार्टी के इस प्रस्ताव में कहा गया है कि पिछले दो साल में शिवसेना की विचारधारा से समझौता किया गया है. इन विधायकों ने अनिल देशमुख और नवाब मलिक का जिक्र करते हुए सरकार में भ्रष्टाचार पर भी असंतोष व्यक्त किया है. अनिल देशमुख और नवाब मलिक फिलहाल में जेल में हैं. वहीं, शिवसेना के विधायकों की ओर से राज्यपाल को भेजे गए प्रस्ताव पर एकनाथ शिंदे ने कहा कि भरत गोगावाले को शिवसेना विधायक दल का मुख्य सचेतक नियुक्त किया गया है. इसलिए आज शाम विधायक दल की बैठक के संबंध में सुनील प्रभु द्वारा जारी आदेश अवैध है.
शिवसेना के बागी विधायकों ने कहा है कि विभिन्न विचारधाराओं के कारण एनसीपी और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के साथ सरकार बनाने के लिए पार्टी कार्यकर्ताओं में भारी असंतोष है. इस मामले पर एकनाथ शिंदे ने कहा कि शिवसेना के लिए पार्टी और पार्टी कार्यकर्ताओं को बचाने के लिए जरूरी है कि वह एनसीपी और कांग्रेस के साथ के अस्वाभाविक गठबंधन से बाहर आ जाए. उन्होंने कहा कि शिवसेना और शिवसैनिक गठबंधन के सहयोगी कांग्रेस और एनसीपी के मजबूत होने के बावजूद कमजोर हुए.
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