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DRDO: सैन्य संचार में अंतर-संचालन क्ै लिए भारतीय रेडियो सॉफ्टवेयर आर्किटेक्चर मानक 1.0 हुआ जारी 

Updated at : 07 Oct 2025 7:43 PM (IST)
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DRDO: सैन्य संचार में अंतर-संचालन क्ै लिए भारतीय रेडियो सॉफ्टवेयर आर्किटेक्चर मानक 1.0 हुआ जारी 

आईआरएसए को वेवफॉर्म पोर्टेबिलिटी, एसडीआर इंटरऑपरेबिलिटी, प्रमाणन और अनुरूपता के लिए डिजाइन किया गया है. एसडीआर एक वायरलेस संचार प्रणाली है, जो पारंपरिक हार्डवेयर घटकों को सॉफ्टवेयर और प्रोग्रामेबल प्रोसेसिंग प्लेटफॉर्म से प्रतिस्थापित करती है, जिससे सिग्नल मॉड्यूलेशन और डिमॉड्यूलेशन जैसे स्थिति और गतिशील रेडियो फंक्शन संभव होते हैं. आईआरएसए का शुभारंभ रक्षा संचार प्रौद्योगिकी में आत्मनिर्भरता की दिशा में भारत का निर्णायक कदम है.

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DRDO: रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन(डीआरडीओ) ने एकीकृत रक्षा स्टाफ(आईडीएस) और तीनों सेनाओं के सहयोग से सैन्य संचार अंतर-संचालन के लिए भारतीय रेडियो सॉफ्टवेयर आर्किटेक्चर(आईआरएसए)  मानक 1.0 जारी किया. यह सॉफ्टवेयर युक्‍त रेडियो का व्यापक सॉफ्टवेयर है, जो मानकीकृत इंटरफेस, एप्लीकेशन प्रोग्रामिंग इंटरफेस और वेवफॉर्म पोर्टेबिलिटी तंत्र को परिभाषित करता है. आईआरएसए को वेवफॉर्म पोर्टेबिलिटी, एसडीआर इंटरऑपरेबिलिटी, प्रमाणन और अनुरूपता के लिए डिजाइन किया गया है. एसडीआर एक वायरलेस संचार प्रणाली है, जो पारंपरिक हार्डवेयर घटकों को सॉफ्टवेयर और प्रोग्रामेबल प्रोसेसिंग प्लेटफॉर्म से प्रतिस्थापित करती है, जिससे सिग्नल मॉड्यूलेशन और डिमॉड्यूलेशन जैसे स्थिति और गतिशील रेडियो फंक्शन संभव होते हैं. 

आईआरएसए का शुभारंभ रक्षा संचार प्रौद्योगिकी में आत्मनिर्भरता की दिशा में भारत का  निर्णायक कदम है, जो स्वदेशी, अंतर-संचालनीय और भविष्य के लिए तैयार एसडीआर को आगे बढ़ाने में मदद करेगा. स्वदेशी तकनीक से बने इस आईआरएसए को वैश्विक उपयोग के लिए बनाया गया है. इसे परिचालन आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार किया गया है जो भविष्य की प्रौद्योगिकियों को एकीकृत करने का काम करेगा. डीआरडीओ भवन में आयोजित राष्ट्रीय कार्यशाला के दौरान इसे जारी किया गया.


भारतीय सेना को मिलेगी मदद


कार्यशाला में आईआरएसए के तकनीकी पहलू, पारिस्थितिकी तंत्र भूमिकाओं और भविष्य के रूपरेखा पर चर्चा हुई. इसमें उद्योग, शिक्षा जगत और तीनों सेनाओं के सहयोग अवसरों, भावी परियोजनाओं और तकनीक अपनाने के तौर-तरीकों पर चर्चा की गयी. कार्यक्रम में भारतीय सशस्त्र बलों, रक्षा उत्पादन विभाग, रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रम, शिक्षा जगत और अनुसंधान संस्थानों के प्रतिनिधि शामिल हुए. इस दौरान स्वदेशी संचार प्रौद्योगिकियों के विकास की दिशा में व्यापक और सहयोगात्मक दृष्टिकोण पर मंथन किया गया. डीआरडीओ के अध्यक्ष डॉक्टर समीर वी कामत, एकीकृत रक्षा स्टाफ प्रमुख, एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित और आईआईटी गांधीनगर के निदेशक डॉक्टर रजत मूना मौजूद रहे.

गौरतलब है कि आधुनिक सैन्य संचार में एसडीआर की महत्वपूर्ण भूमिका और राष्ट्रीय सॉफ्टवेयर मानक की आवश्यकता पर वर्ष 2021 में काम शुरू किया गया.  डीआरडीओ के नेतृत्व में एक प्रमुख तकनीकी टीम ने 2022 में एकीकृत रक्षा स्टाफ और सेनाओं के साथ मिलकर परिचालन और उपयोगकर्ता आवश्यकताओं को समझने के लिए विमर्श शुरू किया. हितधारकों के साथ व्यापक समीक्षा और परामर्श के बाद आईआरएसए संस्करण 1.0 को 2025 में उच्च-स्तरीय सलाहकार समिति द्वारा मंजूरी दी गयी.  

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Vinay Tiwari

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By Vinay Tiwari

Vinay Tiwari is a contributor at Prabhat Khabar.

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