Dr Ravi Rana: मानसिक स्वास्थ्य अब लग्जरी नहीं, जीवन के लिए जरूरी, बढ़ते संकट पर डॉ. रवि राणा ने जताई चिंता

Published by : Pritish Sahay Updated At : 16 May 2026 8:22 PM

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माही माइंड सेंटर के प्रसिद्ध मनोचिकित्सक डॉ. रवि राणा

Dr Ravi Rana ने चेतावनी दी है कि भारत में मानसिक स्वास्थ्य संकट छुपी महामारी बन चुका है. WHO के अनुसार हर सातवां भारतीय मानसिक विकार से प्रभावित है. शहरीकरण, प्रतिस्पर्धा, डिजिटल जीवनशैली और सामाजिक अलगाव से डिप्रेशन और एंग्जायटी बढ़ रही है.

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Dr Ravi Rana: भारत आज विश्व की सबसे तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में शुमार है, लेकिन इस विकास की चमक के पीछे एक गहरा संकट भी आकार ले रहा है. मेरठ स्थित माही माइंड सेंटर के प्रसिद्ध मनोचिकित्सक डॉ. रवि राणा ने आगाह किया है कि मानसिक स्वास्थ्य का बढ़ता बोझ देश के लिए एक ‘छुपी हुई महामारी’ बन चुका है, जिसे अब और नजरअंदाज नहीं किया जा सकता.

हर सातवें भारतीय पर मानसिक बीमारी का साया

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के आंकड़ों का हवाला देते हुए डॉ. राणा ने बताया कि भारत में हर 7 में से 1 व्यक्ति किसी न किसी मानसिक विकार से जूझ रहा है. शहरीकरण की अंधी दौड़, कड़ी प्रतिस्पर्धा, डिजिटल जीवनशैली और सामाजिक अलगाव ने डिप्रेशन, एंग्जायटी और नशे की लत जैसी समस्याओं को घर-घर पहुँचा दिया है.

डॉ. राणा के अनुसार, सबसे बड़ी चुनौती आज भी समाज में व्याप्त ‘कलंक’ (Stigma) है. लोग अपनी मानसिक स्थिति पर चर्चा करने में झिझकते हैं, जिससे वे समय पर विशेषज्ञ की सहायता नहीं ले पाते.

शारीरिक बीमारियों की जड़ में मानसिक तनाव

लेख में इस बात पर विशेष ज़ोर दिया गया है कि मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य एक-दूसरे के पूरक हैं. डॉ. राणा ने स्पष्ट किया कि लंबे समय तक बना रहने वाला तनाव शरीर में हार्मोनल असंतुलन पैदा करता है, जो आगे चलकर निम्नलिखित बीमारियों का कारण बनता है.

  • हृदय रोग और उच्च रक्तचाप (High BP)
  • मधुमेह (Diabetes)
  • पाचन तंत्र की विकृतियां
  • अनिद्रा (Insomnia)

उन्होंने यह भी बताया कि अवसाद के कारण प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) कम हो जाती है, जिससे व्यक्ति बार-बार अन्य बीमारियों की चपेट में आने लगता है.

समाधान की राह: ‘डिजिटल डिटॉक्स’ और जागरूकता

इस संकट से निपटने के लिए डॉ. राणा ने एक बहुआयामी दृष्टिकोण अपनाने का सुझाव दिया है.

  • जागरूकता: स्कूलों और कार्यस्थलों पर मानसिक स्वास्थ्य को चर्चा का मुख्य विषय बनाना होगा.
  • जीवनशैली में बदलाव: नियमित व्यायाम, संतुलित आहार और ‘डिजिटल डिटॉक्स’ (सोशल मीडिया से दूरी) मानसिक शांति के लिए अनिवार्य हैं.
  • समय पर परामर्श: लक्षणों को नजरअंदाज न करें और समय रहते मनोचिकित्सक से सलाह लें.

डॉ. रवि राणा का संदेश

“मानसिक स्वास्थ्य कोई विकल्प या लग्जरी नहीं, बल्कि एक बुनियादी जरूरत है. आज समय की मांग है कि हम मानसिक पीड़ा को भी उतनी ही गंभीरता से लें, जितनी हम किसी शारीरिक घाव या बीमारी को देते हैं.”

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लेखक के बारे में

By Pritish Sahay

प्रीतीश सहाय, इन्हें इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया इंडस्ट्री में 12 वर्षों से अधिक का अनुभव है. ये वर्तमान में प्रभात खबर डॉट कॉम के साथ डिजिटल कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं. मीडिया जगत में अपने अनुभव के दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण विषयों पर काम किया है और डिजिटल पत्रकारिता की बदलती दुनिया के साथ खुद को लगातार अपडेट रखा है. इनकी शिक्षा-दीक्षा झारखंड की राजधानी रांची में हुई है. संत जेवियर कॉलेज से ग्रेजुएट होने के बाद रांची यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता की डिग्री हासिल की. इसके बाद लगातार मीडिया संस्थान से जुड़े रहे हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत जी न्यूज से की थी. इसके बाद आजाद न्यूज, ईटीवी बिहार-झारखंड और न्यूज 11 में काम किया. साल 2018 से प्रभात खबर के साथ जुड़कर काम कर रहे हैं. प्रीतीश सहाय की रुचि मुख्य रूप से राजनीतिक खबरों, नेशनल और इंटरनेशनल इश्यू, स्पेस, साइंस और मौसम जैसे विषयों में रही है. समसामयिक घटनाओं को समझकर उसे सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाने की इनकी हमेशा कोशिश रहती है. वे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय राजनीति से जुड़े मुद्दों पर लगातार लेखन करते रहे हैं. इसके साथ ही विज्ञान और अंतरिक्ष से जुड़े विषयों पर भी लिखते हैं. डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में काम करते हुए उन्होंने कंटेंट प्लानिंग, न्यूज प्रोडक्शन, ट्रेंडिंग टॉपिक्स जैसे कई क्षेत्रों में काम किया है. तेजी से बदलते डिजिटल दौर में खबरों को सटीक, विश्वसनीय और आकर्षक तरीके से प्रस्तुत करना पत्रकारों के लिए चुनौती भी है और पेशा भी, इनकी कोशिश इन दोनों में तालमेल बनाते हुए बेहतर और सही आलेख प्रस्तुत करना है. वे सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म की जरूरतों को समझते हुए कंटेंट तैयार करते हैं, जिससे पाठकों तक खबरें प्रभावी ढंग से पहुंच सकें. इंटरनेशनल विषयों में रुचि होने कारण देशों के आपसी संबंध, वार अफेयर जैसे मुद्दों पर लिखना पसंद है. इनकी लेखन शैली तथ्यों पर आधारित होने के साथ-साथ पाठकों को विषय की गहराई तक ले जाने का प्रयास करती है. वे हमेशा ऐसी खबरों और विषयों को प्राथमिकता देते हैं जो राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय लिहाज से महत्वपूर्ण हों. रूस यूक्रेन युद्ध, मिडिल ईस्ट संकट जैसे विषयों से लेकर देश की राजनीतिक हालात और चुनाव के दौरान अलग-अलग तरह से खबरों को पेश करते आए हैं.

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