BJP की राह पर CPM! साइडलाइन होंगे विमान बोस, हन्नान मोल्ला जैसे बुजुर्ग नेता
Author : Prabhat Khabar Digital Desk Published by : Prabhat Khabar Updated At : 09 Aug 2021 7:02 PM
माकपा का 23 वां पार्टी कांग्रेस केरल के कोन्नूर में होने जा रहा है. वहां फैसले पर मुहर लगने के बाद विमान बोस और हन्नान मोल्ला सरीखे नेताओं को साइड लाइन करते हुए बैठा देखा जा सकता है.
नवीन कुमार राय (कोलकाता): बीजेपी ने लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी सरीखे नेताओं की उम्र का हवाला देते हुए उन लोगों को आराम करने का रास्ता दिखा दिया. क्या उसी राह पर अब मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) भी चल निकली है? राज्य के राजनीतिक गलियारों में इस बात को लेकर चर्चा तेज हो गई है. इस चर्चा ने माकपा के केंद्रीय कमिटी की बैठक के बाद तेजी पकड़ ली है. खबर है कि माकपा का 23 वां पार्टी कांग्रेस केरल के कोन्नूर में होने जा रहा है. जहां संभवत: इस पर मुहर लगेगी. इस फैसले पर मुहर लगने के बाद विमान बोस और हन्नान मोल्ला सरीखे नेताओं को साइड लाइन करते हुए बैठा देखा जा सकता है.
उल्लेखनीय है कि इस बार विधानसभा चुनाव में माकपा की उम्मीदवार सूची में युवा चेहरों का एक बड़ा समूह देखा गया. बावजूद बंगाल चुनाव में उनका संकट नहीं थम सका. वहीं तृणमूल कांग्रेस ने अपने उम्मीदवारों की सूची में भारी फेरबदल करते हुए एक तरह से बड़ी संख्या में अपने नए विधायकों को जीत दिलाने में सफल रही. राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि हालात को देखते हुए इस बार माकपा पार्टी के शीर्ष स्तर पर आयु सीमा कम करके संगठन में युवा नीति को प्राथमिकता देना चाहती है. मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी का यह विचार हकीकत में काम करता है तो विमान बसु जैसे वरिष्ठ और दिग्गज नेताओं को केंद्रीय समिति से इस्तीफा देना होगा.
अब एक नेता 80 वर्ष की आयु तक केंद्रीय समिति का सदस्य हो सकता है. उसके बाद भी अगर किसी की भूमिका टीम के लिए बहुत महत्वपूर्ण होती है तो उसे आमंत्रित सदस्य के रूप में रखा जाता है. इस बार आयु सीमा को 80 वर्ष से घटाकर 75 करने पर विचार किया जा रहा है. पार्टी की केंद्रीय कमिटी की बैठक में इस पर प्रारंभिक चर्चा हुई है. आगे चर्चा के बाद, संगठनात्मक रूपरेखा तैयार की जाएगी और इसे पार्टी कांग्रेस में प्रस्तुत किया जाएगा.
सीपीएम के पार्टी कांग्रेस का एजेंडा
माकपा की 23वीं पार्टी कांग्रेस अगले साल अप्रैल में केरल के कन्नूर में होने वाली है. माकपा आगामी पार्टी कांग्रेस से संगठन तक उसी रास्ते का उपयोग करना चाहती है, जिस तरह से केरल की सीपीएम, पार्टी और सरकार को, पीढ़ी-दर-पीढ़ी बदलकर अपनी सफलता बनाए रखने में सक्षम रही है. यानि केरल मॉडल को अपनाया जा सकता है. माना जा रहा है एक संभावित स्रोत के रूप में केंद्रीय कमिटी में होने के लिए आयु सीमा को कम करने का फैसला लिया जा सकता है.
पार्टी के पोलित ब्यूरो के सदस्य बिमान बाबू 80 से अधिक उम्र के हैं. यदि नए युग की नीति लागू होती है, तो उनके जैसे नेता को केंद्रीय कमिटी से इस्तीफा देना होगा. राज्य के पूर्व मंत्री श्यामल चक्रवर्ती का पहले ही निधन हो चुका है. पूर्व मुख्यमंत्री बुद्धदेव भट्टाचार्य शारीरिक बीमारी के चलते पहले ही इस्तीफा दे चुके हैं. अगर वो सक्रिय होते तो उन्हे भी पद छोड़ना पड़ता. केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन अब माकपा पोलित ब्यूरो के मौजूदा सदस्यों में से एक हैं. उसी राज्य के एस रामचंद्रन पिल्लई सबसे पुराने हैं. यदि नए नियम वास्तव में पेश किए जाते हैं, तो सवाल यह है कि क्या एकमात्र सत्तारूढ़ राज्य के मुख्यमंत्री के लिए ‘छूट’ होगी. केंद्रीय समिति में फिर से एक बार चर्चा हो सकती है कि पश्चिम बंगाल से किसे नया स्थान दिया जा सकता है.
पार्टी कांग्रेस के लिए पार्टी की राजनीतिक-संगठनात्मक मसौदा रिपोर्ट तैयार करने की मुख्य जिम्मेदारी प्रकाश करात के पास है. वो भी दो साल में 75 के हो जाएंगे. उनके बाद त्रिपुरा के पूर्व सीएम माणिक सरकार हैं. पार्टी कांग्रेस में नई कमिटी के गठन के मामले में पार्टी की क्या स्थिति होगी यह भी चर्चा का विषय है. इन्हीं सब कारणों से माकपा महासचिव सीताराम येचुरी ने केंद्रीय समिति की बैठक में कहा कि कोई फॉर्मूला तय करने से पहले सभी पहलुओं पर चर्चा करेगी.
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सीताराम येचुरी ने हमेशा टीम के अपेक्षाकृत युवा हिस्से का पक्ष लिया है. उनका सवाल है कि जहां देश की बहुसंख्यक आबादी की औसत उम्र 40 के आसपास है, वहां माकपा दूसरे रास्ते पर नहीं चल सकती. बंगाल में, माकपा ने पहले ही फैसला सुनाया है कि राज्य समिति में नए शामिल होने के समय कोई भी 60 से अधिक नहीं होना चाहिए. पोलित ब्यूरो के एक सदस्य ने कहा ‘संगठन के विभिन्न चरणों से गुजरने के बाद, केंद्रीय कमिटी, जो सर्वोच्च नीति बनाने वाली संस्था है, में शामिल होने की उम्र को कम करना मुश्किल है. हालांकि, पूरे संगठन की औसत आयु को अलग-अलग तरीकों से कम करना पड़ेगा. उसके बाद नीति को अमल में लाया जा सकता है.’
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